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Panchkula News: 16.30 लाख की साइबर ठगी में महिला आरोपी की जमानत खारिज
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आईपीओ-शेयर निवेश के नाम पर ठगी, सबूत मिटाने की भी कोशिश
अदालत बोली-ऐसे अपराध आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। शेयर मार्केट और आईपीओ में निवेश के नाम पर 16.30 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में अदालत ने आरोपी मोनिका की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसे अपराध न केवल व्यक्ति, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था और भरोसे को भी प्रभावित करते हैं।
मामले के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार को फंसाया। उसे अधिक मुनाफे का लालच देकर शेयर मार्केट और ब्लॉक ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। झांसे में आकर पीड़ित ने कुल 16.30 लाख रुपये निवेश कर दिए।
बाद में जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो उसे विभिन्न शर्तों में उलझाया गया और केवल 15 प्रतिशत रकम निकालने की बात कही गई। ठगी का एहसास होने पर उसने नवंबर 2025 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मोनिका को सह-आरोपी सुभाष के साथ मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि सुभाष ने अहम सबूत मिटाने के लिए मोनिका का मोबाइल फोन तोड़ दिया था, जिसमें धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे।
पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है या जांच में बाधा डाल सकती है। इस पर अदालत ने सहमति जताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
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अदालत बोली-ऐसे अपराध आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। शेयर मार्केट और आईपीओ में निवेश के नाम पर 16.30 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में अदालत ने आरोपी मोनिका की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसे अपराध न केवल व्यक्ति, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था और भरोसे को भी प्रभावित करते हैं।
मामले के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार को फंसाया। उसे अधिक मुनाफे का लालच देकर शेयर मार्केट और ब्लॉक ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। झांसे में आकर पीड़ित ने कुल 16.30 लाख रुपये निवेश कर दिए।
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बाद में जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो उसे विभिन्न शर्तों में उलझाया गया और केवल 15 प्रतिशत रकम निकालने की बात कही गई। ठगी का एहसास होने पर उसने नवंबर 2025 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मोनिका को सह-आरोपी सुभाष के साथ मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि सुभाष ने अहम सबूत मिटाने के लिए मोनिका का मोबाइल फोन तोड़ दिया था, जिसमें धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे।
पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है या जांच में बाधा डाल सकती है। इस पर अदालत ने सहमति जताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।