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चंडीगढ़ में पीजी की पॉलिसी में हुआ बदलाव, अब बिल्डिंग को हॉस्टल बना सकेंगे मकान मालिक
Sat, 29 Feb 2020 11:13 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Feb 2020 11:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर-32 के एक पीजी में आग लगने की घटना में तीन छात्राओं की हुई मौत के बाद से चंडीगढ़ प्रशासन की नींद खुल गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार को पीजी के लिए पुरानी पॉलिसी में कई बदलाव कर नई पॉलिसी तैयार की है। इसमें कई नए नियम जोड़े गए हैं। साथ ही कई तरह की शर्तें भी जोड़ी गई हैं।
नई पॉलिसी के अनुसार अब सभी पीजी के लिए फायर क्लीयरेंस अनिवार्य होगा। अब सिर्फ एक बार नहीं बल्कि, हर साल पीजी के लाइसेंस को रिन्यू कराना होगा। इसके अलावा पीजी संचालकों को प्रशासन के पास क्षतिपूर्ति सर्टिफिकेट भी देना होगा। प्रशासन ने साफ कहा है कि अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके अलावा एक नई तरह की कैटेगरी भी जल्द ही लाई जाएगी, जिसमें मकान मालिक प्रशासन की तरफ से बनाए जाने वाले विभिन्न नियमों को पूरा करने के बाद अपनी बिल्डिंग को हॉस्टल के तौर पर दे सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस बारे में नियम बनाए जा रहे हैं। जल्द ही इस बारे में नोटिफिकेशन जारी कर दी जाएगी।
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हमारा मकसद जबरन पीजी बंद करना नहीं: मनोज परिदा
एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा है कि प्रशासन का मकसद पीजी को बंद करना नहीं है। कहा कि, अवैध रूप से चल रहे पीजी, जो नियमों को पूरा नहीं करते हैं, उनसे विद्यार्थियों की जान को खतरा रहता है, ऐसे पीजी को चंडीगढ़ में चलने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी पीजी संचालक अपने पीजी को रजिस्टर करना चाहता है। उसके लिए सेक्टर-17 के डीसी ऑफिस में एक काउंटर खोला गया है, वहां जाकर रजिस्टर करवा सकता है।
यह काउंटर शनिवार और रविवार को भी खुला रहेगा। बताया कि पीजी के रजिस्ट्रेशन के लिए जल्द ही ऑनलाइन सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन पीजी संचालकों को तीन महीने का प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन देगा, इस पीरियड के अंदर वह सभी नियमों को पूरा कर सकते हैं। वहीं, पीजी संचालकों को एक महीने का वक्त दिया है ताकि वह फायर क्लीयरेंस ले सकें।
दो दिन में मिलेगा पीजी संचालकों को लाइसेंस : डीसी
प्रशासन की तरफ से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अवैध पीजी के बंद होने के बाद बहुत से विद्यार्थियों के लिए रहने की समस्या पैदा हो गई है। इसके लिए भी कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर में विभिन्न भवन है, जहां पर स्टूडेंट अगर चाहे तो पेमेंट बेसिस पर रह सकते हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने भी सेक्टर-42, 46, सेक्टर 50 के कॉमर्स कॉलेज और पेक में 6000 बच्चों के लिए हॉस्टल का निर्माण शुरू कर चुका है।
डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने आदेश दिए हैं कि पीजी संचालकों की तरफ से रजिस्ट्रेशन के लिए आने वाले आवेदन को दो दिन में क्लियर किया जाए ताकि पीजी संचालकों को किसी तरह की समस्या न आए। प्रशासन की तरफ से यह साफ किया गया है कि जो भी पीजी 7.5 मरले से कम के मकान में चलाया जा रहा है, उसे सील करने की प्रक्रिया इस तरह ही जारी रहेगी।
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नई पॉलिसी के अनुसार अब सभी पीजी के लिए फायर क्लीयरेंस अनिवार्य होगा। अब सिर्फ एक बार नहीं बल्कि, हर साल पीजी के लाइसेंस को रिन्यू कराना होगा। इसके अलावा पीजी संचालकों को प्रशासन के पास क्षतिपूर्ति सर्टिफिकेट भी देना होगा। प्रशासन ने साफ कहा है कि अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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इसके अलावा एक नई तरह की कैटेगरी भी जल्द ही लाई जाएगी, जिसमें मकान मालिक प्रशासन की तरफ से बनाए जाने वाले विभिन्न नियमों को पूरा करने के बाद अपनी बिल्डिंग को हॉस्टल के तौर पर दे सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस बारे में नियम बनाए जा रहे हैं। जल्द ही इस बारे में नोटिफिकेशन जारी कर दी जाएगी।
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हमारा मकसद जबरन पीजी बंद करना नहीं: मनोज परिदा
एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा है कि प्रशासन का मकसद पीजी को बंद करना नहीं है। कहा कि, अवैध रूप से चल रहे पीजी, जो नियमों को पूरा नहीं करते हैं, उनसे विद्यार्थियों की जान को खतरा रहता है, ऐसे पीजी को चंडीगढ़ में चलने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी पीजी संचालक अपने पीजी को रजिस्टर करना चाहता है। उसके लिए सेक्टर-17 के डीसी ऑफिस में एक काउंटर खोला गया है, वहां जाकर रजिस्टर करवा सकता है।
यह काउंटर शनिवार और रविवार को भी खुला रहेगा। बताया कि पीजी के रजिस्ट्रेशन के लिए जल्द ही ऑनलाइन सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन पीजी संचालकों को तीन महीने का प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन देगा, इस पीरियड के अंदर वह सभी नियमों को पूरा कर सकते हैं। वहीं, पीजी संचालकों को एक महीने का वक्त दिया है ताकि वह फायर क्लीयरेंस ले सकें।
दो दिन में मिलेगा पीजी संचालकों को लाइसेंस : डीसी
प्रशासन की तरफ से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अवैध पीजी के बंद होने के बाद बहुत से विद्यार्थियों के लिए रहने की समस्या पैदा हो गई है। इसके लिए भी कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर में विभिन्न भवन है, जहां पर स्टूडेंट अगर चाहे तो पेमेंट बेसिस पर रह सकते हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने भी सेक्टर-42, 46, सेक्टर 50 के कॉमर्स कॉलेज और पेक में 6000 बच्चों के लिए हॉस्टल का निर्माण शुरू कर चुका है।
डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने आदेश दिए हैं कि पीजी संचालकों की तरफ से रजिस्ट्रेशन के लिए आने वाले आवेदन को दो दिन में क्लियर किया जाए ताकि पीजी संचालकों को किसी तरह की समस्या न आए। प्रशासन की तरफ से यह साफ किया गया है कि जो भी पीजी 7.5 मरले से कम के मकान में चलाया जा रहा है, उसे सील करने की प्रक्रिया इस तरह ही जारी रहेगी।