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Panchkula News: रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाने और भवन निर्माण में भ्रष्टाचार की अब जल्द होगी जांच

Mon, 22 Jul 2024 06:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jul 2024 06:57 AM IST
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Caught red handed taking bribe and corruption in building construction will soon be investigated
इस तरह के मामलों की जांच के लिए सरकार ने दी फिजिक्स और केमिस्ट्री लैब बनाने को स्वीकृति
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाने और भवन निर्माण में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई अब जल्द हो सकेगी। मोगीनंद पुलिस लाइन स्थित रीजनल फॉरेंसिक लैब में इन मामलों की जल्द जांच हो सकेगी। सरकार की तरफ से इस तरह के मामलों की जांच के लिए लैब बनाने को स्वीकृति मिल गई है। अभी तक इस तरह के मामलों की जांच करनाल के मधुबन स्थित लैब में होती है। जांच में देरी होने की वजह से काफी मामले लंबित रहते थे। अब रीजनल फॉरेंसिक लैब में फिजिक्स और केमिस्ट्री की लैब स्थापित होने से मामलों की जांच जल्द हो सकेगी। इसके अलावा आरोपियों को सजा जल्द मिल सकेगी। फिजिक्स और केमिस्ट्री की लैब शुरू होने पर एसीबी के लंबित मामलों की संख्या कम होगी।
हरियाणा पुलिस द्वारा अपराध की जांच में तेजी लाने के लिए मोगीनंद स्थित पुलिस लाइन में रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) स्थापित किया गया है। रीजनल फॉरेंसिक लेबोरेट्री के अस्सिटेंट डायरेक्टर सिद्धार्थ कौशिक ने बताया कि फिजिक्स और केमिस्ट्री की लैब की स्वीकृति सरकार से मिल गई है। जल्द ही लैब को स्थापित करने का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए स्पोर्टिंग स्टाफ की भर्ती होगी। संवाद
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आवाज और अन्य सैंपल लिए जाएंगे
एंटी करप्शन ब्यूरो का हेड क्वार्टर सेक्टर-23 पंचकूला में है। एसीबी में रिश्वत मांगने के मामले आते हैं। इसमें रिश्वत लेते समय भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ने के लिए रेड हैंडेड ट्रैप किया जाता है। नोटों पर पहले से ही नंबर लगे होते हैं, जिन पर एक अदृश्य पाउडर छिड़का जाता है। जैसे ही अधिकारी रिश्वत लेता है, एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम उसे रंगे हाथों पकड़ लेती है। उसके हाथ पानी में डुबोए जाते हैं। अगर पानी का रंग गुलाबी हो जाता है, तो यह साबित हो जाता है कि उसने पैसे लिए हैं। इसके बाद जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। अभी सैंपल करनाल स्थित मधुबन लैब भेजा जाता है। इसमें काफी समय लगता है। पंचकूला लैब में जांच शुरू होने से काफी समय बचेगा और केसों की लंबित रहने की संख्या में कमी आएगी। इसके साथ ही ऑडियो रिकॉर्डिंग के सैंपल लिए जाएंगे। इसके साथ ही भवन और निर्माण सामग्री में भ्रष्टाचार की भी जांच हो सकेगी।
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बायोलॉजी, सीरोलॉजिकल और टॉक्सिकोलॉजी डिविजन की हो रही जांच
डॉक्टर सिद्धार्थ कौशिक ने बताया कि एक्सपर्ट डॉक्टरों की देखरेख में लैब में सैंपलों की जांच की जाती है। चार जिलों के सैंपल लिए जाते हैं। इसमें पंचकूला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और अंबाला शामिल हैं। बायोलॉजी, सीरोलॉजिकल और टॉक्सिकोलॉजी डिविजन में विभिन्न आपराधिक मामलों से संबंधित सैंपल प्राप्त हो रहे हैं। बायोलॉजी डिविजन में क्राइम अंगेस्ट वुमन और पॉक्सो के केस आते हैं। सीरोलॉजिकल में मर्डर के जबकि टॉक्सिकोलॉजी में विसरा, ड्रग्स और ब्लड अल्कोहल के केस आते हैं।
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