{"_id":"610eac988ebc3e7d25675dbf","slug":"clean-chit-not-given-to-dharamsot-in-scholarship-scam-bureau-news-pkl4227478174","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘स्कॉलरशिप घोटाले में धर्मसोत को नहीं दी गई क्लीन चिट’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘स्कॉलरशिप घोटाले में धर्मसोत को नहीं दी गई क्लीन चिट’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब में कथित तौर पर 64 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में प्रदेश के मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री ने आईएएस अफसरों की कमेटी की जिस रिपोर्ट के आधार पर धर्मसोत को इस मामले में क्लीन चिट दी थी, उसके बारे में राष्ट्रीय एससी आयोग के समक्ष पेश हुईं सामाजिक सुरक्षा विभाग की प्रिंसिपल सचिव राजी पी. श्रीवास्तव ने सरकार की तरफ से जवाब दाखिल करते हुए कहा है कि धर्मसोत के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए गठित आईएएस अफसरों की कमेटी ने अब तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है। अफसरों की कमेटी की रिपोर्ट अधूरी है और जैसे ही कमेटी द्वारा पूरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी, उसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा।
यह जानकारी राष्ट्रीय एससी आयोग के चेयरमैन विजय सांपला ने शनिवार को दी। राष्ट्रीय एससी आयोग ने इस मामले में पहले तो राज्य सरकार से दस्तावेज मांगे थे, लेकिन उपलब्ध न कराए जाने पर सामाजिक सुरक्षा विभाग की प्रिंसिपल सचिव राजी पी. श्रीवास्तव को आयोग के समक्ष पेश होकर सरकार का पक्ष रखने को कहा गया था। सांपला ने कहा कि इस मामले में यह सब कुछ प्रोसिडिंग का हिस्सा हैं। कुछ कालेजों की ओर से भी हलफनामा दाखिल किया है कि वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने उन्हें जानकारी दी है कि पंजाब सरकार केंद्र के खिलाफ अदालत जा रही है।
सियासी था कैप्टन का क्लीन चिट संबंधी बयान
विजय सांपला ने कहा कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने आयोग को बताया कि धर्मसोत को अभी क्लीन चिट नहीं दी गई। लेकिन जब इन अधिकारियों से आयोग ने पूछा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो धर्मसोत को इस मामले में क्लीन चिट दे दी है, इस पर अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री का वह सियासी बयान था।
विज्ञापन
यह है मामला
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला अगस्त 2020 में सामने आया था, जब सामाजिक सुरक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा राज्य की मुख्य सचिव को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए 303 करोड़ रुपये के फंड में से 63.91 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मामले में विभाग के मंत्री साधू सिंह धर्मसोत पर भी उंगली उठाई थी। विवाद के सियासी रंगत लेते ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्य सचिव विनी महाजन को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा। उन्होंने तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों की टीम गठित कर मामले की जांच करवाई थी। बाद में कहा गया कि अफसरों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री ने धर्मसोत को इस घोटाले में क्लीन चिट दे दी है। हालांकि सरकार द्वारा अफसरों द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट को आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। बाद में यह मामला केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय तक पहुंचा, जिसने दो बार पंजाब सरकार से घोटाले और इसकी जांच संबंधी सभी दस्तावेज मांगे। लेकिन प्रदेश सरकार ने दोनों बार केंद्रीय मंत्रालय को दस्तावेज नहीं सौंपे। आखिरकार केंद्रीय मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी, जिसके लिए पिछले हफ्ते पंजाब सरकार ने सहमति दे दी है।
विज्ञापन
यह जानकारी राष्ट्रीय एससी आयोग के चेयरमैन विजय सांपला ने शनिवार को दी। राष्ट्रीय एससी आयोग ने इस मामले में पहले तो राज्य सरकार से दस्तावेज मांगे थे, लेकिन उपलब्ध न कराए जाने पर सामाजिक सुरक्षा विभाग की प्रिंसिपल सचिव राजी पी. श्रीवास्तव को आयोग के समक्ष पेश होकर सरकार का पक्ष रखने को कहा गया था। सांपला ने कहा कि इस मामले में यह सब कुछ प्रोसिडिंग का हिस्सा हैं। कुछ कालेजों की ओर से भी हलफनामा दाखिल किया है कि वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने उन्हें जानकारी दी है कि पंजाब सरकार केंद्र के खिलाफ अदालत जा रही है।
विज्ञापन
सियासी था कैप्टन का क्लीन चिट संबंधी बयान
विजय सांपला ने कहा कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने आयोग को बताया कि धर्मसोत को अभी क्लीन चिट नहीं दी गई। लेकिन जब इन अधिकारियों से आयोग ने पूछा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो धर्मसोत को इस मामले में क्लीन चिट दे दी है, इस पर अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री का वह सियासी बयान था।
विज्ञापन
यह है मामला
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला अगस्त 2020 में सामने आया था, जब सामाजिक सुरक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा राज्य की मुख्य सचिव को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए 303 करोड़ रुपये के फंड में से 63.91 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मामले में विभाग के मंत्री साधू सिंह धर्मसोत पर भी उंगली उठाई थी। विवाद के सियासी रंगत लेते ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्य सचिव विनी महाजन को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा। उन्होंने तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों की टीम गठित कर मामले की जांच करवाई थी। बाद में कहा गया कि अफसरों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री ने धर्मसोत को इस घोटाले में क्लीन चिट दे दी है। हालांकि सरकार द्वारा अफसरों द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट को आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। बाद में यह मामला केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय तक पहुंचा, जिसने दो बार पंजाब सरकार से घोटाले और इसकी जांच संबंधी सभी दस्तावेज मांगे। लेकिन प्रदेश सरकार ने दोनों बार केंद्रीय मंत्रालय को दस्तावेज नहीं सौंपे। आखिरकार केंद्रीय मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी, जिसके लिए पिछले हफ्ते पंजाब सरकार ने सहमति दे दी है।