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Panchkula News: पितृ हत्या के पूर्वाग्रह से प्रभावित हुई अदालत, हाईकोर्ट ने बेटी को दिया निर्दोष करार
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जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट ने बेटी को दोषी मानते हुए सुनाई थी पांच साल की सजा
पसंद के लड़के से विवाह पर आपत्ति के चलते पिता की हत्या का जुवेनाइल कोर्ट ने माना था दोषी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पसंद के लड़के से विवाह पर आपत्ति के चलते पिता की हत्या की दोषी करार दी गई बेटी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्दोष मानते हुए उसे बरी करने का आदेश दिया है। जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट ने इस मामले में बेटी को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी।
याचिका दाखिल करते हुए बेटी ने बताया कि उसके पिता की 16 अगस्त 2003 को अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी थी। इस घटना के समय याची की आयु 16 वर्ष 4 माह थी। इसके बाद पुलिस ने याची को इस मामले में आरोपी बनाया था और जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए 2005 में पांच साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद याची ने इसके खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी जिसे 2007 में खारिज कर दिया गया।
याची ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार उसकी पसंद के लड़के से उसका विवाह नहीं होने के चलते पिता की हत्या की गई थी। ऐसे में याची ने खुद को निर्दोष करार देते हुए जुवेनाइल कोर्ट व सेशन कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने अपील पर सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोनों अदालतों ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए चूक की है।
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याची को दोषी करार देने के लिए सबूत काफी नहीं है। कोर्ट ने दोषी करार देने वाली जजमेंट व इससे जुड़ा अन्य रिकाॅर्ड देखने के बाद कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत इस मामले में पितृ हत्या के पूर्वाग्रह से प्रभावित हो गई थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त सबूतों का अभाव मानते हुए उसे संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
यह था मामला
अगस्त 2003 की रात को याची का पिता व उसके अन्य परिजन छत पर सो रहे थे। इस दौरान दो लोगों ने वहां पहुंच कर याची के पिता की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में जांच आगे बढ़ाई और याची को इस मामले में आरोपी बनाया। पुलिस के अनुसार प्रेम प्रसंग के मामले में याची ने अपने साथियों के साथ मिल कर पिता की हत्या की थी।
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पसंद के लड़के से विवाह पर आपत्ति के चलते पिता की हत्या का जुवेनाइल कोर्ट ने माना था दोषी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पसंद के लड़के से विवाह पर आपत्ति के चलते पिता की हत्या की दोषी करार दी गई बेटी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्दोष मानते हुए उसे बरी करने का आदेश दिया है। जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट ने इस मामले में बेटी को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी।
याचिका दाखिल करते हुए बेटी ने बताया कि उसके पिता की 16 अगस्त 2003 को अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी थी। इस घटना के समय याची की आयु 16 वर्ष 4 माह थी। इसके बाद पुलिस ने याची को इस मामले में आरोपी बनाया था और जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए 2005 में पांच साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद याची ने इसके खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी जिसे 2007 में खारिज कर दिया गया।
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याची ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार उसकी पसंद के लड़के से उसका विवाह नहीं होने के चलते पिता की हत्या की गई थी। ऐसे में याची ने खुद को निर्दोष करार देते हुए जुवेनाइल कोर्ट व सेशन कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने अपील पर सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोनों अदालतों ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए चूक की है।
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याची को दोषी करार देने के लिए सबूत काफी नहीं है। कोर्ट ने दोषी करार देने वाली जजमेंट व इससे जुड़ा अन्य रिकाॅर्ड देखने के बाद कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत इस मामले में पितृ हत्या के पूर्वाग्रह से प्रभावित हो गई थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त सबूतों का अभाव मानते हुए उसे संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
यह था मामला
अगस्त 2003 की रात को याची का पिता व उसके अन्य परिजन छत पर सो रहे थे। इस दौरान दो लोगों ने वहां पहुंच कर याची के पिता की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में जांच आगे बढ़ाई और याची को इस मामले में आरोपी बनाया। पुलिस के अनुसार प्रेम प्रसंग के मामले में याची ने अपने साथियों के साथ मिल कर पिता की हत्या की थी।