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प्रशासक ने देखा मास्टर प्लान, चंडीगढ़ को कालोनी मुक्त बनाने का निर्देश
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चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने बुधवार को यूटी सचिवालय में चंडीगढ़ का मास्टर प्लान-2031 देखा। आर्किटेक्ट विभाग ने प्रशासक को प्रेजेंटेशन दी और मास्टर प्लान के मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया। इन्हें देखने के बाद प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ स्लम मुक्त शहर होना चाहिए। इसके लिए प्रशासन को प्रयास करने चाहिए।
प्रशासक पुरोहित के निर्देश के बाद सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि शहर में वर्तमान में एक ही बड़ी कॉलोनी है। उन्होंने कहा कि कॉलोनी नंबर-4 में से कई लोगों को पक्के मकानों में भेज दिया गया है, लेकिन अभी भी वहां कई ऐसे परिवार रह रहे हैं, जिनके आवेदन लंबित हैं। इसके अलावा कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है। उनकी सूची बनाई जा रही है, जल्द ही उन्हें किफायती किराया आवासीय योजना (एआरएचसी) के तहत मलोया में मकान दिए जाएंगे। वहीं, जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है, उन्हें कॉलोनी खाली करनी पड़ेगी। सलाहकार ने कहा कि तीन महीने के अंदर इस कॉलोनी को खाली कराने का काम किया जाएगा। लोगों को यहां से जाने के लिए प्रशासन पूरा समय देगा। उन्होंने कहा कि शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने शहर के अन्य मुद्दों पर भी बैठक में सवाल जवाब किए।
लाल डोरे के बाहर के घरों का क्या होगा, आईआईएचएस बताएगी
बीते कुछ महीने से शहर में लाल डोरे को बढ़ाए जाने की काफी चर्चाएं थीं, लेकिन प्रशासन ने कुछ दिन पहले स्पष्ट कर दिया है कि शहर में लाल डोरा बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। यूटी प्रशासन ने बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट (आईआईएचएस) के साथ जो समझौता किया है, उसमें लाल डोरे के अंदर के इलाकों का विकास करने के लिए नीति बनाने की बात कही गई है। साथ ही यह संस्था बताएगी कि लाल डोरे के बाहर के घरों का क्या किया जा सकता है। आईआईएचएस गांव व पेरीफेरी के विकास के लिए एक नीति तैयार कर रही है, जिसका उन्होंने मसौदा तैयार कर लिया था, लेकिन प्रशासन ने कुछ बदलावों का सुझाव दिया है और एक महीने का समय दिया है।
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प्रशासक पुरोहित के निर्देश के बाद सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि शहर में वर्तमान में एक ही बड़ी कॉलोनी है। उन्होंने कहा कि कॉलोनी नंबर-4 में से कई लोगों को पक्के मकानों में भेज दिया गया है, लेकिन अभी भी वहां कई ऐसे परिवार रह रहे हैं, जिनके आवेदन लंबित हैं। इसके अलावा कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है। उनकी सूची बनाई जा रही है, जल्द ही उन्हें किफायती किराया आवासीय योजना (एआरएचसी) के तहत मलोया में मकान दिए जाएंगे। वहीं, जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है, उन्हें कॉलोनी खाली करनी पड़ेगी। सलाहकार ने कहा कि तीन महीने के अंदर इस कॉलोनी को खाली कराने का काम किया जाएगा। लोगों को यहां से जाने के लिए प्रशासन पूरा समय देगा। उन्होंने कहा कि शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने शहर के अन्य मुद्दों पर भी बैठक में सवाल जवाब किए।
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लाल डोरे के बाहर के घरों का क्या होगा, आईआईएचएस बताएगी
बीते कुछ महीने से शहर में लाल डोरे को बढ़ाए जाने की काफी चर्चाएं थीं, लेकिन प्रशासन ने कुछ दिन पहले स्पष्ट कर दिया है कि शहर में लाल डोरा बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। यूटी प्रशासन ने बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट (आईआईएचएस) के साथ जो समझौता किया है, उसमें लाल डोरे के अंदर के इलाकों का विकास करने के लिए नीति बनाने की बात कही गई है। साथ ही यह संस्था बताएगी कि लाल डोरे के बाहर के घरों का क्या किया जा सकता है। आईआईएचएस गांव व पेरीफेरी के विकास के लिए एक नीति तैयार कर रही है, जिसका उन्होंने मसौदा तैयार कर लिया था, लेकिन प्रशासन ने कुछ बदलावों का सुझाव दिया है और एक महीने का समय दिया है।
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