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Panchkula News: तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला समेत कई लोगों पर केस दर्ज
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पंचकूला। जिले में सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करवाने का मामला सामने आया है। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कालका तहसील के गांव जोधपुर की 38 बीघा 17 बिस्वा जमीन के फर्जी इंतकाल मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला समेत अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत केस दर्ज किया है। जांच के अनुसार, वर्ष 1947 में पाकिस्तान से भारत आए प्रताप सिंह उप्पल को सरकार ने गांव जोधपुर में यह जमीन आवंटित की थी। आरोप है कि प्रताप सिंह या उनके रिश्तेदार कभी इस गांव में नहीं आए और जमीन दशकों तक खाली पड़ी रही। इसके बावजूद वर्ष 2023 में दिल्ली निवासी गुरदीप सिंह ने खुद को प्रताप सिंह का इकलौता कानूनी वारिस बताते हुए जमीन अपने नाम करवाने के लिए आवेदन दिया। इसके आधार पर 22 मार्च 2023 को इंतकाल दर्ज कर दिया गया।
-नंबरदार ने किया था वंशावली का सत्यापन
जांच में सामने आया कि इंतकाल के लिए पंजाब के फरीदकोट नगर परिषद का मृत्यु प्रमाण पत्र और पारिवारिक वंशावली प्रस्तुत की गई थी। आरोप है कि गांव के नंबरदार ने गुरदीप सिंह की वंशावली का सत्यापन किया। तत्कालीन पटवारी, फील्ड कानूनगो और तहसीलदार पर दस्तावेजों की उचित जांच किए बिना इंतकाल मंजूर करने का आरोप है। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बिना पंजीकृत वसीयत के इंतकाल दर्ज नहीं किया जा सकता था।
-सीएम ऑफिस से मिली थी शिकायत
यह मामला 22 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री कार्यालय में मिली शिकायत के बाद जांच के लिए एसीबी को सौंपा गया था। तत्कालीन डीएसपी विजय कुमार नेहरा ने जांच कर 6 जून 2026 को रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद डीजीपी विजिलेंस के माध्यम से सरकार से अनुमति मांगी गई। मुख्य सचिव ने 25 सितंबर 2026 को पीसी एक्ट की धारा के तहत केस दर्ज करने की मंजूरी दी। अब एसीबी मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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-नंबरदार ने किया था वंशावली का सत्यापन
जांच में सामने आया कि इंतकाल के लिए पंजाब के फरीदकोट नगर परिषद का मृत्यु प्रमाण पत्र और पारिवारिक वंशावली प्रस्तुत की गई थी। आरोप है कि गांव के नंबरदार ने गुरदीप सिंह की वंशावली का सत्यापन किया। तत्कालीन पटवारी, फील्ड कानूनगो और तहसीलदार पर दस्तावेजों की उचित जांच किए बिना इंतकाल मंजूर करने का आरोप है। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बिना पंजीकृत वसीयत के इंतकाल दर्ज नहीं किया जा सकता था।
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-सीएम ऑफिस से मिली थी शिकायत
यह मामला 22 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री कार्यालय में मिली शिकायत के बाद जांच के लिए एसीबी को सौंपा गया था। तत्कालीन डीएसपी विजय कुमार नेहरा ने जांच कर 6 जून 2026 को रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद डीजीपी विजिलेंस के माध्यम से सरकार से अनुमति मांगी गई। मुख्य सचिव ने 25 सितंबर 2026 को पीसी एक्ट की धारा के तहत केस दर्ज करने की मंजूरी दी। अब एसीबी मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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