{"_id":"612e97928ebc3eb7827aa86c","slug":"chandigarh-afghan-girls-in-panic-said-want-to-reach-india-soon-panchkula-news-pkl425266034","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफगानी छात्राएं दहशत में, कहा-जल्द भारत पहुंचना चाहते हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफगानी छात्राएं दहशत में, कहा-जल्द भारत पहुंचना चाहते हैं
विज्ञापन
चंडीगढ़। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां हालात बिगड़ते जा रहे हैं। महिलाएं सबसे अधिक चिंतित हैं, क्योंकि उन्होंने ही तालिबानियों की क्रूरता सबसे अधिक झेली है। उन्हें वहां न तो पढ़ने की आजादी है और न नौकरी करने की। हालांकि इस बार तालिबान लगातार यह बयान दे रहा है कि महिलाओं को आजादी दी जाएगी। उनके अधिकार बहाल किए जाएंगे, लेकिन इस पर वहां की महिलाएं और लड़कियां यकीन नहीं कर पा रहीं। चंडीगढ़ और पंजाब के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली 20 से अधिक अफगानी छात्राएं अभी वहां फंसी हुई हैं। उनको अपने भविष्य से पहले इज्जत की चिंता सता रही है। इन छात्राओं का कहना है कि कहीं तालिबानी इसे तार-तार न कर दें। माता-पिता भी रातभर इसी चिंता में सो नहीं पा रहे।
महिलाएं नौकरी करती थीं, अब घरों में कैद हैं
अफगानिस्तान के मजार की रहने वाली आफरीन मोहाली के एक शिक्षण संस्थान से एमबीए कर रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर से पहले वह अपने घर चली गई थीं। इसी बीच अब वहां तालिबान का कब्जा हो गया है। इससे वह डरी हुई हैं। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि हर दिन इंतजार कर रहे हैं कि कब भारत के लिए उड़ानें शुरू होंगी। वीजा के लिए आवेदन भी कर दिया है लेकिन वह भी फाइनल नहीं हुआ है। यहां इज्जत बचाने की चिंता है। महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। घरों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। पता नहीं आगे क्या होगा। यहां की अन्य महिलाओं को भी डर सता रहा है। कुछ नौकरी करती थीं, जो अब घरों में कैद हैं।
बेटियों की चिंता, रातभर सो नहीं पा रहे अभिभावक
काबुल निवासी छात्रा इलानिला चंडीगढ़ के एक कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई ऑनलाइन होने के कारण वह अपने देश चली गई थीं। उन्होंने बताया कि तालिबानी दिन-रात सड़कों पर गश्त कर रहे हैं। माता-पिता व भाई चाहते हैं कि जल्द से जल्द परिवार की बेटियां भारत पहुंच जाएं। सभी को बेटियों की चिंता सता रही है। वह फिक्र में रातभर नहीं सो पा रहे। वहीं, पीयू में पढ़ाई करने वाले अफगानी छात्र इरफान की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि उनकी बहन आफिया अफगानिस्तान में फंसी है। वह मोहाली के एक शिक्षण संस्थान में पढ़ाई करती है। वह जल्द से जल्द अपनी बहन को भारत लाना चाहते हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के प्रति तालिबानी बेहद क्रूर हैं। परिवार संकट में है। वहां रोजगार नहीं रहा। फीस आदि भरने के लिए पैसे भी नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिलाएं नौकरी करती थीं, अब घरों में कैद हैं
अफगानिस्तान के मजार की रहने वाली आफरीन मोहाली के एक शिक्षण संस्थान से एमबीए कर रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर से पहले वह अपने घर चली गई थीं। इसी बीच अब वहां तालिबान का कब्जा हो गया है। इससे वह डरी हुई हैं। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि हर दिन इंतजार कर रहे हैं कि कब भारत के लिए उड़ानें शुरू होंगी। वीजा के लिए आवेदन भी कर दिया है लेकिन वह भी फाइनल नहीं हुआ है। यहां इज्जत बचाने की चिंता है। महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। घरों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। पता नहीं आगे क्या होगा। यहां की अन्य महिलाओं को भी डर सता रहा है। कुछ नौकरी करती थीं, जो अब घरों में कैद हैं।
विज्ञापन
बेटियों की चिंता, रातभर सो नहीं पा रहे अभिभावक
काबुल निवासी छात्रा इलानिला चंडीगढ़ के एक कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई ऑनलाइन होने के कारण वह अपने देश चली गई थीं। उन्होंने बताया कि तालिबानी दिन-रात सड़कों पर गश्त कर रहे हैं। माता-पिता व भाई चाहते हैं कि जल्द से जल्द परिवार की बेटियां भारत पहुंच जाएं। सभी को बेटियों की चिंता सता रही है। वह फिक्र में रातभर नहीं सो पा रहे। वहीं, पीयू में पढ़ाई करने वाले अफगानी छात्र इरफान की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि उनकी बहन आफिया अफगानिस्तान में फंसी है। वह मोहाली के एक शिक्षण संस्थान में पढ़ाई करती है। वह जल्द से जल्द अपनी बहन को भारत लाना चाहते हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के प्रति तालिबानी बेहद क्रूर हैं। परिवार संकट में है। वहां रोजगार नहीं रहा। फीस आदि भरने के लिए पैसे भी नहीं हैं।
विज्ञापन