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बचपन से मारधाड़ थी पसंद, हाथ कमजोर थे, इसलिए पैरों के खेल को चुन यहां तक पहुंची
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चंडीगढ़। भारत की ओर से टोक्यो पैरालंपिक में ताइक्वांडो खिलाड़ी अरुणा तंवर ने भी क्वालीफाई किया है। भिवानी जिले के गांव दिनोद निवासी 21 वर्षीय खिलाड़ी को वर्ल्ड रेंकिंग के आधार पर पैरालंपिक का टिकट मिला है। इसमें भाग लेने वाली पहली भारतीय ताइक्वांडो खिलाड़ी बन जाएंगी। अरुणा इस समय महिलाओं की अंडर-49 श्रेणी में दुनिया की चौथे नंबर की खिलाड़ी हैं। उसने शुक्रवार को अपने कोच के साथ चंडीगढ़ में खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह से मुलाकात की।
इस दौरान अरुणा ने अमर उजाला के साथ अपने जीवन के संघर्ष की कहानी को साझा किया। अरुणा ने बताया कि उसके पिता नरेश कुमार तंवर एक निजी कंपनी में ड्राइवर हैं। बचपन में मुझे नहीं पता था कि मेरे हाथ सामान्य बच्चों से छोटे हैं। बड़ी हुई तो पता लगा। जब खेलने की बात कही तो लोगों ने मजाक उड़ाया। कई ने तो ये कहा कि पहले से ही हाथ छोटे हैं, खेलेगी तो टूट जाएंगे। पर मैंने हार नहीं मानी। बनना तो बॉक्सर चाहती थी, लेकिन उसमें सामान्य हाथों की जरूरत थी, जो भगवान में मुझे दिए नहीं। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में बीपीएड करने वाली खिलाड़ी ने बताया कि मैंने हार नहीं मानी और पैरों वाले खेल ताइक्वांडो को चूना। पैरालंपिक एसोसिएशन ने उसका साथ दिया और आज वह अपने पैरों पर खड़ी है। कोच अशोक कुमार व एसोसिएशन की सुखदेव राज समेत तमाम लोगों का मार्गदर्शन मिला।
स्कूल के समय था खेल का जुनून
अरुणा ने बताया कि एक दिन गांव के स्कूल में ताइक्वांडो सिखाने के लिए आए तो मेरे अंदर खेल प्रति चल रहे जुनून को और बल मिला। बस यहीं से ठान लिया कि ताइक्वांडो में अपना कैरियर बनाना है। परिवार का सहयोग मिला तो आज अपने पैरों पर खड़ी हूं और देश के लिए खेल सकूंगी। अरुणा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाएगी। इसके लिए वह रोजाना 8 से 10 घंटे तक अभ्यास कर रही है। खिलाड़ियों के लिए अरुणा ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी अपने को कमजोर न समझें, बल्कि अपने लक्ष्य पर फोकस करें।
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उपलब्धि
रजत पदक : 2019 में एशियन प्रेजिडेंट केप पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप, ईरान।
कांस्य पदक: 2019 में 8वीं वर्ल्ड पैरा ताइक्ंवांडो चैंपियनशिप, तुर्की।
कांस्य पदक : 2019 में अम्मन एशियन पैरा ताइक्वांडो जॉर्डन।
स्वर्ण पदक : 2018 में किमयूनिंग केप अंतरराष्ट्रीय पैरा ताइक्वांडो, कोरिया।
रजत पदक : 2018 में एशियन पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप, वियतनाम
राष्ट्रीय स्तर पर 5 बार गोल्ड मेडल।
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इस दौरान अरुणा ने अमर उजाला के साथ अपने जीवन के संघर्ष की कहानी को साझा किया। अरुणा ने बताया कि उसके पिता नरेश कुमार तंवर एक निजी कंपनी में ड्राइवर हैं। बचपन में मुझे नहीं पता था कि मेरे हाथ सामान्य बच्चों से छोटे हैं। बड़ी हुई तो पता लगा। जब खेलने की बात कही तो लोगों ने मजाक उड़ाया। कई ने तो ये कहा कि पहले से ही हाथ छोटे हैं, खेलेगी तो टूट जाएंगे। पर मैंने हार नहीं मानी। बनना तो बॉक्सर चाहती थी, लेकिन उसमें सामान्य हाथों की जरूरत थी, जो भगवान में मुझे दिए नहीं। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में बीपीएड करने वाली खिलाड़ी ने बताया कि मैंने हार नहीं मानी और पैरों वाले खेल ताइक्वांडो को चूना। पैरालंपिक एसोसिएशन ने उसका साथ दिया और आज वह अपने पैरों पर खड़ी है। कोच अशोक कुमार व एसोसिएशन की सुखदेव राज समेत तमाम लोगों का मार्गदर्शन मिला।
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स्कूल के समय था खेल का जुनून
अरुणा ने बताया कि एक दिन गांव के स्कूल में ताइक्वांडो सिखाने के लिए आए तो मेरे अंदर खेल प्रति चल रहे जुनून को और बल मिला। बस यहीं से ठान लिया कि ताइक्वांडो में अपना कैरियर बनाना है। परिवार का सहयोग मिला तो आज अपने पैरों पर खड़ी हूं और देश के लिए खेल सकूंगी। अरुणा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाएगी। इसके लिए वह रोजाना 8 से 10 घंटे तक अभ्यास कर रही है। खिलाड़ियों के लिए अरुणा ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी अपने को कमजोर न समझें, बल्कि अपने लक्ष्य पर फोकस करें।
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उपलब्धि
रजत पदक : 2019 में एशियन प्रेजिडेंट केप पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप, ईरान।
कांस्य पदक: 2019 में 8वीं वर्ल्ड पैरा ताइक्ंवांडो चैंपियनशिप, तुर्की।
कांस्य पदक : 2019 में अम्मन एशियन पैरा ताइक्वांडो जॉर्डन।
स्वर्ण पदक : 2018 में किमयूनिंग केप अंतरराष्ट्रीय पैरा ताइक्वांडो, कोरिया।
रजत पदक : 2018 में एशियन पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप, वियतनाम
राष्ट्रीय स्तर पर 5 बार गोल्ड मेडल।