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पानी में यूरेनियम की जांच चंडीगढ़ प्रशासन व हरियाणा सरकार भी करे : हाईकोर्ट

Sun, 01 Jun 2025 01:02 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jun 2025 01:02 AM IST
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Chandigarh administration and Haryana government should also test uranium in water: High Court
चंडीगढ़। पंजाब के मालवा क्षेत्र के पानी में यूरेनियम होने और उससे फैलने वाले कैंसर के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि वे चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल नहीं करते हैं, तो उनके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि चंडीगढ़ में भूजल के सैंपल्स की जांच केवल केंद्रीय भूमिजल बोर्ड कर सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन इस बारे में बोर्ड को आग्रह करे और कोर्ट में सैंपल की रिपोर्ट दे। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वह केंद्रीय भूजल बोर्ड के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय निदेशक को नोटिस जारी करे। हाईकोर्ट ने भारत सरकार के वकील को मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने व जवाब दायर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यूरेनियम ही नहीं बल्कि आर्सेनिक व अन्य विषैले तत्वों की भी जांच की जाए।
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2010 में मोहाली निवासी बृजेंदर सिंह लुंबा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मालवा क्षेत्र के भूजल में यूरेनियम होने और इससे बढ़ते कैंसर के मामलों का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट के आदेश पर मालवा क्षेत्र के पानी में यूरेनियम की जांच के लिए भाभा एटाॅमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) ने बठिंडा, फिरोजपुर, फरीदकोट और मानसा में 1500 पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों में से 35 प्रतिशत नमूनों में यूरेनियम तय मानकों से अधिक पाया गया, जिसमें बठिंडा जिला सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है। एटाॅमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन बठिंडा जिले के पानी में यह मात्रा 10 गुना से अधिक 684 पीपीबी आंकी गई थी।
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हाईकोर्ट ने मालवा और खास तौर पर बठिंडा के भूजल में यूरेनियम होने व बढ़ते कैंसर के मामलों को लेकर 14 साल से लंबित याचिका पर मुख्य सचिव को एहतियातन पूरे प्रदेश के भूजल की नए सिरे से जांच का भी आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि पूरे पंजाब से 4406 सैंपल लिए गए थे इनमें से 108 में यूरेनियम की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई है। हाईकोर्ट को बताया गया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार पानी में यूरेनियम को लेकर मानक बदले गए हैं। अब तय मात्रा 30 पीपीबी है। पंजाब सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार का पत्र है कि 60 पीपीबी को उचित माना जा सकता है।
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