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Panchkula News: काले झंडे दिखाने पर विवाद, पुलिस टॉर्चर के आरोपों पर गरमाई सियासत
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युवक ने लगाया बुरी तरह से मारपीट करने का आरोप, पुलिस ने सिरे से किए खारिज
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़/सुनाम। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के लोक मिलनी कार्यक्रम में एक युवक द्वारा काले झंडे दिखाने पर विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को इस मामले पर खूब सियासत हुई। युवक ने पुलिस हिरासत में मारपीट और थर्ड डिग्री टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए हैं।
एंटी ड्रग एक्टिविस्ट मोहनजीत सिंह ने सुनाम के गांव शेरों में सीएम के कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाया। उन्होंने पंजाब में नशे के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। पुलिस ने मोहनजीत को छत से उतारकर हिरासत में लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद विवाद बढ़ गया।
मोहनजीत सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। उसे बिजली के झटके दिए गए और अमानवीय व्यवहार हुआ। उसने यह भी कहा कि हिरासत में कोई पदार्थ दिया गया, जिससे डोप टेस्ट पॉजिटिव आया। मोहनजीत को बाद में संगरूर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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संगरूर पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस अधीक्षक रवजोत ग्रेवाल के अनुसार, मोहनजीत को एहतियातन हिरासत में लिया गया था और मेडिकल परीक्षण में डोप टेस्ट पॉजिटिव पाया गया।
मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग:
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने इसे थर्ड डिग्री टॉर्चर बताते हुए सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आरोपों को जीवन और अभिव्यक्ति के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज और सीसीटीवी सुरक्षित रखने की भी मांग की।
भाजपा और अकाल तख्त की निंदा :
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कथित पुलिस प्रताड़ना की निंदा की। उन्होंने मोहनजीत से वीडियो कॉल पर बात कर निष्पक्ष जांच की मांग की। भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने भी मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप मांगा है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की।
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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़/सुनाम। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के लोक मिलनी कार्यक्रम में एक युवक द्वारा काले झंडे दिखाने पर विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को इस मामले पर खूब सियासत हुई। युवक ने पुलिस हिरासत में मारपीट और थर्ड डिग्री टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए हैं।
एंटी ड्रग एक्टिविस्ट मोहनजीत सिंह ने सुनाम के गांव शेरों में सीएम के कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाया। उन्होंने पंजाब में नशे के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। पुलिस ने मोहनजीत को छत से उतारकर हिरासत में लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद विवाद बढ़ गया।
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मोहनजीत सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। उसे बिजली के झटके दिए गए और अमानवीय व्यवहार हुआ। उसने यह भी कहा कि हिरासत में कोई पदार्थ दिया गया, जिससे डोप टेस्ट पॉजिटिव आया। मोहनजीत को बाद में संगरूर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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संगरूर पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस अधीक्षक रवजोत ग्रेवाल के अनुसार, मोहनजीत को एहतियातन हिरासत में लिया गया था और मेडिकल परीक्षण में डोप टेस्ट पॉजिटिव पाया गया।
मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग:
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने इसे थर्ड डिग्री टॉर्चर बताते हुए सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आरोपों को जीवन और अभिव्यक्ति के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज और सीसीटीवी सुरक्षित रखने की भी मांग की।
भाजपा और अकाल तख्त की निंदा :
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कथित पुलिस प्रताड़ना की निंदा की। उन्होंने मोहनजीत से वीडियो कॉल पर बात कर निष्पक्ष जांच की मांग की। भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने भी मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप मांगा है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की।