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Panchkula News: पैनोरमिक कोच में होगा स्विटजरलैंड की बर्निया एक्सप्रेस की अनुभूति
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कालका। विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग पर टॉय ट्रेन का आनंद लेने वाले सैलानी इसी वर्ष पैनोरमिक कोच में सफर करते नजर आएंगे। अब जिन चार कोचों का ट्रायल अब होना है, वह फरवरी-मार्च तक पूरा हो जाएगा। ट्रायल के दौरान सैलानी भी उक्त कोचों में सफर करने के लिए उत्सुक और उत्साहित थे। रेल अधिकारियों के अनुसार कालका-शिमला रेलमार्ग पर जब पैनोरमिक कोचों वाली ट्रेन गुजरेगी तो स्विटजरलैंड की बर्निना एक्सप्रेस की याद तरोताजा हो जाएगी। इन कोचो की लुक स्विटजरलैंड की बर्निना एक्सप्रेस की तरह है जोकि एक पहाड़ी रेल ट्रैक पर चलती है। उक्त कोच में पहाड़ों का सफर करने में सैलानियों को एक अलग ही अनुभूति होगी।
यह थी डिब्बों को बनाने की चुनौती
रेल अधिकारियों के अनुसार रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला को भारतीय रेल ने कुछ समय पहले कालका-शिमला नैरो गेज (यूनेस्को की विश्व धरोहर) के डिब्बों के आधुनिकीकरण की परियोजना सौंपी थी। आरसीएफ ने इस चुनौती को स्वीकार किया। डिब्बों के डिजाइन के विकास और उनकी जांच-परीक्षण के लिए नैरो-गेज ट्रैक के मॉडलिंग के लिए कोई डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद आरसीएफ की डिजाइन टीम ने भारतीय रेल के ब्रॉड गेज सिस्टम के लिए रेल डिब्बों का डिजाइन विकसित करने के अनुभव का उपयोग करके इन नैरो गेज डिब्बों के आवश्यक डिजाइन को फिर से बनाने का प्रयास किया।
इसके लिए आरसीएफ डिजाइन टीम ने कालका वर्कशॉप में उपलब्ध पुराने ब्लू प्रिंट और स्केचों का इस्तेमाल कर थ्री-डी मॉडल तैयार किए। इसके बाद इन मॉडलों को बेहतर ब्रेक और सस्पेंशन व्यवस्था के साथ एक संशोधित बोगी विकसित करने के लिए बेस लाइन के रूप में उपयोग किया। इससे नैरो गेज शैल के तीन नए डिजाइन और इंटीरियर फर्निशिंग के चार डिजाइन तैयार हुए। इन डिजाइनों को सीमित विश्लेषण तकनीक और मल्टी बॉडी विश्लेषण का उपयोग करके सुधारा गया। इसके अलावा डिब्बों के एयर कंडीशनिंग सिस्टम, बिजली सप्लाई, पैंट्री, बायो-वैक्यूम टॉयलेट, लाइटिंग, फ्लोरिंग आदि के नए डिजाइन के लिए भी कई काम किए।
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आरडीएसओ लखनऊ करेगी चार कोचों को आसीलेशन ट्रायल
आरसीएफ की वर्कशॉप में इन डिब्बों के निर्माण के लिए आरसीएफ की डिजाइन और प्रोडक्शन टीम ने नए डिजाइन के शैल जिग्स, लिफ्टिंग टेकल, स्टेटिक टेस्ट जिग्स, नैरो गेज लाइन, लोडिंग गेज जैसे सभी आवश्यक संसाधनों का इन-हाउस निर्माण किया। रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद दो प्रोटोटाइप शैल का निर्माण किया गया। इनका आरसीएफ में अक्टूबर 2022 में आरडीएसओ लखनऊ द्वारा परीक्षण किया गया। इन दो कोचों (शेलों) को (ऐसी चेयरकार और पॉवर कार) को कालका ले जाया गया।
