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Panchkula News: फोलिक एसिड व आयरन न लेने पर दिल व आंखों की बीमारियों के साथ जन्म ले रहे बच्चे
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लापरवाही भारी, जांच में करीब सौ बच्चे प्रभावित; फोलिक एसिड व आयरन न लेने को माना प्रमुख कारण
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। गर्भावस्था के दौरान लापरवाही के चलते नवजात बच्चे दिल और आंखों की गंभीर बीमारियों के साथ जन्म ले रहे हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत हुई जांच में ऐसे करीब सौ बच्चों की पहचान हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 120 बच्चों के ऑपरेशन किए गए, जिनमें आंखों की बीमारी के 48 और दिल की बीमारी के 20 मामले शामिल हैं। इसके अलावा कटे होंठ-तालु, टेढ़े पैर और अन्य जन्मजात विकारों के भी कई मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन बीमारियों का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान महिलाओं द्वारा फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम की गोलियां समय पर न लेना है। ग्रामीण क्षेत्रों कालका, पिंजौर, मोरनी, बरवाला और रायपुररानी के साथ शहरी क्षेत्र पंचकूला में भी यह लापरवाही देखने को मिल रही है।
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पंचकूला मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में आरबीएसके के तहत बच्चों के जन्मजात रोगों की पहचान और उपचार के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की दवाएं लेना बेहद जरूरी होता है, जिससे बच्चे के विकास में मदद मिलती है।
आरबीएसके के तहत मिल रही सुविधा
पीएमओ आरएस चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों का नि:शुल्क इलाज और ऑपरेशन किया जाता है। छह साल तक के बच्चों के लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती, जबकि उससे अधिक उम्र के बच्चों का किसी सरकारी संस्था में पंजीकरण जरूरी है।
जागरूकता से रोकी जा सकती हैं बीमारियां
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान समय पर टीकाकरण और दवाएं लेने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। महिलाओं को शुरुआत से ही स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए, ताकि नवजात स्वस्थ जन्म ले सकें।
दो साल का आंकड़ा (2025)
दिल के रोग - 20
आंखों के ऑपरेशन - 48
कटे होंठ-तालु - 22
क्लब फुट - 20
सुनने से संबंधित - 5
कमर के फोड़े - 3
अन्य - 2
कुल - 120
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। गर्भावस्था के दौरान लापरवाही के चलते नवजात बच्चे दिल और आंखों की गंभीर बीमारियों के साथ जन्म ले रहे हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत हुई जांच में ऐसे करीब सौ बच्चों की पहचान हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 120 बच्चों के ऑपरेशन किए गए, जिनमें आंखों की बीमारी के 48 और दिल की बीमारी के 20 मामले शामिल हैं। इसके अलावा कटे होंठ-तालु, टेढ़े पैर और अन्य जन्मजात विकारों के भी कई मामले सामने आए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन बीमारियों का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान महिलाओं द्वारा फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम की गोलियां समय पर न लेना है। ग्रामीण क्षेत्रों कालका, पिंजौर, मोरनी, बरवाला और रायपुररानी के साथ शहरी क्षेत्र पंचकूला में भी यह लापरवाही देखने को मिल रही है।
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पंचकूला मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में आरबीएसके के तहत बच्चों के जन्मजात रोगों की पहचान और उपचार के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की दवाएं लेना बेहद जरूरी होता है, जिससे बच्चे के विकास में मदद मिलती है।
आरबीएसके के तहत मिल रही सुविधा
पीएमओ आरएस चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों का नि:शुल्क इलाज और ऑपरेशन किया जाता है। छह साल तक के बच्चों के लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती, जबकि उससे अधिक उम्र के बच्चों का किसी सरकारी संस्था में पंजीकरण जरूरी है।
जागरूकता से रोकी जा सकती हैं बीमारियां
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान समय पर टीकाकरण और दवाएं लेने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। महिलाओं को शुरुआत से ही स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए, ताकि नवजात स्वस्थ जन्म ले सकें।
दो साल का आंकड़ा (2025)
दिल के रोग - 20
आंखों के ऑपरेशन - 48
कटे होंठ-तालु - 22
क्लब फुट - 20
सुनने से संबंधित - 5
कमर के फोड़े - 3
अन्य - 2
कुल - 120