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तेजस व सुखोई जैसे विमानों की तकनीक विकसित करने के लिए करार
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। सुखोई और तेजस जैसे विमानों की तकनीक तैयार करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड लखनऊ (एचएएल) व सीएसआईआर -केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) के बीच एक करार हुआ है। इसके तहत दोनों विमानों के लिए नए डिजाइन व तकनीक को विकसित करने में दोनों संस्थाएं साथ काम करेंगी। करार के बाद एचएएल विभिन्न प्लेटफार्मों पर चल रही सीएसएसआई की योजनाओं का लाभ उठा सकेगा। भविष्य की योजनाओं में भी एचएएल को लाभ मिलेगा।
सीएसआईओ की ओर से बताया गया कि सुखोई, तेजस, मिग विमानों की डिजाइन व जरूरत के मुताबिक होने वाली रिसर्च में दोनों मिलकर काम करेंगे। सीएसआईओ के वैज्ञानिकों ने इन विमानों के लिए कई तकनीक तैयार की हैं। इस मौके पर लखनऊ एचएएल के जनरल मैनेजर संजय कुमार ने कहा कि विमानन तकनीक को निर्माण व शोध के लिए सीएसआईआर एक प्रमुख प्रयोगशाला है। सीएसआईआर-सीएसआईओ चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. एसए रामाकृष्णा ने बताया कि दोनों संगठन के बीच करार एक बड़ी उपलब्धि है। यह करार भारतीय रक्षा बलों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने में मददगार साबित होगा।
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चंडीगढ़। सुखोई और तेजस जैसे विमानों की तकनीक तैयार करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड लखनऊ (एचएएल) व सीएसआईआर -केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) के बीच एक करार हुआ है। इसके तहत दोनों विमानों के लिए नए डिजाइन व तकनीक को विकसित करने में दोनों संस्थाएं साथ काम करेंगी। करार के बाद एचएएल विभिन्न प्लेटफार्मों पर चल रही सीएसएसआई की योजनाओं का लाभ उठा सकेगा। भविष्य की योजनाओं में भी एचएएल को लाभ मिलेगा।
सीएसआईओ की ओर से बताया गया कि सुखोई, तेजस, मिग विमानों की डिजाइन व जरूरत के मुताबिक होने वाली रिसर्च में दोनों मिलकर काम करेंगे। सीएसआईओ के वैज्ञानिकों ने इन विमानों के लिए कई तकनीक तैयार की हैं। इस मौके पर लखनऊ एचएएल के जनरल मैनेजर संजय कुमार ने कहा कि विमानन तकनीक को निर्माण व शोध के लिए सीएसआईआर एक प्रमुख प्रयोगशाला है। सीएसआईआर-सीएसआईओ चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. एसए रामाकृष्णा ने बताया कि दोनों संगठन के बीच करार एक बड़ी उपलब्धि है। यह करार भारतीय रक्षा बलों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने में मददगार साबित होगा।
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