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कोविड, मेरी फसल-मेरा ब्योरा को लेकर मनोहर ने कसे अधिकारियों के पेंच
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चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीरवार को कोविड, मेरी फसल-मेरा ब्योरा, (एमएफएमबी), मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को लेकर उच्च अधिकारियों के पेच कसे। उन्होंने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर प्राथमिकता आधार पर शत-प्रतिशत भूमि का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही तीसरी लहर से पहले सीएचसी, पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की।
सीएम ने बैठक में कहा कि डीसी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक एकड़ भूमि की मैपिंग करवाई जाए। जीरो एरर एप्रोच के साथ खेतों का भौतिक सत्यापन करें। हर गांव का अलग डैश बोर्ड बनाया जाए। एमएफएमबी पर दर्ज भूमि का दैनिक डाटा गांव के लोगों के साथ साझा करें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि भूमि की मैपिंग के कार्य में विभिन्न विभागों के 6205 अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया है। कृषि, पंचायत, बागवानी, सिंचाई और राज्य कृषि विपणन बोर्ड सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी एक-एक एकड़ भूमि की मैपिंग करेंगे। डीएसआर तकनीक को अपनाकर किसान चावल की बुआई कर रहे हैं। यह कम खर्चीली और कम पानी वाली विधि है।
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87,000 एकड़ में वैकल्पिक फसलों की बुआई
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि मेरा पानी-मेरी विरासत (एमपीएमवी) योजना के तहत इस वर्ष के लिए तय किए गए 2 लाख एकड़ लक्ष्य में से अब तक लगभग 87,000 एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण को अपनाया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 लाख एकड़ के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करें।
संभावित तीसरी लहर के लिए पूरी तैयारी
कोविड -19 की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने कहा कि पर्याप्त बिस्तर की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। वयस्क कोविड रोगियों के लिए मौजूद बेड (आईसीयू/एचडीयू सहित) का उपयोग कोविड-19 महामारी की संभावित तीसरी लहर के दौरान कोविड बाल रोगियों के लिए किया जाएगा। कुरुक्षेत्र, कैथल, फतेहाबाद, झज्जर, चरखी दादरी, पलवल, महेंद्रगढ़ और हिसार में आठ नई सरकारी मॉलिक्यूलर ेलैब को मंजूरी दी है। इन प्रयोगशालाओं की स्थापना के बाद कुल क्षमता 1,02,200 टेस्ट प्रतिदिन हो जाएगी।
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सीएम ने बैठक में कहा कि डीसी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक एकड़ भूमि की मैपिंग करवाई जाए। जीरो एरर एप्रोच के साथ खेतों का भौतिक सत्यापन करें। हर गांव का अलग डैश बोर्ड बनाया जाए। एमएफएमबी पर दर्ज भूमि का दैनिक डाटा गांव के लोगों के साथ साझा करें।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि भूमि की मैपिंग के कार्य में विभिन्न विभागों के 6205 अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया है। कृषि, पंचायत, बागवानी, सिंचाई और राज्य कृषि विपणन बोर्ड सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी एक-एक एकड़ भूमि की मैपिंग करेंगे। डीएसआर तकनीक को अपनाकर किसान चावल की बुआई कर रहे हैं। यह कम खर्चीली और कम पानी वाली विधि है।
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87,000 एकड़ में वैकल्पिक फसलों की बुआई
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि मेरा पानी-मेरी विरासत (एमपीएमवी) योजना के तहत इस वर्ष के लिए तय किए गए 2 लाख एकड़ लक्ष्य में से अब तक लगभग 87,000 एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण को अपनाया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 लाख एकड़ के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करें।
संभावित तीसरी लहर के लिए पूरी तैयारी
कोविड -19 की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने कहा कि पर्याप्त बिस्तर की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। वयस्क कोविड रोगियों के लिए मौजूद बेड (आईसीयू/एचडीयू सहित) का उपयोग कोविड-19 महामारी की संभावित तीसरी लहर के दौरान कोविड बाल रोगियों के लिए किया जाएगा। कुरुक्षेत्र, कैथल, फतेहाबाद, झज्जर, चरखी दादरी, पलवल, महेंद्रगढ़ और हिसार में आठ नई सरकारी मॉलिक्यूलर ेलैब को मंजूरी दी है। इन प्रयोगशालाओं की स्थापना के बाद कुल क्षमता 1,02,200 टेस्ट प्रतिदिन हो जाएगी।