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पंजाब फूड कमीशन के चेयरमैन को सरकारी आवास मामले में डेढ़ माह में फैसला ले प्रशासन: उच्च न्यायालय
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चंडीगढ़। पंजाब स्टेट फूड कमीशन के चेयरमैन डीपी रेडी के सरकारी आवास विवाद मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को डेढ़ माह के भीतर अलॉटमेंट पर फैसला लेने के आदेश दिए हैं।
पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा वर्तमान में फूड कमीशन के चेयरमैन डीपी रेड्डी ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए सेक्टर 7 स्थित उनके आवास के आवंटन को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया कि 2018 में उन्होंने पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब फूड कमीशन में चेयरमैन के तौर पर ज्वाइन किया था। नियुक्ति के बाद उन्होंने प्रशासन को रिप्रेजेंटेशन देते हुए जिस मकान में रह रहे हैं उसी को उन्हें आवंटित किए जाने की मांग की थी। प्रशासन की कमेटी ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था जिसके बाद उन्होंने दोबारा रिप्रेजेंटेशन दी जिसे फिर से खारिज कर दिया गया। इस दौरान उन्हें नोटिस देते हुए प्रशासन की कमेटी ने कहा कि पहले वह पुराना आवास खाली करें फिर नए सिरे से आवेदन करें। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रशासन पिक एंड चूस नीति आजमा रहा है क्योंकि पूर्व डीजीपी जिसे चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर नियुक्त किया गया है उनके पुराने आवास को उनको दोबारा आवंटित कर दिया गया है जबकि याचिकाकर्ता को इससे इनकार कर दिया गया। चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति के नियम के अनुसार वह सरकारी आवास के लिए नहीं बल्कि उनके मूल वेतन के 30 प्रतिशत राशि के मकान भत्ते के हकदार है। उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि परिस्थितियों के अनुरूप प्रशासन की कमेटी को आवास उन्हें आवंटित करने का अधिकार है। ऐसे में 15 दिन के भीतर उनके द्वारा दी गई रिप्रेजेंटेशन को कमेटी के समक्ष रखने और अगले एक माह में उन्हें उनके वर्तमान आवास को पुन: आवंटित करने या फिर उनकी श्रेणी के अनुरूप उच्च श्रेणी का मकान अलॉट करने पर 1 माह के भीतर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
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पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा वर्तमान में फूड कमीशन के चेयरमैन डीपी रेड्डी ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए सेक्टर 7 स्थित उनके आवास के आवंटन को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया कि 2018 में उन्होंने पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब फूड कमीशन में चेयरमैन के तौर पर ज्वाइन किया था। नियुक्ति के बाद उन्होंने प्रशासन को रिप्रेजेंटेशन देते हुए जिस मकान में रह रहे हैं उसी को उन्हें आवंटित किए जाने की मांग की थी। प्रशासन की कमेटी ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था जिसके बाद उन्होंने दोबारा रिप्रेजेंटेशन दी जिसे फिर से खारिज कर दिया गया। इस दौरान उन्हें नोटिस देते हुए प्रशासन की कमेटी ने कहा कि पहले वह पुराना आवास खाली करें फिर नए सिरे से आवेदन करें। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रशासन पिक एंड चूस नीति आजमा रहा है क्योंकि पूर्व डीजीपी जिसे चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर नियुक्त किया गया है उनके पुराने आवास को उनको दोबारा आवंटित कर दिया गया है जबकि याचिकाकर्ता को इससे इनकार कर दिया गया। चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति के नियम के अनुसार वह सरकारी आवास के लिए नहीं बल्कि उनके मूल वेतन के 30 प्रतिशत राशि के मकान भत्ते के हकदार है। उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि परिस्थितियों के अनुरूप प्रशासन की कमेटी को आवास उन्हें आवंटित करने का अधिकार है। ऐसे में 15 दिन के भीतर उनके द्वारा दी गई रिप्रेजेंटेशन को कमेटी के समक्ष रखने और अगले एक माह में उन्हें उनके वर्तमान आवास को पुन: आवंटित करने या फिर उनकी श्रेणी के अनुरूप उच्च श्रेणी का मकान अलॉट करने पर 1 माह के भीतर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
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