यहां पर कोचों को तेज व कम स्पीड सहित सैंड बैग भरकर कोच में भार की क्षमता को भी जांचा गया। पिछले वर्ष दिसंबर में इन दो कोच शैल के आसीलेशन ट्रायल की सफलता के बाद रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला कालका-शिमला के लिए नए डिजाइन के पैनोरमिक नैरो गेज कोचों के अंतिम परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सभी चार प्रकार के एसी एक्जीक्यूटिव चेयरकार, एसी चेयरकार, नॉन-एसी चेयरकार और पॉवर कम लगेज कोच पूरी तरह से जल्द ही आरडीएसओ लखनऊ द्वारा विस्तृत आसीलेशन ट्रायल से गुजारा जाएगा। इस विस्तृत आसीलेशन ट्रायल के सफल समापन के बाद और मंजूरी मिलने पर आरसीएफ इन नए पैनोरमिक कोचों का चरणबद्ध उत्पादन शुरू करेगा।
प्रत्येक ट्रेन में होंगे सात कोच
आरसीएफ 12 सीटों वाली 6 प्रथम श्रेणी एसी चेयरकार, 24 सीटों वाली 6 एसी चेयरकार, 30 सीटों वाली 13 नॉन एसी चेयरकार और 5 पॉवर/सामान/गार्ड वैन सहित 30 अत्याधुनिक नैरो गेज पैनोरमिक कोच का निर्माण करेगा। ये अत्याधुनिक विशेषताओं से लैस होंगे। इनकी अपग्रेडेड बोगियों और बेहतर ब्रेक सिस्टम के साथ हल्के वजन का शैल शामिल है। इन कोचों में पैनोरमिक वाइड व्यू विंडो डिजाइन होगा ताकि यात्री पहाड़ों और घाटियों की सुंदरता का अनुभव कर सकें। यह कोच सीसीटीवी और फायर अलार्म जैसी आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से भी लैस होंगे। इस तरह के कोचों की प्रत्येक ट्रेन में 6 यात्री कोच और एक पॉवर/सामान/गार्ड वैन सहित सात कोच होंगे।
पहले चरण में जो दो कोच कालका-शिमला रेल मार्ग पर उतारे थे उनका ट्रायल सफल रहा है। उम्मीद है कि जिन चार कोचों का ट्रायल अब होना है, वह फरवरी-मार्च तक पूरा हो जाएगा। एक पैनोरमिक कोच की अनुमानित लागत करीब 1.3 करोड़ रुपये है। - बलदेवराज, सचिव महाप्रबंधक, आरसीएफ कपूरथला
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यह थी डिब्बों को बनाने की चुनौती
रेल अधिकारियों के अनुसार रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला को भारतीय रेल ने कुछ समय पहले कालका-शिमला नैरो गेज (यूनेस्को की विश्व धरोहर) के डिब्बों के आधुनिकीकरण की परियोजना सौंपी थी। आरसीएफ ने इस चुनौती को स्वीकार किया। डिब्बों के डिजाइन के विकास और उनकी जांच-परीक्षण के लिए नैरो-गेज ट्रैक के मॉडलिंग के लिए कोई डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद आरसीएफ की डिजाइन टीम ने भारतीय रेल के ब्रॉड गेज सिस्टम के लिए रेल डिब्बों का डिजाइन विकसित करने के अनुभव का उपयोग करके इन नैरो गेज डिब्बों के आवश्यक डिजाइन को फिर से बनाने का प्रयास किया।
