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निरोगी रहना है तो खट्टी चीजों से कर लें अभी तौबा, दूध और घी का करें सेवन

Fri, 08 Oct 2021 12:15 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 12:15 AM IST
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Chandigarh, Stay away from sour things, consume milk and ghee, ayurveda, remain healthy
चंडीगढ़। मौसम बदलने के साथ भोजन की प्रकृति भी बदलनी आवश्यक है, ताकि वे बदलाव हमें शारीरिक मजबूती दे सकें। आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि अगर मौसम केअनुकूल भोजन का सेवन नहीं किया गया तो रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने केसाथ शरीर में विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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वहीं, ऋतु और शरीर की प्रकृति केअनुसार भोजन शरीर को ताकत देता है। सितंबर से नवंबर तक शरद ऋतु की समयावधि तय की गई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि आहार में दूध और घी क ी मात्रा बढ़ाने केसाथ ही खट्टी चीजों से दूरी बना लें। वहीं शहद, काली मिर्च, अदरक और तुलसी का सेवन निरोगी रखने में सहायक होगा।
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चंडीगढ़ में आयुष के नोडल अधिकारी व आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजीव कपिला का कहना है इस ऋतु में घी, दूध का सेवन करना उचित माना गया है। नारियल तेल और देसी घी को खाने में शामिल करें, क्योंकि ये पेट साफ रखने में मदद करते हैं, लेकिन इसका ध्यान रहे कि घी तलने की बजाय सब्जी या दाल में ऊपर से डालकर खाना ही फायदेमंद होगा। वहीं, गेहूं, जौ, ज्वार, धान का प्रयोग खाने में फायदेमंद होता है, जबकि सब्जियों में लौकी, तरोई, चौलाई, आलू, गाजर, गोभी, परवल लेने से सेहत ठीक रहती है, जबकि फल में अंगूर, केला, नारियल, पपीता, अनार, गन्ना ले सकते हैं।
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खाने में होने चाहिए सभी 6 रस
सेक्टर-37 आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी की आयुर्वेदाचार्य डॉ. आरती के अनुसार भोजन में 6 रस शामिल होने चाहिए। ये 6 रस हैं- मधुर (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा), कटु (कड़वा), तिक्त (तीखा) और कषाय (कसैला)। शरीर की प्रकृति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। इससे शरीर में पोषक तत्वों का असंतुलन नहीं होता।
इसका सेवन न करें
शरद ऋतु में मट्ठे की बनी कढ़ी, कच्चा आम, झींगा, राजमा, बड़ी मछली, सूखी सब्जी, काला चना, हींग, मिर्च, सरसों का तेल, मट्ठा, सौंफ, लहसुन, बैंगन, करेला, काली मिर्च, पीपल, उड़द से बने खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए।

इनसेट-
प्रकृति जैसा वैसा भोजन करें (रस)
- वात- मीठा, खट्टा और नमकीन
- पित्त- मीठा, तीखा और कसैला
- कफ- कड़वा, तीखा, कसैला
इनसेट-
ऋतुओं का समय चक्र
शिशिर ऋतु (जनवरी से मार्च)
बसंत ऋतु (मार्च से मई)
ग्रीष्म ऋतु (मई से जुलाई)
वर्षा ऋतु (जुलाई से सितंबर)
शरद ऋतु (सितंबर से नवंबर)
हेमंत ऋतु (नवंबर से जनवरी)
कोट
आयुर्वेद में ऋतुओं के अनुसार आहार (भोजन) लेना चाहिए। बदलते मौसम में उसक ी प्रकृति केअनुसार भोजन करने से बीमारियों से बचाव होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
-आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजीव कपिला, आयुष केनोडल अधिकारी
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