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ई नेम पर आढ़ती और सरकार आमने-सामने, बने टकराव के हालात
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चंडीगढ़। हरियाणा की मंडियों में ई-नेम पोर्टल के माध्यम से खरीद को लेकर आढ़तियों और प्रदेश सरकार में टकराव के हालात बन गए हैं। प्रदेशभर के आढ़ती सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं, उधर हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ खड़ी है और हर हाल में ई-नेम पोर्टल से ही खरीद की जाएगी। टकराव की इस स्थिति के बीच किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि धान की फसल लगभग पक कर तैयार है और जल्द ही मंडियों में आने शुरू हो जाएगी। एक तो अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है, दूसरा अगर आढ़ती भी फसल नहीं खरीदते हैं तो किसानों की मुश्किल बढ़ना तय है।
इस बार हरियाणा सरकार ने धान के सीजन से उन फसलों की खरीद भी ई नेम पोर्टल के माध्यम तक करना लागू किया है, जिन फसलों का एमएसपी तय नहीं है। इनमें धान की बासमती किस्म के साथ बागवानी और दालें भी शामिल हैं। इन सभी फसलों की खरीद के लिए गेट पास भी मैनुवली के बजाय ई नेम पोर्टल से ही काटा जाएगा। इसके अलावा, मंडियों में बासमती धान की खरीद भी ई-ऑक्शन के माध्यम से ई-नेम के माध्यम से होगी। अगर कोई मिलर्स मंडियों में बिना ई-ऑक्शन के खरीद करते पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रदेशभर के मंडी आढ़ती इसका विरोध कर रहे हैं। हरियाणा आढ़ती एसोसिशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी का कहना है कि सरकार ई-नेम पोर्टल के माध्यम से आढ़तियों व किसानों के हितों का हनन कर रही है। ई-नेम पोर्टल के माध्यम से जब किसान अनाज लेकर मंडी में पहुंचेगा तो पहले मार्केट कमेटी उस अनाज की लैब करेगी और उसके बाद पोर्टल पर चढ़ाएगी। इसके बाद पोर्टल से जो भी आढ़ती चाहे वह खरीद सकता है। इससे अनाज उठान में देरी होगी और किसानों को समय पर भुगतान भी नहीं मिल पाएगा। आढ़तियों की मांग है कि ई नेम के बजाय पहले की तरह मैनुवली काम हो।
धान पककर तैयार, किसानों की चिंता बढ़ी
किसानों की फसल धान अब पक कर तैयार है। अगेती किस्में मंडियों में आने भी लगी है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के चलते किसानों कम भाव मिल रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि प्रदेश सरकार तुरंत प्रभाव से सरकारी खरीद शुरू कराए। साथ ही बोली प्रक्रिया में और पारदर्शिता लाए, ताकि किसानों के साथ गड़बड़ी न हो सके। बता दें कि धान की फसल मुख्य रूप से करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, अंबाला, फतेहाबाद, सिरसा, जींद आदि जिलों में होती है।
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हरियाणा सरकार ने किसानों के हितों में फैसले लिए हैं। पहले किसानों के सीधे खाते में पैसे डालने का फैसला लिया और अब ई नेम से खरीद का फैसला भी किसानों के हित में हैं। इस पोर्टल के माध्यम से खरीद होने से मंडियों में और पारदर्शिता आएगी और किसानों को इसका लाभ मिलेगा। आढ़तियों को हड़ताल नहीं बल्कि बातचीत करनी चाहिए, ताकि खरीद सुचारू हो सके।
-जेपी दलाल, कृषि मंत्री
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इस बार हरियाणा सरकार ने धान के सीजन से उन फसलों की खरीद भी ई नेम पोर्टल के माध्यम तक करना लागू किया है, जिन फसलों का एमएसपी तय नहीं है। इनमें धान की बासमती किस्म के साथ बागवानी और दालें भी शामिल हैं। इन सभी फसलों की खरीद के लिए गेट पास भी मैनुवली के बजाय ई नेम पोर्टल से ही काटा जाएगा। इसके अलावा, मंडियों में बासमती धान की खरीद भी ई-ऑक्शन के माध्यम से ई-नेम के माध्यम से होगी। अगर कोई मिलर्स मंडियों में बिना ई-ऑक्शन के खरीद करते पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रदेशभर के मंडी आढ़ती इसका विरोध कर रहे हैं। हरियाणा आढ़ती एसोसिशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी का कहना है कि सरकार ई-नेम पोर्टल के माध्यम से आढ़तियों व किसानों के हितों का हनन कर रही है। ई-नेम पोर्टल के माध्यम से जब किसान अनाज लेकर मंडी में पहुंचेगा तो पहले मार्केट कमेटी उस अनाज की लैब करेगी और उसके बाद पोर्टल पर चढ़ाएगी। इसके बाद पोर्टल से जो भी आढ़ती चाहे वह खरीद सकता है। इससे अनाज उठान में देरी होगी और किसानों को समय पर भुगतान भी नहीं मिल पाएगा। आढ़तियों की मांग है कि ई नेम के बजाय पहले की तरह मैनुवली काम हो।
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धान पककर तैयार, किसानों की चिंता बढ़ी
किसानों की फसल धान अब पक कर तैयार है। अगेती किस्में मंडियों में आने भी लगी है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के चलते किसानों कम भाव मिल रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि प्रदेश सरकार तुरंत प्रभाव से सरकारी खरीद शुरू कराए। साथ ही बोली प्रक्रिया में और पारदर्शिता लाए, ताकि किसानों के साथ गड़बड़ी न हो सके। बता दें कि धान की फसल मुख्य रूप से करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, अंबाला, फतेहाबाद, सिरसा, जींद आदि जिलों में होती है।
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हरियाणा सरकार ने किसानों के हितों में फैसले लिए हैं। पहले किसानों के सीधे खाते में पैसे डालने का फैसला लिया और अब ई नेम से खरीद का फैसला भी किसानों के हित में हैं। इस पोर्टल के माध्यम से खरीद होने से मंडियों में और पारदर्शिता आएगी और किसानों को इसका लाभ मिलेगा। आढ़तियों को हड़ताल नहीं बल्कि बातचीत करनी चाहिए, ताकि खरीद सुचारू हो सके।
-जेपी दलाल, कृषि मंत्री