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इसके लिए आरसीएफ डिजाइन टीम ने कालका वर्कशॉप में उपलब्ध पुराने ब्लू प्रिंट और स्केचों का इस्तेमाल कर थ्री-डी मॉडल तैयार किए। इसके बाद इन मॉडलों को बेहतर ब्रेक और सस्पेंशन व्यवस्था के साथ एक संशोधित बोगी विकसित करने के लिए बेस लाइन के रूप में उपयोग किया। इससे नैरो गेज शैल के तीन नए डिजाइन और इंटीरियर फर्निशिंग के चार डिजाइन तैयार हुए। इन डिजाइनों को सीमित विश्लेषण तकनीक और मल्टी बॉडी विश्लेषण का उपयोग करके सुधारा गया। इसके अलावा डिब्बों के एयर कंडीशनिंग सिस्टम, बिजली सप्लाई, पैंट्री, बायो-वैक्यूम टॉयलेट, लाइटिंग, फ्लोरिंग आदि के नए डिजाइन के लिए भी कई काम किए।
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आरडीएसओ लखनऊ करेगी चार कोचों को आसीलेशन ट्रायल
आरसीएफ की वर्कशॉप में इन डिब्बों के निर्माण के लिए आरसीएफ की डिजाइन और प्रोडक्शन टीम ने नए डिजाइन के शैल जिग्स, लिफ्टिंग टेकल, स्टेटिक टेस्ट जिग्स, नैरो गेज लाइन, लोडिंग गेज जैसे सभी आवश्यक संसाधनों का इन-हाउस निर्माण किया। रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद दो प्रोटोटाइप शैल का निर्माण किया गया। इनका आरसीएफ में अक्टूबर 2022 में आरडीएसओ लखनऊ द्वारा परीक्षण किया गया। इन दो कोचों (शेलों) को (ऐसी चेयरकार और पॉवर कार) को कालका ले जाया गया।
यहां पर कोचों को तेज व कम स्पीड सहित सैंड बैग भरकर कोच में भार की क्षमता को भी जांचा गया। पिछले वर्ष दिसंबर में इन दो कोच शैल के आसीलेशन ट्रायल की सफलता के बाद रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला कालका-शिमला के लिए नए डिजाइन के पैनोरमिक नैरो गेज कोचों के अंतिम परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सभी चार प्रकार के एसी एक्जीक्यूटिव चेयरकार, एसी चेयरकार, नॉन-एसी चेयरकार और पॉवर कम लगेज कोच पूरी तरह से जल्द ही आरडीएसओ लखनऊ द्वारा विस्तृत आसीलेशन ट्रायल से गुजारा जाएगा। इस विस्तृत आसीलेशन ट्रायल के सफल समापन के बाद और मंजूरी मिलने पर आरसीएफ इन नए पैनोरमिक कोचों का चरणबद्ध उत्पादन शुरू करेगा।
प्रत्येक ट्रेन में होंगे सात कोच
आरसीएफ 12 सीटों वाली 6 प्रथम श्रेणी एसी चेयरकार, 24 सीटों वाली 6 एसी चेयरकार, 30 सीटों वाली 13 नॉन एसी चेयरकार और 5 पॉवर/सामान/गार्ड वैन सहित 30 अत्याधुनिक नैरो गेज पैनोरमिक कोच का निर्माण करेगा। ये अत्याधुनिक विशेषताओं से लैस होंगे। इनकी अपग्रेडेड बोगियों और बेहतर ब्रेक सिस्टम के साथ हल्के वजन का शैल शामिल है। इन कोचों में पैनोरमिक वाइड व्यू विंडो डिजाइन होगा ताकि यात्री पहाड़ों और घाटियों की सुंदरता का अनुभव कर सकें। यह कोच सीसीटीवी और फायर अलार्म जैसी आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से भी लैस होंगे। इस तरह के कोचों की प्रत्येक ट्रेन में 6 यात्री कोच और एक पॉवर/सामान/गार्ड वैन सहित सात कोच होंगे।
पहले चरण में जो दो कोच कालका-शिमला रेल मार्ग पर उतारे थे उनका ट्रायल सफल रहा है। उम्मीद है कि जिन चार कोचों का ट्रायल अब होना है, वह फरवरी-मार्च तक पूरा हो जाएगा। एक पैनोरमिक कोच की अनुमानित लागत करीब 1.3 करोड़ रुपये है। - बलदेवराज, सचिव महाप्रबंधक, आरसीएफ कपूरथला