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चंडीगढ़ : सीएनजी फिटेड वाहनों की हाइड्रो टेस्टिंग में बड़ी गड़बड़ी... टेस्टिंग चंडीगढ़ में और प्रमाण पत्र मिल रहा ग्वालियर का
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चंडीगढ़। यूटी में सीएनजी फिटेड वाहनों में हो रही हाइड्रो टेस्टिंग में गड़बड़ी का बड़ा खेल चल रहा है। वाहनों की टेस्टिंग चंडीगढ़ के दड़वा में की जा रही है और प्रमाण पत्र ग्वालियर (मध्य-प्रदेश) का दिया जा रहा है। टेस्टिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों में भी मानकों की अनदेखी की जा रही है। जबकि रोज पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के 200 से अधिक वाहनों और आटो को हाइड्रो टेस्टिंग में फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं, जिसकी यूटी प्रशासन को खबर तक नहीं हैं।
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम के बाद पिछले कुछ दिनों से सीएनजी की मांग बढ़ गई है। सीएनजी की बढ़ती मांग और सुरक्षा के दृष्टिगत सीएनजी पंप संचालक बिना हाइड्रो टेस्टिंग के वाहनों और आटो में सीएनजी नहीं डाल रहे। प्रमाण पत्र के लिए चंडीगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के वाहन भी टेस्टिंग कराने के लिए यूटी पहुंच रहे हैं। दड़वा में वाहनों की टेस्टिंग के नाम पर आवश्यक मानकों की अनदेखी की जा रही है। मानकों के अनुरूप एक दिन में अधिकतम 25 वाहनों को ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए, जबकि यहां रोज 150-200 कारों और आटो की टेस्टिंग कर प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। हैरानी की बात है कि टेस्टिंग चंडीगढ़ के दड़वा में की जा रही है और संचालकों के द्वारा प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एक कंपनी के नाम के जारी किए जा रहे हैं। सीएनजी विशेषज्ञों के अनुसार टेस्टिंग में यदि मानकों की अनदेखी की जा रही है तो भविष्य में यह लापरवाही जानलेवा हो सकती है। ऐसे में वाहन में लगे सीएनजी सिलिंडर के फटने की आशंका 50 फीसदी तक अधिक हो जाती है।
पीईएसओ की वेबसाइट पर दिखना चाहिए पंजीकरण
सीएनजी वाहनों के हाइड्रो टेस्टिंग के प्रमाण पत्र पेट्रोलियम एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन (पीईएसओ) की वेबसाइड पर अपलोड होना अनिवार्य है। वेबसाइट पर अपलोड प्रमाण पत्र पर दिए गए पंजीकरण नंबर के जरिये ही वाहनों के टेस्टिंग की प्रमाणिकता सिद्ध होती है।
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डी-गैसिंग बड़ा खतरा
हाइड्रो टेस्टिंग के दौरान की जाने वाली डी-गैसिंग की प्रक्रिया बेहद खतरनाक है। इस प्रक्रिया के दौरान सिलिंडर से गैस को पूरी तरह से निकाला जाता है। इसलिए टेस्टिंग सेंटर को रिहायश से दूर रखने की मंजूरी दी जाती है, लेकिन दड़वा में जहां टेस्टिंग की जा रही है, वहां इसका कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है। जो बड़े हादसे का सबब बन सकता है।
हाइड्रो टेस्टिंग सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इस प्रक्रिया में पीईएसओ के द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा करना जरूरी है, यदि इसमें लापरवाही बरती जाती है तो वाहन चालक के साथ ही आसपास के लोगों को भी खतरा हो सकता है।
-हितेश मिश्रा, हाइड्रो टेस्टिंग विशेषज्ञ, चंडीगढ़
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पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम के बाद पिछले कुछ दिनों से सीएनजी की मांग बढ़ गई है। सीएनजी की बढ़ती मांग और सुरक्षा के दृष्टिगत सीएनजी पंप संचालक बिना हाइड्रो टेस्टिंग के वाहनों और आटो में सीएनजी नहीं डाल रहे। प्रमाण पत्र के लिए चंडीगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के वाहन भी टेस्टिंग कराने के लिए यूटी पहुंच रहे हैं। दड़वा में वाहनों की टेस्टिंग के नाम पर आवश्यक मानकों की अनदेखी की जा रही है। मानकों के अनुरूप एक दिन में अधिकतम 25 वाहनों को ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए, जबकि यहां रोज 150-200 कारों और आटो की टेस्टिंग कर प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। हैरानी की बात है कि टेस्टिंग चंडीगढ़ के दड़वा में की जा रही है और संचालकों के द्वारा प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एक कंपनी के नाम के जारी किए जा रहे हैं। सीएनजी विशेषज्ञों के अनुसार टेस्टिंग में यदि मानकों की अनदेखी की जा रही है तो भविष्य में यह लापरवाही जानलेवा हो सकती है। ऐसे में वाहन में लगे सीएनजी सिलिंडर के फटने की आशंका 50 फीसदी तक अधिक हो जाती है।
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पीईएसओ की वेबसाइट पर दिखना चाहिए पंजीकरण
सीएनजी वाहनों के हाइड्रो टेस्टिंग के प्रमाण पत्र पेट्रोलियम एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन (पीईएसओ) की वेबसाइड पर अपलोड होना अनिवार्य है। वेबसाइट पर अपलोड प्रमाण पत्र पर दिए गए पंजीकरण नंबर के जरिये ही वाहनों के टेस्टिंग की प्रमाणिकता सिद्ध होती है।
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डी-गैसिंग बड़ा खतरा
हाइड्रो टेस्टिंग के दौरान की जाने वाली डी-गैसिंग की प्रक्रिया बेहद खतरनाक है। इस प्रक्रिया के दौरान सिलिंडर से गैस को पूरी तरह से निकाला जाता है। इसलिए टेस्टिंग सेंटर को रिहायश से दूर रखने की मंजूरी दी जाती है, लेकिन दड़वा में जहां टेस्टिंग की जा रही है, वहां इसका कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है। जो बड़े हादसे का सबब बन सकता है।
हाइड्रो टेस्टिंग सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इस प्रक्रिया में पीईएसओ के द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा करना जरूरी है, यदि इसमें लापरवाही बरती जाती है तो वाहन चालक के साथ ही आसपास के लोगों को भी खतरा हो सकता है।
-हितेश मिश्रा, हाइड्रो टेस्टिंग विशेषज्ञ, चंडीगढ़