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गिरोह की देशभर में 50 टीमें सक्रिय, हर वारदात के बाद तमिलनाडु जाता है पैसा
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चंडीगढ़। सेक्टर-34 में कैश वैन से 39 लाख रुपये से भरा बक्सा उड़ाने के मामले में गिरफ्तार आरोपी सत्यासीलन ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उसके गिरोह की करीब 50 टीमें देशभर में सक्रिय हैं। कहीं भी लूट या चोरी की वारदात के बाद सदस्य रुपये लेकर तमिलनाडु में सरगना की पत्नी के पास पहुंचते हैं। वहीं पर सभी को बराबर-बराबर हिस्सा मिलता है। कोई सदस्य किसी कारण से टीम में शामिल नहीं हो पाता, तब भी उसे बराबर का हिस्सा दिया जाता है। वहीं, पुलिस ने दो दिन का रिमांड खत्म होने के बाद आरोपी को बुधवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
आरोपी तमिलनाडु निवासी सत्यासीलन ने पुलिस को बताया कि कैश वैन से रुपये उड़ाने के बाद वह खुद तमिलनाडु रुपये लेकर गया था। उसने खुलासा किया है कि गिरोह के सदस्य सिर्फ आपस में ही मोबाइल पर बात करते थे, उनके मोबाइल नंबर से किसी और को कॉल नहीं की जाती थी। जिन मोबाइल नंबरों का आरोपी प्रयोग कर रहे थे, वह नंबर उनके ही परिवार के सदस्यों के थे। वारदात के बाद आरोपियों ने नंबर बंद कर दिए थे।
पुलिस ने जब डंप डाटा उठाया तो पता चला कि दो नंबर एक साथ बंद हुए हैं। दोनो नंबरों पर इंटरनेशनल सिम चल रही थी। पुलिस ने जब उन नंबरों को सर्विलांस पर लगाया तो पता चला कि ये नंबर एक मोबाइल में एक्टिव हुए हैं। पहले कई दिन तक दोनों मोबाइल नंबरों को बंद रखा गया, लेकिन कुछ दिन बाद एक नंबर सक्रिय हो गया। उस मोबाइल में एक और सिल चल सक्रिय था, जिससे पुलिस को उस मोबाइल का आईएमईआई नंबर मिला। इसके आधार पर उस शख्स के घर का पता मिला। जांच में पता चला कि मोबाइल उपयोग करने वाला आरोपी के परिवार का ही सदस्य है। परिवार के सदस्य ने पुलिस को बताया की यह नंबर सत्यासीलन चला रहा है। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस तमिलनाडु क्राइम ब्रांच के साथ उसके घर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके अलावा पुलिस ने चार अन्य आरोपियों के घर दबिश दी, लेकिन आरोपी वहां नहीं मिले।
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आरोपी तमिलनाडु निवासी सत्यासीलन ने पुलिस को बताया कि कैश वैन से रुपये उड़ाने के बाद वह खुद तमिलनाडु रुपये लेकर गया था। उसने खुलासा किया है कि गिरोह के सदस्य सिर्फ आपस में ही मोबाइल पर बात करते थे, उनके मोबाइल नंबर से किसी और को कॉल नहीं की जाती थी। जिन मोबाइल नंबरों का आरोपी प्रयोग कर रहे थे, वह नंबर उनके ही परिवार के सदस्यों के थे। वारदात के बाद आरोपियों ने नंबर बंद कर दिए थे।
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पुलिस ने जब डंप डाटा उठाया तो पता चला कि दो नंबर एक साथ बंद हुए हैं। दोनो नंबरों पर इंटरनेशनल सिम चल रही थी। पुलिस ने जब उन नंबरों को सर्विलांस पर लगाया तो पता चला कि ये नंबर एक मोबाइल में एक्टिव हुए हैं। पहले कई दिन तक दोनों मोबाइल नंबरों को बंद रखा गया, लेकिन कुछ दिन बाद एक नंबर सक्रिय हो गया। उस मोबाइल में एक और सिल चल सक्रिय था, जिससे पुलिस को उस मोबाइल का आईएमईआई नंबर मिला। इसके आधार पर उस शख्स के घर का पता मिला। जांच में पता चला कि मोबाइल उपयोग करने वाला आरोपी के परिवार का ही सदस्य है। परिवार के सदस्य ने पुलिस को बताया की यह नंबर सत्यासीलन चला रहा है। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस तमिलनाडु क्राइम ब्रांच के साथ उसके घर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके अलावा पुलिस ने चार अन्य आरोपियों के घर दबिश दी, लेकिन आरोपी वहां नहीं मिले।
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