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अग्निवीरों को हरियाणा में सरकारी नौकरी और अन्य कार्यों में दी जाएगी वरियता ः मनोहर लाल
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चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की है कि अग्निपथ योजना के सेना में चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को हरियाणा सरकार नौकरियों और अन्य कार्यों में प्राथमिकता देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का धन्यवाद करते हुए सीएम ने कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना से हरियाणा के युवाओं को काफी फायदा होगा। क्योंकि प्रदेश का युवा देश सेवा करने का जज्बा रखता है। देश की सेना में सबसे ज्यादा संख्या हमारे युवाओं की है।
मनोहर लाल ने कहा कि नई भर्ती योजना से उनको न केवल देश सेवा का मौका मिलेगा, बल्कि नौकरी भी मिल सकेगी। इस साल 46,000 अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। इसके लिए भर्ती रैलियां आगामी 90 दिनों में शुरू हो जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर अग्निपथ योजना प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप नए भारत के निर्माण व युवाओं के सशक्तीकरण में मील का पत्थर साबित होगी। अग्निपथ योजना से तीनों सेनाओं की मानव संसाधन नीति में एक नए युग की शुरुआत हुई है। यह केंद्र सरकार द्वारा किया गया एक प्रमुख रक्षा नीति सुधार है। इससे देश की सुरक्षा को मजबूत एवं हमारे युवाओं को सैन्य सेवा का अवसर प्रदान करेगी। अग्निपथ योजना भारतीय सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय का सृजन करेगी। मनोहर लाल ने बताया कि अग्निवीर संबंधित सेवा अधिनियमों के तहत चार साल के लिए नामांकित किए जाएंगे। तीनों सेनाओं में लागू जोखिम और कठिनाई भत्ते के साथ उन्हें आकर्षक मासिक पैकेज मिलेगा। चार साल की सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में स्थायी नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। चार साल की कार्यावधि पूरी होने पर अग्निवीरों को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज का भुगतान भी किया जाएगा।
अग्निपथ योजना पर पुनर्विचार करे सरकार : भूपेंद्र हुड्डा
चंडीगढ़। अग्निपथ पॉलिसी न तो देश हित में न ही नौजवानों के हित में है। केंद्र सरकार इस पर दोबारा से विचार करे, क्योंकि इस पॉलिसी के भविष्य में अच्छे परिणाम नहीं आएंगे। यह कहना है हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। हुड्डा ने मांग की कि इसको लेकर तर्कसंगत योजना बनाई जाए, ताकि युवाओं को स्थायी नौकरी मिल सके। साथ ही 3 साल में ओवरएज हो चुके युवाओं को भी आयु सीमा में छूट दी जाए। नई योजना में इनके लिए कोई जिक्र तक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी का पैसा बचाने और सैन्य बल की क्षमता को घटाकर आधा करने की नीयत से देश की सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है। यह योजना सेना की परंपरा, प्रकृति, नैतिकता और मूल्यों पर खरी नहीं उतरती।
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मनोहर लाल ने कहा कि नई भर्ती योजना से उनको न केवल देश सेवा का मौका मिलेगा, बल्कि नौकरी भी मिल सकेगी। इस साल 46,000 अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। इसके लिए भर्ती रैलियां आगामी 90 दिनों में शुरू हो जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर अग्निपथ योजना प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप नए भारत के निर्माण व युवाओं के सशक्तीकरण में मील का पत्थर साबित होगी। अग्निपथ योजना से तीनों सेनाओं की मानव संसाधन नीति में एक नए युग की शुरुआत हुई है। यह केंद्र सरकार द्वारा किया गया एक प्रमुख रक्षा नीति सुधार है। इससे देश की सुरक्षा को मजबूत एवं हमारे युवाओं को सैन्य सेवा का अवसर प्रदान करेगी। अग्निपथ योजना भारतीय सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय का सृजन करेगी। मनोहर लाल ने बताया कि अग्निवीर संबंधित सेवा अधिनियमों के तहत चार साल के लिए नामांकित किए जाएंगे। तीनों सेनाओं में लागू जोखिम और कठिनाई भत्ते के साथ उन्हें आकर्षक मासिक पैकेज मिलेगा। चार साल की सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में स्थायी नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। चार साल की कार्यावधि पूरी होने पर अग्निवीरों को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज का भुगतान भी किया जाएगा।
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अग्निपथ योजना पर पुनर्विचार करे सरकार : भूपेंद्र हुड्डा
चंडीगढ़। अग्निपथ पॉलिसी न तो देश हित में न ही नौजवानों के हित में है। केंद्र सरकार इस पर दोबारा से विचार करे, क्योंकि इस पॉलिसी के भविष्य में अच्छे परिणाम नहीं आएंगे। यह कहना है हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। हुड्डा ने मांग की कि इसको लेकर तर्कसंगत योजना बनाई जाए, ताकि युवाओं को स्थायी नौकरी मिल सके। साथ ही 3 साल में ओवरएज हो चुके युवाओं को भी आयु सीमा में छूट दी जाए। नई योजना में इनके लिए कोई जिक्र तक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी का पैसा बचाने और सैन्य बल की क्षमता को घटाकर आधा करने की नीयत से देश की सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है। यह योजना सेना की परंपरा, प्रकृति, नैतिकता और मूल्यों पर खरी नहीं उतरती।
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