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कोरोना का डर, ईएसआई डिस्पेंसरी में एक शिफ्ट में चल रही ओपीडी
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सेक्टर-29 स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी में अब भी कोरोना फैलने का खतरा बरकरार है। कोरोना संक्रमण दर शून्य से नीचे आने के बावजूद यहां दो की बजाय एक ही शिफ्ट में ओपीडी संचालित की जा रही है।
विभाग के आला अधिकारी कोरोना से बचाव केमानकों का हवाला दे रहे हैं। वहीं, डिस्पेंसरी में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि महज दो डॉक्टरों के सहारे एक शिफ्ट चलाना मुश्किल है, दो कैसे चलाई जाए। इससे सबसे ज्यादा परेशानी उन नौकरीपेशा लोगों को उठानी पड़ रही है, जो शाम को ड्यूटी से लौटते वक्त अपने मर्ज का इलाज कराने जाते थे। डॉक्टरों की कमी का आलम यह है कि दो शिफ्ट की बजाय महज एक शिफ्ट में सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक ही मरीज देखे जा रहे हैं, जबकि पहले सुबह 8 से दोपहर 2 बजे और दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक दो शिफ्ट में ओपीडी संचालित होती थी।
मौजूदा समय में अस्पताल में चार मेडिकल ऑफिसर और एक दंतरोग विशेषज्ञ का पद है। इन पांच में से दो डॉक्टर ही ओपीडी में आ रहे हैं। एक डाक्टर मेडिकल लीव, दूसरे अर्न लीव, तीसरे के सेवानिवृत्त होने पर नई तैनाती लंबित है। इस संबंध में डिस्पेंसरी की ओर से उच्चाधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
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बॉक्स
पीजीआई ओपीडी खुली, डिस्पेंसरी में अभी भी कोरोना का हवाला
पहले डिस्पेंसरी में शाम 6 बजे तक डॉक्टर मिलते थे। इससे ऑफिस से घर जाते समय इलाज कराना संभव था। अब तो व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। दो बजे ओपीडी बंद कर दी जाती है।
-पवन कुमार, रामदरबार
पीजीआई जैसे संस्थान में जहां एक दिन में 10 हजार से ज्यादा मरीजों की ओपीडी होती है, उसे पहले की तरह संचालित किया जाना शुरू कर दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को ईएसआई डिस्पेंसरी में अब भी कोरोना का खौफ है। ये सब काम न करने का बहाना है।
राहुल कुमार, हल्लोमाजरा
कोट-
कोविड केचलते व्यवस्था में बदलाव किया गया था। धीरे-धीरे पहले वाली व्यवस्था संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मरीजों को दो शिफ्ट में ओपीडी का लाभ मिल सके।
डॉ. वीकेनागपाल, उप निदेशक स्वास्थ्य
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विभाग के आला अधिकारी कोरोना से बचाव केमानकों का हवाला दे रहे हैं। वहीं, डिस्पेंसरी में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि महज दो डॉक्टरों के सहारे एक शिफ्ट चलाना मुश्किल है, दो कैसे चलाई जाए। इससे सबसे ज्यादा परेशानी उन नौकरीपेशा लोगों को उठानी पड़ रही है, जो शाम को ड्यूटी से लौटते वक्त अपने मर्ज का इलाज कराने जाते थे। डॉक्टरों की कमी का आलम यह है कि दो शिफ्ट की बजाय महज एक शिफ्ट में सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक ही मरीज देखे जा रहे हैं, जबकि पहले सुबह 8 से दोपहर 2 बजे और दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक दो शिफ्ट में ओपीडी संचालित होती थी।
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मौजूदा समय में अस्पताल में चार मेडिकल ऑफिसर और एक दंतरोग विशेषज्ञ का पद है। इन पांच में से दो डॉक्टर ही ओपीडी में आ रहे हैं। एक डाक्टर मेडिकल लीव, दूसरे अर्न लीव, तीसरे के सेवानिवृत्त होने पर नई तैनाती लंबित है। इस संबंध में डिस्पेंसरी की ओर से उच्चाधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
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पीजीआई ओपीडी खुली, डिस्पेंसरी में अभी भी कोरोना का हवाला
पहले डिस्पेंसरी में शाम 6 बजे तक डॉक्टर मिलते थे। इससे ऑफिस से घर जाते समय इलाज कराना संभव था। अब तो व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। दो बजे ओपीडी बंद कर दी जाती है।
-पवन कुमार, रामदरबार
पीजीआई जैसे संस्थान में जहां एक दिन में 10 हजार से ज्यादा मरीजों की ओपीडी होती है, उसे पहले की तरह संचालित किया जाना शुरू कर दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को ईएसआई डिस्पेंसरी में अब भी कोरोना का खौफ है। ये सब काम न करने का बहाना है।
राहुल कुमार, हल्लोमाजरा
कोट-
कोविड केचलते व्यवस्था में बदलाव किया गया था। धीरे-धीरे पहले वाली व्यवस्था संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मरीजों को दो शिफ्ट में ओपीडी का लाभ मिल सके।
डॉ. वीकेनागपाल, उप निदेशक स्वास्थ्य