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अपील : राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोगों को दो-दो मरले का प्लॉट दे सरकार
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पंचकूला। राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोगों का कहना है कि सरकार उनको दो-दो-मरले का प्लॉट जल्द उपलब्ध कराए। इतना ही नहीं पुनर्वास योजना के तहत सरकार जिस स्थान पर वे लोग हैं उन्हें वही प्लॉट एलाट कर दिया जाए। यह मांग जजपा के जिला शहरी अध्यक्ष ओपी सिहाग ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह चौटाला से की है। वहीं, सेक्टर-20 आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों और निवासियों का कहना है कि वह आशियाना फ्लैट निर्माण के विरोध में नहीं हैं। लेकिन, फ्लैट बनने से इस सेक्टर की आबादी और बढ़ जाएगी। इससे कॉलोनी के लोगों के साथ सेक्टर निवासियों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। चौटाला ने कहा कि वह इस मामले को लेकर जल्द अधिकारियों से बात करेंगे।
राजीव-इंदिरा कॉलोनी पुनर्वास योजना के धरातल पर उतरने से किसी को परेशानी न हो इसका ख्याल सरकार और विभागीय अधिकारियों को रखना चाहिए। जजपा के जिला शहरी प्रधान ओपी सिहाग, पार्षद सुशील गर्ग ने कहा कि सेक्टर-20 में पहले से ही जनसंख्या अधिक है। यहां वर्तमान में करीब 40 हजार से अधिक लोग रहते हैं। यही कारण है कि नगर निगम चुनाव में भी इस सेक्टर को दो वार्डों में बांटा गया था। वहीं, इस सेक्टर में पहले ही 1240 आशियाना फ्लैट बने हैं, जिसमें करीब छह हजार लोग रहते हैं। ऐसी में यदि सरकार यहां 32 सौ फ्लैट और बनाती है तो स्थिति विकराल हो सकती है। क्योंकि इस सेक्टर में सीवरेज सिस्टम पहले ही ध्वस्त है। सड़कों का बुरा हाल है। सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
सेक्टर-17 में ही लोगों को बसाए सरकार
सेक्टर-20 आरडब्ल्यूए के उपप्रधान योगिंदर क्वात्रा और महासचिव अविनाश का कहना है कि वे सरकार से मांग करते हैं कि आशियाना फ्लैट के स्थान पर राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोग सेक्टर-17 में ही जहां कालोनियां बसी हैं वहीं पर दो-दो मरले के प्लॉट दिए जाएं। कॉलोनी के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास कॉलोनी के लोगों ने करोड़ों रुपये जमा करवा रखे हैं। इसके बाद भी उन्हें प्लॉट नहीं दिया गया। यही कारण है कि वह नारकीय जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं।
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फ्लैट में नहीं होगा कॉलोनी के लोगों का बसर
वार्ड नंबर-7 की पार्षद ऊषा रानी और राजीव-इंदिरा कॉलोनी लेबर वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव डॉक्टर राम प्रसाद, राजीव भुक्कल, राम सरन का आरोप है कि सरकार की घोषणा केवल कागजों तक सीमित है। इसके अलावा उसके कथनी और करनी भी भी बहुत अंतर है। भाजपा सरकार पहले उन्हें प्लॉट देने की घोषणा की थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने प्लॉट के नाम पर करोड़ों रुपये जमा करवाए। प्लॉट का अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया, लेकिन आज तक किसी को कब्जा नहीं दिया गया। इससे स्पष्ट है कि सरकार कॉलोनी वालों का कितना भला करना चाहती है।
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राजीव-इंदिरा कॉलोनी पुनर्वास योजना के धरातल पर उतरने से किसी को परेशानी न हो इसका ख्याल सरकार और विभागीय अधिकारियों को रखना चाहिए। जजपा के जिला शहरी प्रधान ओपी सिहाग, पार्षद सुशील गर्ग ने कहा कि सेक्टर-20 में पहले से ही जनसंख्या अधिक है। यहां वर्तमान में करीब 40 हजार से अधिक लोग रहते हैं। यही कारण है कि नगर निगम चुनाव में भी इस सेक्टर को दो वार्डों में बांटा गया था। वहीं, इस सेक्टर में पहले ही 1240 आशियाना फ्लैट बने हैं, जिसमें करीब छह हजार लोग रहते हैं। ऐसी में यदि सरकार यहां 32 सौ फ्लैट और बनाती है तो स्थिति विकराल हो सकती है। क्योंकि इस सेक्टर में सीवरेज सिस्टम पहले ही ध्वस्त है। सड़कों का बुरा हाल है। सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
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सेक्टर-17 में ही लोगों को बसाए सरकार
सेक्टर-20 आरडब्ल्यूए के उपप्रधान योगिंदर क्वात्रा और महासचिव अविनाश का कहना है कि वे सरकार से मांग करते हैं कि आशियाना फ्लैट के स्थान पर राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोग सेक्टर-17 में ही जहां कालोनियां बसी हैं वहीं पर दो-दो मरले के प्लॉट दिए जाएं। कॉलोनी के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास कॉलोनी के लोगों ने करोड़ों रुपये जमा करवा रखे हैं। इसके बाद भी उन्हें प्लॉट नहीं दिया गया। यही कारण है कि वह नारकीय जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं।
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फ्लैट में नहीं होगा कॉलोनी के लोगों का बसर
वार्ड नंबर-7 की पार्षद ऊषा रानी और राजीव-इंदिरा कॉलोनी लेबर वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव डॉक्टर राम प्रसाद, राजीव भुक्कल, राम सरन का आरोप है कि सरकार की घोषणा केवल कागजों तक सीमित है। इसके अलावा उसके कथनी और करनी भी भी बहुत अंतर है। भाजपा सरकार पहले उन्हें प्लॉट देने की घोषणा की थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने प्लॉट के नाम पर करोड़ों रुपये जमा करवाए। प्लॉट का अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया, लेकिन आज तक किसी को कब्जा नहीं दिया गया। इससे स्पष्ट है कि सरकार कॉलोनी वालों का कितना भला करना चाहती है।