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बाजवा-दूलो अकेले ही पीयूष गोयल को दे आए ज्ञापन
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चंडीगढ़। पंजाब में मालगाड़ियों की आवाजाही बहाल कराने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा शुरू की गई मुहिम को उस समय झटका लगा जब वीरवार को सूबे के आठ सांसदों की रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले ही पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता और पूूर्व प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो रेल मंत्री से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंप आए। इसके बाद तय समय पर जब आठ सांसदों का प्रतिनिधिमंडल रेल मंत्री से मिलने पहुंचा और उनके सामने अपनी बात रखी तो रेल मंत्री ने यह कहकर गाड़ियां चलाने से साफ इंकार कर दिया कि जब तक रेल ट्रैक खाली नहीं हो जाते, गाड़ियां नहीं चलाई जाएंगी।
गौरतलब है कि बाजवा और दूलो बुधवार को जंतर-मंतर पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब के मंत्रियों और विधायकों के धरने में भी शामिल नहीं हुए थे। तीन पन्ने के ज्ञापन में उन्होंने पंजाब में मालगाड़ियां न चलने के कारण थर्मल प्लांटों के लिए कोयले की कमी और किसानों के लिए खाद की कमी की हवाला देते हुए रेल मंत्री से मालगाड़ियों की आवाजाही तुरंत बहाल करने की मांग की। ज्ञापन में बाजवा ने लिखा कि वह और शमशेर सिंह दूलो रेल मंत्री का ध्यान पंजाब की मौजूदा स्थिति की ओर दिलाना चाहते हैं। केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ सूबे में किसान सितंबर से ही प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन कर रहे हैं। 21 अक्तूबर को किसान संगठनों ने यह भी एलान कर दिया है कि वे अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान मालगाड़ियों को नहीं रोकेंगे, लेकिन रेलवे की ओर से इसके बावजूद ट्रेनों की आवाजाही बहाल नहीं की गई।
ज्ञापन में उन्होंने आगे लिखा कि मालगाड़ियां न चलने के कारण सूबे के किसानों के लिए डीएपी और यूरिया की सप्लाई रुक गई है। उन्होंने लिखा कि नवंबर में रबी सीजन की बुवाई शुरू हो रही है और समय पर खाद न मिलने से किसानों को भारी नुकसान होगा, जोकि राज्य और राष्ट्र के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने राज्य के थर्मल प्लांटों का हवाला देते हुए लिखा कि कोयला न मिलने के कारण थर्मल प्लांट बंद हो गए हैं, जिससे बिजली उत्पादन ठप हो गया है। यह राज्य में उद्योगों के लिए संकट है। सुरक्षा की दृष्टि से भी मालगाड़ियां रुकने के कारण जम्मू-कशमीर और लद्दाख में सेना व आम लोगों तक जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित हुई है।
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आठ सांसदों का आग्रह नहीं माना रेल मंत्री ने
पंजाब के आठ सांसदों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वीरवार दोपहर दिल्ली में रेल मंत्री से मुलाकात की। सांसदों ने बीते सवा महीने से मालगाड़ियों की आवाजाही बंद होने के कारण सूबे में पैदा हुई बिजली उत्पादन की समस्या के अलावा रबी सीजन में किसानों के लिए खाद की किल्लत का भी हवाला दिया। इसके अलावा उन्होंने अन्य जरूरी सामान न पहुंचने के कारण बढ़ रही महंगाई का भी जिक्र किया, लेकिन रेल मंत्री ने उन्हें साफ कह दिया कि जब तक पंजाब में सभी रेललाइनें क्लीयर नहीं हो जातीं, मालगाड़ियां नहीं चलाई जाएंगी। हालांकि सांसदों ने रेल मंत्री को यह भी बताया कि केवल दो रेल लाइनें जोकि मेल लाइन से अलग निजी थर्मल प्लांटों की ओर जाती हैं, वहीं किसान बैठे हैं। इसके अलावा किसानों ने मालगाड़ियों नहीं रोकने का एलान भी कर दिया है। इसके बावजूद रेल मंत्री नहीं माने और उन्होंने कहा कि सभी रेल लाइनें क्लीयर की जाएं और राज्य सरकार गाड़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ले। रेल मंत्री के इस रवैये को देखते हुए अब सांसदों ने 7 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का समय लिया है।
