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Panchkula News: चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज को जानकारी छुपाना पड़ा भारी, 10 लाख जुर्माना
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चंडीगढ़। विभिन्न अनियमितताओं के चलते कॉलेज के खिलाफ जारी अदालती आदेशों को छुपाकर कोर्ट को गुमराह करने के प्रयास पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पठानकोट के चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही विद्यार्थियों को अन्य कॉलेज में ट्रांसफर करने को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया है।
पठानकोट के वाइट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) ने याचिका दाखिल करते हुए जनवरी 2024 में जारी मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के आदेश को चुनौती दी थी। याची की दलील थी कि बिना इंस्पेक्शन याची संस्थान में अनियमितताएं बताते हुए यहां के विद्यार्थियों को अन्य कॉलेज में भेजने का निर्णय लिया गया। याची ने 2018 से लेकर अभी तक के उसके पक्ष में आए आदेशों का कोर्ट को ब्योरा दिया। कोर्ट ने पाया कि 2012 से 2017 तक कॉलेज के खिलाफ आए आदेशों को छुपाया था। इससे पहले कई बार कॉलेज की इंस्पेक्शन हो चुकी है और हर बार इसमें अनियमितताएं पाई गईं थीं। एक बार तो कॉलेज द्वारा जमा करवाई गई 10 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी जब्त हो चुकी है।
बोर्ड ने बताया कि एक इंस्पेक्शन में तो दो वार्ड में फर्जी फैकल्टी तक दिखाई गई थी जो असल में अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कर रहे थे। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जानबूझ कर तथ्यों को छुपाकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची अस्पताल पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही विद्यार्थियों को अन्य कॉलेज में शिफ्ट करने के खिलाफ याचिका को भी खारिज कर दिया।
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पठानकोट के वाइट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) ने याचिका दाखिल करते हुए जनवरी 2024 में जारी मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के आदेश को चुनौती दी थी। याची की दलील थी कि बिना इंस्पेक्शन याची संस्थान में अनियमितताएं बताते हुए यहां के विद्यार्थियों को अन्य कॉलेज में भेजने का निर्णय लिया गया। याची ने 2018 से लेकर अभी तक के उसके पक्ष में आए आदेशों का कोर्ट को ब्योरा दिया। कोर्ट ने पाया कि 2012 से 2017 तक कॉलेज के खिलाफ आए आदेशों को छुपाया था। इससे पहले कई बार कॉलेज की इंस्पेक्शन हो चुकी है और हर बार इसमें अनियमितताएं पाई गईं थीं। एक बार तो कॉलेज द्वारा जमा करवाई गई 10 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी जब्त हो चुकी है।
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बोर्ड ने बताया कि एक इंस्पेक्शन में तो दो वार्ड में फर्जी फैकल्टी तक दिखाई गई थी जो असल में अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कर रहे थे। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जानबूझ कर तथ्यों को छुपाकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची अस्पताल पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही विद्यार्थियों को अन्य कॉलेज में शिफ्ट करने के खिलाफ याचिका को भी खारिज कर दिया।
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