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सफलता: विदेश में पहली बार रुकी चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी, लक्जमबर्ग सरकार ने लगाई रोक

Sat, 18 Sep 2021 09:53 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 18 Sep 2021 09:53 PM IST
सार

लक्जमबर्ग में जिन फर्नीचरों की नीलामी होनी थी, वह चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवन (सचिवालय), पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट और पंजाब यूनिवर्सिटी के थे। नीलामी में इन जगहों की ऑफिस केन कुर्सी, सीनेट कमेटी कुर्सियां, छोटे डेस्क, ईजी टेबल और ईजी आर्म कुर्सियां शामिल थीं।

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Luxembourg Government Banned Auction of Heritage Furniture of Chandigarh
हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा की मेहनत करीब 11 साल बाद रंग लाई है। लक्जमबर्ग में 18 सितंबर को चंडीगढ़ के विरासती फर्नीचर की नीलामी होनी थी। इसकी जानकारी अजय जग्गा ने लक्जमबर्ग सरकार को दी। इसके बाद लक्जमबर्ग के संस्कृति मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नीलामी शुरू होने से पहले ही रोक लगा दी। जग्गा ने इसे ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि 11 साल में यह पहली बार हुआ है।

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अजय जग्गा ने लक्जमबर्ग के संस्कृति मंत्रालय का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह भी आश्चर्य की बात है कि किसी देश का मंत्रालय सीधे आम आदमी से संपर्क कर रहा है और उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की है। नीलामी घर की वेबसाइट पर चंडीगढ़ के जो विरासती फर्नीचर रखे गए थे, उसे हटा दिया गया है। इसमें शहर के विरासती फर्नीचर की छह आइटम्स को रखा गया था।
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जग्गा की शिकायत पर लक्जमबर्ग की संस्कृति मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी मांगी थी कि विरासती फर्नीचर के निर्यात पर रोक और इसे अवैध रूप से देश से बाहर पहुंचाने के संबंध में दस्तावेज मुहैया करवाए जाएं, जिसे उन्होंने भेज दिया। इसके बाद मंत्रालय ने नीलामी को रोक दिया।

सचिवालय, हाईकोर्ट और पीयू के विरासती फर्नीचर की होनी थी नीलामी
अजय जग्गा ने बताया कि लक्जमबर्ग में जिन फर्नीचरों की नीलामी होनी थी, वह चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवन (सचिवालय), पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट और पंजाब यूनिवर्सिटी के थे। नीलामी में इन जगहों की ऑफिस केन कुर्सी, सीनेट कमेटी कुर्सियां, छोटे डेस्क, ईजी टेबल और ईजी आर्म कुर्सियां शामिल थीं। हालांकि अब भी विदेशों में नीलामी जारी है, इसके लिए वह आगे भी प्रयास करते रहेंगे। 


इस साल अब तक विदेशों में 12 बार चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर नीलाम हो चुका है, लेकिन प्रशासन के अधिकारी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जग्गा ने कहा कि हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी को रोकने के साथ ही इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार देश से बाहर ये हेरिटेज फर्नीचर पहुंच कैसे रहा है।

क्यों विदेशों में लाखों में नीलाम होते हैं चंडीगढ़ के फर्नीचर?
ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे के काम को पसंद करने वालों की संख्या करोड़ों में हैं। उनके चाहवान कीमत की परवाह किए बिना उनके डिजाइन सामानों को खरीदते हैं। ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे ने चंडीगढ़ में काफी काम किया, इसलिए उनके डिजाइन किए कई सामान चंडीगढ़ में बिखरे पड़े हैं। इन फर्नीचरों की मांग कितनी है, इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020 में चंडीगढ़ का एक सोफा करीब 32 लाख रुपये में बिका था।

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