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Panchkula News: अंगूठा काटने वाले हिंसा मामले में दो बहनों की अग्रिम जमानत खारिज
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नगर निगम चुनाव के दौरान हुई मारपीट में गंभीर चोटों का मामला, अदालत ने निष्पक्ष जांच के लिए हिरासत में पूछताछ को बताया जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। नगर निगम चुनाव के दौरान हुए हिंसक विवाद में एक युवक का अंगूठा कटने और दूसरे व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में पंचकूला की अदालत ने दो सगी बहनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और निष्पक्ष जांच के लिए दोनों महिलाओं से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
मामले में सेक्टर-14 थाना पुलिस ने 12 मई को विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता गुरुदेव के अनुसार उनकी बहन उषा रानी नगर निगम चुनाव में पार्षद पद की उम्मीदवार थीं। चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ पारिवारिक विवाद बाद में हिंसक झड़प में बदल गया।
शिकायत के मुताबिक, वह अपने बेटे मुकुल के साथ समझौते के लिए पहुंचे थे, जहां दूसरा पक्ष पहले से मौजूद था। आरोप है कि कहासुनी के बाद मुकुल के साथ मारपीट की गई और उस पर ईंट तथा चाकू से हमला किया गया। हमले में मुकुल के दाहिने हाथ का अंगूठा और उंगलियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। शिकायतकर्ता गुरुदेव को भी चेहरे और नाक पर गंभीर चोटें आई थीं।
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शिकायत में दोनों बहनों पर भी मारपीट में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाओं की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आई है और मामले की जांच अभी जारी है। साथ ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी बाकी है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर में दोनों महिलाओं के नाम दर्ज हैं और आरोप गंभीर हैं। ऐसे में जांच को प्रभावित होने से बचाने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। नगर निगम चुनाव के दौरान हुए हिंसक विवाद में एक युवक का अंगूठा कटने और दूसरे व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में पंचकूला की अदालत ने दो सगी बहनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और निष्पक्ष जांच के लिए दोनों महिलाओं से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
मामले में सेक्टर-14 थाना पुलिस ने 12 मई को विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता गुरुदेव के अनुसार उनकी बहन उषा रानी नगर निगम चुनाव में पार्षद पद की उम्मीदवार थीं। चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ पारिवारिक विवाद बाद में हिंसक झड़प में बदल गया।
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शिकायत के मुताबिक, वह अपने बेटे मुकुल के साथ समझौते के लिए पहुंचे थे, जहां दूसरा पक्ष पहले से मौजूद था। आरोप है कि कहासुनी के बाद मुकुल के साथ मारपीट की गई और उस पर ईंट तथा चाकू से हमला किया गया। हमले में मुकुल के दाहिने हाथ का अंगूठा और उंगलियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। शिकायतकर्ता गुरुदेव को भी चेहरे और नाक पर गंभीर चोटें आई थीं।
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शिकायत में दोनों बहनों पर भी मारपीट में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाओं की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आई है और मामले की जांच अभी जारी है। साथ ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी बाकी है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर में दोनों महिलाओं के नाम दर्ज हैं और आरोप गंभीर हैं। ऐसे में जांच को प्रभावित होने से बचाने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।