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पंजाब के तालाबों में खनन और अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट ने लगाई पाबंदी, सरकार को दिए ये आदेश
Thu, 16 Jul 2020 12:40 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 12:40 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
पंजाब में बढ़ती अवैध माइनिंग खासतौर पर गांवों के तालाबों पर अवैध निर्माण और माइनिंग पर संज्ञान लेते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के सभी गांवों के तालाबों में अवैध निर्माणों को 6 माह के भीतर गिराने के आदेश दिए हैं । इससे राज्य में 12351 तालाबों पर से अवैध निर्माण हटने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने तालाबों पर निर्माण व माइनिंग पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।
जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने यह आदेश जालंधर के गांव कंग आर्या में अवैध माइनिंग को लेकर दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए दिए हैं। हाईकोर्ट के सामने जो मामला आया था वह सिर्फ एक गांव में की जा रही अवैध माइनिंग का था।
हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए गांवों के तालाबों को पहले मिट्टी से भरकर उस पर इमारतें बनाने और वहां माइनिंग करने तक कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गांवों के ये तालाब पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। इन तालाबों से न सिर्फ भूमिगत जल रिचार्ज होता है, बल्कि जलीय जीवन भी पनपता है।
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पंचायतों को आगे आकर तालाबों को बचाना होगा
जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम गांवों के तालाबों का संरक्षण करें, क्योंकि पिछले लंबे समय से अवैध निर्माणों और माइनिंग के चलते तालाब बर्बाद किए जा रहे हैं। ऐसे में पंचायतों को आगे आना होगा और गांवों के इन तालाबों को बचाना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि इन तालाबों को बड़ी ही चालाकी से पहले धीरे-धीरे मिटटी या मलबे से भरा जाता है और बाद में इन पर निर्माण कर दिए जाते हैं।
सरकार सुनिश्चित करे की तालाबों में न गिराए जाएं सीवर का पानी
हाईकोर्ट ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के सभी डीसी को आदेश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी गांव के तालाब में सीवर का पानी न गिराया जाए और छह महीने में इनकी पूरी मरम्मत की जाए। इसके साथ ही पंजाब सरकार को तालाबों का रिकॉर्ड अपडेट करने, इन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को छह महीनों में गिराने के आदेश दिए ।
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जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने यह आदेश जालंधर के गांव कंग आर्या में अवैध माइनिंग को लेकर दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए दिए हैं। हाईकोर्ट के सामने जो मामला आया था वह सिर्फ एक गांव में की जा रही अवैध माइनिंग का था।
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हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए गांवों के तालाबों को पहले मिट्टी से भरकर उस पर इमारतें बनाने और वहां माइनिंग करने तक कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गांवों के ये तालाब पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। इन तालाबों से न सिर्फ भूमिगत जल रिचार्ज होता है, बल्कि जलीय जीवन भी पनपता है।
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पंचायतों को आगे आकर तालाबों को बचाना होगा
जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम गांवों के तालाबों का संरक्षण करें, क्योंकि पिछले लंबे समय से अवैध निर्माणों और माइनिंग के चलते तालाब बर्बाद किए जा रहे हैं। ऐसे में पंचायतों को आगे आना होगा और गांवों के इन तालाबों को बचाना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि इन तालाबों को बड़ी ही चालाकी से पहले धीरे-धीरे मिटटी या मलबे से भरा जाता है और बाद में इन पर निर्माण कर दिए जाते हैं।
सरकार सुनिश्चित करे की तालाबों में न गिराए जाएं सीवर का पानी
हाईकोर्ट ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के सभी डीसी को आदेश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी गांव के तालाब में सीवर का पानी न गिराया जाए और छह महीने में इनकी पूरी मरम्मत की जाए। इसके साथ ही पंजाब सरकार को तालाबों का रिकॉर्ड अपडेट करने, इन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को छह महीनों में गिराने के आदेश दिए ।