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सिबिल स्कोर चेक करवाया या नहीं: शादी करने जा रहे हैं तो कर लें इंक्वायरी, बदलते ट्रेंड का क्या है कारण

Mon, 31 Mar 2025 09:04 AM IST
निवेदिता वर्मा सुमित यादव, संवाद, पंचकूला
सुमित यादव, संवाद, पंचकूला Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 31 Mar 2025 09:04 AM IST
सार

फैमिली कोर्ट में सिबिल स्कोर खराब होने और बीमारी छुपाकर शादी करने से रिश्ते टूटने के मामले आ रहे हैं। अब कई परिवार इस पर जोर देने लगे हैं, ताकि वे जान सकें कि लड़का आर्थिक और सेहत के तौर पर शादी के लिए कितना सक्षम है।

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CIBIL score checked before marriage changing trend
शादियों के लिए देखा जा रहा सिबिल स्कोर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

वैवाहिक जीवन में अब तक राहु-केतु या मांगलिक होना ही बाधा बन रहे थे, लेकिन अब खराब सिबिल स्कोर भी रोड़ा अटका रहा है। रिश्ता करने के दौरान अब लड़कियां सिबिल स्कोर को भी प्राथमिकता दे रही हैं।

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बेटी के लिए बेहतर जीवनसाथी ढूंढने के लिए माता-पिता वर्षों इंतजार करते हैं। लड़के की नौकरी या व्यवसाय के अनुसार उसकी आय, परिवार के सदस्यों का खान-पान, रहन-सहन और विचार कैसा है, इस बारे में भी जानकारी जुटाते हैं। दोनों पक्षों की खोजबीन के बाद भी रिश्तों में नई रुकावटें आने लगी हैं। अब शादी के लिए लड़कियां लड़कों का सिबिल स्कोर भी देख रही हैं। 
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अगर शादी के बाद लड़के पर लोन होने का पता चलता है तो वह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। फैमिली कोर्ट के एडवोकेट यज्ञ दत्त शर्मा ने बताया कि कई मामलों में लड़कियां सिबिल स्कोर के अलावा लड़के का मेडिकल सर्टिफिकेट भी मांगती हैं। अगर लड़का अनफिट है तो वह रिश्ते से इन्कार कर देती हैं। साथ ही मैरिज एडवाइजर और एडवोकेट से संपर्क कर सिबिल स्कोर के बारे में पता लगवाती हैं।

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सिबिल स्कोर ऐसे आया ट्रेंड में

महाराष्ट्र में सिबिल स्कोर दिखाने की वजह से एक रिश्ता टूट गया था। यह खबर वायरल हो गई। इसके बाद कई राज्यों में लड़कियां सिबिल स्कोर देखकर ही रिश्ता फाइनल कर रही हैं। फैमिली कोर्ट में कुछ इस तरह के मामले देखने को मिले हैं। एडवोकेट ने बताया कि

शादी से पहले सिबिल चेक करना इसलिए जरूरी

एडवोकेट यज्ञ दत्त शर्मा ने बताया कि शादी से पहले लड़की का हक है कि उसका रिश्ता जिसके साथ जुड़ रहा है, उसके बारे में पूरी तरह जान सके। वह कर्ज में तो नहीं डूबा है। कई मामलों में देखा गया है कि चमक-धमक देखकर शादी तय हो जाती है और बाद में पता चलता है कि लड़के पर भारी कर्ज है। बाद में कर्ज का दबाव वधू पक्ष पर डाला जाता है। अब माता-पिता सुनिश्चित करते हैं कि लड़के की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और वह कर्ज में न फंसा हो। लड़कों का सिबिल स्कोर 750 से अधिक होने पर ही लड़कियां शादी के लिए राजी हो रही हैं।

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सिबिल स्कोर का महत्व

  • 750 से अधिक सिबिल होने पर तुरंत लोन मिल जाता है।
  • सिबिल 700 से कम होने पर बैंक के अधिकारी जांच करने के बाद ही लोन देते हैं।
  • 685 से कम सिबिल स्काेर अच्छा नहीं माना जाता है। आयकर विभाग में काम करने वाले हरमेश चंद के अनुसार इससे कम स्काेर आने का मतलब है कि लोन लेकर नहीं चुकाया गया है।
  • इसके अलावा सिबिल में लोन कब-कब लिया गया और कब-कब चुकाया गया या नहीं चुकाया गया, इसकी जानकारी भी होती है।

इस तरह चेक कर सकते हैं सिबिल स्कोर

  • बैंक में जाकर सिबिल स्कोर की जानकारी ले सकते हैं
  • गूगल में कई तरह की साइटें सिबिल स्काेर बताती हैं। ध्यान रखें कि साइट फर्जी न हो।
  • लोन देने से पहले बैंक भी अपने स्तर भी सिबिल चेक करते हैं

जानें मामले

एडवोकेट यज्ञ दत्त शर्मा ने बताया कि एक मामले में सामने आया कि शादी से पहले लड़की ने लड़के की बैंक स्टेटमेंट और सिबिल स्कोर देखने के लिए इच्छा जताई थी। उसकी बात न मानते हुए परिवार के दबाव में आकर उसने शादी कर ली। शादी के बाद जब उसे लड़के पर अधिक कर्ज होने का पता चला तो उसने रिश्ता तोड़ दिया।

दूसरे मामले में शादी के बाद लड़की को पता चला कि पति बीमार रहता है। जब चेकअप हुआ तो गंभीर बीमारी के बारे में पता चला। इसके बाद लड़की ने कोर्ट में तलाक का केस दायर कर दिया। इस तरह के मामले आने के बाद अब लड़कियां शादी से पहले लड़के का सिबिल स्कोर और मेडिकल सर्टिफिकेट की मांग कर रही हैं।

एक्सपर्ट की राय

फैमिली कोर्ट के अधिवक्ता ने बताया कि कुछ परिवारों को यह मांग बुरी लग सकती है, लेकिन शादी से पहले वित्तीय स्थिति को स्पष्ट कर लेना बेहतर रहता है, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न हों। शादी के बाद खुशहाल जिंदगी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जांचना जरूरी है।

सिबिल स्कोर क्यों होता है खराब

आयकर से जुड़े विशेषज्ञ हरमेश ने बताया कि सिबिल स्कोर खराब होने के मुख्य कारण समय पर लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान न करना है। इसके अलावा बहुत ज्यादा कर्ज लेना, क्रेडिट कार्ड का अधिक इस्तेमाल करना। लोन न भरकर बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से सिबिल खराब होता है।

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