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हरियाणा : आप को राजधानी, एसवाईएल के चक्रव्यूह में फंसाएगी भाजपा, हरियाणा में दोनों मुद्दों पर सड़क पर उतरेगी सत्तारूढ़ पार्टी

Sun, 03 Apr 2022 01:18 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 01:18 AM IST
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BJP will implicate AAP in the Chakravyuh of the capital, SYL
चंडीगढ़। हरियाणा में 2024 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपना दायरा बढ़ा रही आम आदमी पार्टी की घेराबंदी के लिए भाजपा ने रणनीति तैयार कर ली है। आप को राजधानी चंडीगढ़ और एसवाईएल के चक्रव्यूह में फंसाया जाएगा। दोनों मुद्दों को लेकर भाजपा हरियाणा में जल्दी सड़कों पर उतरेगी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष भी दोनों मुद्दे उठाए जाएंगे।
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शनिवार को सकेतड़ी नव कार्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने मैराथन बैठकें कर आगामी रणनीति तैयार की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मंत्रिमंडल सदस्यों, विधायक दल, छोटी टोली, सांसदों-केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ सभी ज्वलंत मुद्दों पर अलग-अलग सत्र में चर्चा की गई। चंडीगढ़ पर पंजाब सरकार के दावे और एसवाईएल का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सभी ने इसे लेकर अपने सुझाव विचार साझा किए। अंत में सहमति बनी कि इन दोनों मुद्दों पर आम आदमी पार्टी का हरियाणा विरोधी चेहरा जनता के सामने लाया जाएगा। पार्टी जमीनी स्तर पर जनजागरण अभियान चलाएगी।
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लोगों को बताया जाएगा कि प्रदेश में निकाय और विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयार कर रही आप राजधानी चंडीगढ़ को हरियाणा से छीनना चाहती है। एसवाईएल का पानी देने को लेकर भी पंजाब सरकार का ढुलमुल रवैया है। इसलिए आप के झासे में न आएं। जिला स्तर पर होने वाले प्रदर्शनों के बाद भाजपा नेता डीसी के जरिये राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को दोनों मुद्दों से जुड़े ज्ञापन भी भेजेंगे। इससे साफ किया जाएगा कि चंडीगढ़, हरियाणा का है और प्रदेश को उसके हिस्से का एसवाईएल का पानी जल्द दिलाया जाए।
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओपी यादव ने कहा कि आप ने पंजाब की सत्ता संभालते ही हरियाणा विरोधी फैसले लेना शुरू कर दिए हैं। इससे उसका असली चेहरा सामने आ गया है। चंडीगढ़ व एसवाईएल के मुद्दे को लेकर भाजपा राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री तक जाएगी। बैठकों में प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़, स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा, सुभाष बराला, पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु सहित सभी दिग्गज नेता शामिल रहे।
सर्वदलीय बैठक, विशेष सत्र पर फैसला जल्द
हरियाणा सरकार ने पंजाब विधानसभा में आप सरकार के चंडीगढ़ पर दावे को लेकर पारित प्रस्ताव का कड़ा संज्ञान लिया है। सरकार जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला ले सकते हैं। चूंकि, दोनों ही मुद्दों पर कांग्रेस और इनेलो मुखर होकर दबाव बढ़ा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 6 अप्रैल को मंत्रिमंडल की बैठक भी बुलाई है। इसमें एक दिवसीय विशेष सत्र पर भी मुहर लग सकती है।
पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्ताव संघीय ढांचे के खिलाफ : मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पंजाब विधानसभा में चंडीगढ़ को पड़ोसी राज्य को सौंपने का प्रस्ताव पारित करना संघीय ढांचे के खिलाफ है। केजरीवाल और भगवंत मान दोनों को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। आम आदमी पार्टी की संविधान विरोधी मानसिकता उजागर हो गई है। पंजाब सरकार ने जो किया वह निंदनीय है। लोकतंत्र की एक व्यवस्था होती है।
भगवंत मान सरकार ने एकतरफा कार्रवाई की है। इस तरह के फैसलों की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं। ऐसे कई मुद्दे हैं जिनका बातचीत से हल निकाला जाता है। आज तक एसवाईएल का मुद्दा बना हुआ है। उसका हल पंजाब की तरफ से निकाला जाना चाहिए। पंजाब का हिंदी भाषी क्षेत्र भी एक मुद्दा है, जो अभी तक हरियाणा को नहीं मिला है। अरविंद केजरीवाल इस पर निंदा प्रकट करें। वह एक तरफ पंजाब में हरियाणा के हिस्से का पानी रोकने की बात करते हैं तो दूसरी तरफ हरियाणा से दिल्ली के लिए पानी मांगते हैं। केजरीवाल का दोहरा रवैया अब स्पष्ट हो चुका है।
आप को मुंहतोड़ जवाब देगी भाजपा : धनखड़
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता पंजाब सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ जनजागरण अभियान छेड़ेगा। बूथ से जिला स्तर तक रोष प्रकट दिवस आयोजित किए जाएंगे। चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है, और हरियाणा-पंजाब दोनों की राजधानी है। चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक सदैव रहेगा। एसवाईएल पर अनेक झंझट व विभिन्न रुकावटों के बाद सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय हरियाणा के पक्ष में आ चुका है।

अब केवल कैनाल का बनना शेष है, पंजाब की नई सरकार को तुरंत एसवाईएल नहर का निर्माण कर हरियाणा के किसानों के हित का 19 लाख एकड़ फीट पानी देना चाहिए। हरियाणावासी व सरकार यह पानी को लाने के लिये हर स्तर पर लड़ने के लिये संकल्प बद्ध हैं। पंजाब के किसान संगठन आंदोलन के समय हरियाणा के किसानों के हक का पानी देने के पक्ष में अभिव्यक्ति जता चुके हैं। आम आदमी पार्टी हरियाणा का हित नहीं चाहती, इसलिए पंजाब में सरकार बनते ही आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ को भी हरियाणा से छीनने की कोशिश में जुट गई है।
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