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गौरतलब है कि बाजवा और दूलो बुधवार को जंतर-मंतर पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब के मंत्रियों और विधायकों के धरने में भी शामिल नहीं हुए थे। तीन पन्ने के ज्ञापन में उन्होंने पंजाब में मालगाड़ियां न चलने के कारण थर्मल प्लांटों के लिए कोयले की कमी और किसानों के लिए खाद की कमी की हवाला देते हुए रेल मंत्री से मालगाड़ियों की आवाजाही तुरंत बहाल करने की मांग की। ज्ञापन में बाजवा ने लिखा कि वह और शमशेर सिंह दूलो रेल मंत्री का ध्यान पंजाब की मौजूदा स्थिति की ओर दिलाना चाहते हैं। केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ सूबे में किसान सितंबर से ही प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन कर रहे हैं। 21 अक्तूबर को किसान संगठनों ने यह भी एलान कर दिया है कि वे अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान मालगाड़ियों को नहीं रोकेंगे, लेकिन रेलवे की ओर से इसके बावजूद ट्रेनों की आवाजाही बहाल नहीं की गई।
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ज्ञापन में उन्होंने आगे लिखा कि मालगाड़ियां न चलने के कारण सूबे के किसानों के लिए डीएपी और यूरिया की सप्लाई रुक गई है। उन्होंने लिखा कि नवंबर में रबी सीजन की बुवाई शुरू हो रही है और समय पर खाद न मिलने से किसानों को भारी नुकसान होगा, जोकि राज्य और राष्ट्र के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने राज्य के थर्मल प्लांटों का हवाला देते हुए लिखा कि कोयला न मिलने के कारण थर्मल प्लांट बंद हो गए हैं, जिससे बिजली उत्पादन ठप हो गया है। यह राज्य में उद्योगों के लिए संकट है। सुरक्षा की दृष्टि से भी मालगाड़ियां रुकने के कारण जम्मू-कशमीर और लद्दाख में सेना व आम लोगों तक जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित हुई है।
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आठ सांसदों का आग्रह नहीं माना रेल मंत्री ने
पंजाब के आठ सांसदों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वीरवार दोपहर दिल्ली में रेल मंत्री से मुलाकात की। सांसदों ने बीते सवा महीने से मालगाड़ियों की आवाजाही बंद होने के कारण सूबे में पैदा हुई बिजली उत्पादन की समस्या के अलावा रबी सीजन में किसानों के लिए खाद की किल्लत का भी हवाला दिया। इसके अलावा उन्होंने अन्य जरूरी सामान न पहुंचने के कारण बढ़ रही महंगाई का भी जिक्र किया, लेकिन रेल मंत्री ने उन्हें साफ कह दिया कि जब तक पंजाब में सभी रेललाइनें क्लीयर नहीं हो जातीं, मालगाड़ियां नहीं चलाई जाएंगी। हालांकि सांसदों ने रेल मंत्री को यह भी बताया कि केवल दो रेल लाइनें जोकि मेल लाइन से अलग निजी थर्मल प्लांटों की ओर जाती हैं, वहीं किसान बैठे हैं। इसके अलावा किसानों ने मालगाड़ियों नहीं रोकने का एलान भी कर दिया है। इसके बावजूद रेल मंत्री नहीं माने और उन्होंने कहा कि सभी रेल लाइनें क्लीयर की जाएं और राज्य सरकार गाड़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ले। रेल मंत्री के इस रवैये को देखते हुए अब सांसदों ने 7 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का समय लिया है।