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चेक बाउंस होना नैतिक पतन का अपराध नहीं माना जा सकता : हाईकोर्ट

Tue, 25 Nov 2025 01:59 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 01:59 AM IST
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Cheque bouncing cannot be considered an offence of moral turpitude: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि निजी क्षमता में जारी चेक बाउंस होना नैतिक पतन का अपराध नहीं माना जा सकता।
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इसी के साथ कोर्ट ने पंजाब स्टेट सिविल सप्लाई काॅरपोरेशन को मृत चौकीदार को 15 जून 2022 तक सेवा में माना और उसके परिवार को ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट समेत सभी सेवा लाभ ब्याज सहित देने के आदेश दिए। अदालत ने यह भी कहा कि उसके बेटे के मामले को नीति के मुताबिक अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार किया जाए।

यह मामला फिरोजपुर निवासी एक चौकीदार की पत्नी और बेटे की याचिका से जुड़ा था। उनका कहना था कि उसे चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के आधार पर गलत तरीके से 2020 में नौकरी से हटाया गया और बाद में परिवार को सेवा लाभ देने से भी इन्कार कर दिया गया।
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जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि यह चेक बाउंस का मामला उसकी निजी आर्थिक परेशानी से जुड़ा था किसी अपराधी इरादे से नहीं। उन्होंने साफ किया कि न तो कोई भ्रष्टाचार हुआ और न ही निगम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश इसलिए इसे नैतिक पतन जैसे अपराधों के बराबर नहीं ठहराया जा सकता।
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कोर्ट ने यह भी माना कि पहली सजा के बाद अचानक नौकरी चले जाने से कर्मचारी भारी आर्थिक संकट में आ गया था और मजबूरी में कर्ज लेकर गुजारा कर रहा था। अदालत ने 24 जनवरी 2023 को जारी कार्मिक विभाग की सूची का हवाला देते हुए कहा कि नैतिक पतन के अपराधों में भ्रष्टाचार, नशा तस्करी, मनी लाॅन्ड्रिंग, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, मानव तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराध शामिल हैं जबकि चेक बाउंस इनमें नहीं आता।


अंत में कोर्ट ने बर्खास्तगी और परिवार की मांग पत्र खारिज करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया और कहा कि केवल चेक बाउंस एक्ट की सजा के आधार पर सेवा लाभ रोकना कानूनन गलत है। हाईकोर्ट ने परिवार को सभी लाभ देने और बेटे के मामले को सहानुभूति नीति के अनुसार देखने का निर्देश दिया।
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