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कैप्टन ने सुखबीर बादल को भेजी हिटलर की किताब

Thu, 23 Jan 2020 12:03 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 12:03 AM IST
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Captain Amrinder Singh sent biography of Hitler to Sukhbir Badal
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सीएए के विरोध को सुखबीर बादल द्वारा ‘सिख विरोधी’ बताने पर सवाल उठाते हुए अकाली दल के प्रधान को इतिहास संबंधी समझ बढ़ाने की ताकीद करते हुए अडोल्फ हिटलर की आत्मकथा ‘मीन कॉफ’ की प्रति भेजी है। उन्होंने सुखबीर बादल को यह किताब पढ़ने की नसीहत दी ताकि वह केंद्र सरकार, जिसमें अकाली भी हिस्सेदार हैं, द्वारा पास किये गए असंवैधानिक कानून के ख़तरनाक निष्कर्षों संबंधी समझ बढ़ा सकें।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में हिटलर के एजेंडे को लागू करने के लिए केंद्र की ताज़ा कोशिशों के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अकाली नेता सीएए संबंधी अपनी बेतुकी प्रतिक्त्रिस्या देने से पहले जर्मन के पूर्व चांसलर की आत्मकथा पढ़ें। कैप्टन ने कहा कि अलग-अलग अकाली नेताओं के हाल ही में आए बयानों ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अकालियों की नासमझी की झलक पेश की है जबकि इस मुद्दे के देश के लिए गहरे मायने हैं। मुख्यमंत्री ने सुखबीर से कहा कि वह यह किताब पढ़ें और उसके बाद फैसला करें कि ‘राष्ट्र पहले है या राजनैतिक सरोकार।’
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कैप्टन ने किताब के साथ सुखबीर को भेजी चिट्ठी
सुखबीर बादल को किताब के साथ भेजी चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘संसद के दोनों सदनों और विधानसभा में इस बिल के हक में खड़ा होना और बाकी प्लेटफॉर्मों पर इसका विरोध करना, एक राजनैतिक नेता के अज्ञानता को दिखाता है।’’ अपने पत्र में कैप्टन ने याद दिलाया कि उन्होंने विधानसभा के सत्र के दौरान अकाली दल के नेताओं को हिटलर की किताब ‘मीन कॉफ’ की कापियां भेजने का वायदा किया था, जिसका अंग्रेज़ी अनुवाद ‘माई स्ट्रगल्ज़’ है। मुख्यमंत्री ने लिखा,‘‘यह उसका (हिटलर) विश्वास था, जो उसने सत्ता के उभार के दौरान जर्मन के लोगों को बेचा और बाद में जब उसकी नाज़ी पार्टी ने सत्ता संभाली तो यह उसकी सरकार की नीति बन गई।’’ उन्होंने लिखा,‘‘हिटलर ने अपनी क्षेत्रिय इच्छाएं पूरी करने के लिए दूसरे विश्व युद्ध में जर्मन को तबाह करने के अलावा साल 1933 में सत्ता संभालने से लेकर साल 1945 में युद्ध की समाप्ति तक दूसरे समुदायों के लोगों का ख़ात्मा करके जर्मन नस्ल के शुद्धीकरण के लिए मूलभूत तौर पर मुख्य विरोधी पक्ष साम्यवादी पार्टी को हटाना, बाद में बुद्धिजीवियों पर ज़ुल्म ढाहना और आखिऱकार यहूदियों का ख़ात्मा करना था।’’ कैप्टन ने सुखबीर को लिखे पत्र में कहा,‘‘किताब पढ़ो जैसेकि हर कोई इतिहास से सीखता है। दुनिया बदल गई है और हमारा टेलिविजऩ और अन्य मीडिया शक्तिशाली हैं और निश्चित रूप से तीस के दशक में जोसेफ गोएबल्ज़ के अधीन जर्मन की अपेक्षा अलग है। इसके बावजूद मुसलमानों और यहूदी भाईचारों को ख़त्म करने के लिए कैंप लगाने और राष्ट्रीय रजिस्टर की बात करना भी गलत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत कुछ राजनैतिक पार्टियाँ मुल्क भर में यूनिवर्सिटियों के साथ मिलकर रोष प्रकट कर रही हैं और अब समय आ गया है कि बाकी भी इस लहर में शामिल हों।’’
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सुखबीर के बयानों पर कैप्टन ने उठाए सवाल
शिअद के प्रधान द्वारा बीते दिनों की गई टिप्पणियों पर मुख्यमंत्री ने सुखबीर से यह बताने को कहा है कि सीएए के मुद्दे पर अकालियों को एनडीए छोडऩे की उनके (कैप्टन) द्वारा की गई माँग गांधी परिवार की ‘अधीनता’ कैसे हुई? उन्होंने सुखबीर से कहा, ‘‘या फिर आप यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि सीएए के विरुद्ध सड़कों पर उतरे लाखों लोग भी गांधी परिवार की ख़ुशामद के लिए ऐसा कर रहे हैं।’’ सुखबीर के इस बयान पर कि मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, का जवाब देते हुए कैप्टन ने कहा, ‘‘उनकी कुर्सी तो पूरी तरह सुरक्षित है लेकिन ऐसा लगता है कि आपको अपनी पत्नी हरसिमरत बादल की केंद्रीय मंत्रीमंडल में मिली कुर्सी का फिक्त्रस् सता रही है और वह किसी भी कीमत पर इसे छोडऩा नहीं चाहते।’’ कैप्टन ने चुटकी लेते हुए कहा कि यही एक कारण हो सकता है कि सीएए के विरुद्ध स्टैंड लेने का दावा करने के बावजूद अकाली दल द्वारा एनडीए से बाहर आने से आनाकानी की जा रही है। सुखबीर की टिप्पणी को दोहरा स्टैंड बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली दल का प्रधान जानबूझ कर उनके बयानों को तोड़-मरोड़ रहा है ताकि सीएए संबंधी उनकी सरकार की तरफ से लिए स्टैंड पर लोगों को मूर्ख बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘या तो वह इतना अनजान है कि उसे अधूरे कानून और मुकम्मल कानून के दरमियान भिन्नता की समझ नहीं है क्योंकि संपूर्ण कानून मुसलमानों और सिखों समेत सभी समुदायों को नागरिकता की इजाज़त देता है जबकि केंद्र सरकार का मौजूदा कानून मुसलमानों और यहूदियों जैसे कुछ वर्गों को बाहर रखता है।’’ कैप्टन ने कहा, ‘‘मुझे इस बात की समझ नहीं आती कि सुखबीर बादल इस संबंध में मुझसे क्या स्पष्टीकरण चाहता है। क्या वह मुझे एक भी ऐसी मिसाल या बयान का हवाला दे सकता है, जहाँ मैंने सताए हुए सिखों या इस संबंध में सताए हुए हिंदुओं और बौद्ध धर्म के अनुयायी के मामलों में इन्हें राहत देने का विरोध किया हो?’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सदा ही सिखों के हितों और अधिकारों के लिए निजी तौर पर समर्थन करते आए हैं और किसी भी मौके पर उन्होंने सिखों को इस कानून के दायरे से बाहर रखने की बात नहीं की। उन्होंने अकाली दल के प्रधान को लोगों को गुमराह करने के लिए ऐसे मनघड़ंत झूठ बोलना बंद करने को कहा।
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