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कार्रवाई : दो माह में 38 डीपीसी, सात दुकान दो भवन तोड़े और सील किए, जिला नगर योजनाकार ने अवैध निर्माण के खिलाफ अगस्त और सितंबर माह में की कार्रवाई
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पंचकूला। जिला नगर योजनाकार कार्यालय द्वारा अगस्त और सितंबर माह में पेरीफेरी नियंत्रित क्षेत्र पिंजौर-कालका और बरवाला में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर 38 डीपीसी, सात दुकानों और दो भवनों को तोड़ा और सील किया गया। इसके अलावा अवैध रूप से निर्मित और निर्माणाधीन अन्य भवनों और ढांचों को भी गिराया गया। जिला नगर योजनाकार प्रियम भारद्वाज ने बताया कि यह कार्रवाई उनकी देखरेख में पुलिस विभाग के सहयोग से की गई। तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान होने वाले विरोध को शांतिपूर्वक ढंग से रोकने लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया है।
अगस्त और सितंबर माह में अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण देकर प्रियम भारद्वाज ने बताया कि पेरीफेरी नियंत्रित क्षेत्र पिंजौर में नगर योजनाकार विभाग द्वारा 10 डीपीसी, तीन अस्थाई ढांचे, चार ढांचों (दो दुकानें, एक होटल व एक क्लब) को सील किया गया। इसके अलावा नियंत्रित क्षेत्र बरवाला में 13 डीपीसी और एक ढांचे को ध्वस्त किया गया। पिंजौर-कालका के गांव सीतोमाजरा, मढांवाला, करनपुर, गरीड़ां में दो कॉलोनियों में आठ डीपीसी, एक चारदीवारी और एक अस्थाई शेड को गिराया गया। इसी प्रकार से गांव बनोई खुदाबक्श में एक शोरूम व चार दुकानों को ध्वस्त किया गया। गांव मंधाना (भोज मटोर) में दो व्यवसायिक ढांचों और एक निर्माणाधीन भवन को गिराया गया। इसके अलावा गांव सीतोमाजरा, झोलूवाल में सात डीपीसी, एक बाउंड्री वॉल व एक निर्माणाधीन भवन को ध्वस्त कर एक दुकान को सील किया गया।
प्रियम भारद्वाज ने बताया कि अवैध निर्माण भू-मालिकों द्वारा प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर बिना किसी सरकारी अनुमति के विकसित किया जा रहा था। ऐसे भू-मालिकों, प्रॉपर्टी डीलरों और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अर्बन एरिया एक्ट-1975, पेरीफेरी नियंत्रित क्षेत्र- 1952 और नियंत्रित क्षेत्र 1963 के तहत विभाग सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज भी करवाई जाएगी। इसमें तीन साल कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि विभाग से सीएलयू की अनुमति लिए बिना किसी भी प्रकार के छोटे या बड़े निर्माण न करें, ताकि लोगों की कड़ी मेहनत का पैसा बर्बाद न हो और अनाधिकृत अवैध निर्माणों पर रोक लग सके।
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अगस्त और सितंबर माह में अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण देकर प्रियम भारद्वाज ने बताया कि पेरीफेरी नियंत्रित क्षेत्र पिंजौर में नगर योजनाकार विभाग द्वारा 10 डीपीसी, तीन अस्थाई ढांचे, चार ढांचों (दो दुकानें, एक होटल व एक क्लब) को सील किया गया। इसके अलावा नियंत्रित क्षेत्र बरवाला में 13 डीपीसी और एक ढांचे को ध्वस्त किया गया। पिंजौर-कालका के गांव सीतोमाजरा, मढांवाला, करनपुर, गरीड़ां में दो कॉलोनियों में आठ डीपीसी, एक चारदीवारी और एक अस्थाई शेड को गिराया गया। इसी प्रकार से गांव बनोई खुदाबक्श में एक शोरूम व चार दुकानों को ध्वस्त किया गया। गांव मंधाना (भोज मटोर) में दो व्यवसायिक ढांचों और एक निर्माणाधीन भवन को गिराया गया। इसके अलावा गांव सीतोमाजरा, झोलूवाल में सात डीपीसी, एक बाउंड्री वॉल व एक निर्माणाधीन भवन को ध्वस्त कर एक दुकान को सील किया गया।
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प्रियम भारद्वाज ने बताया कि अवैध निर्माण भू-मालिकों द्वारा प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर बिना किसी सरकारी अनुमति के विकसित किया जा रहा था। ऐसे भू-मालिकों, प्रॉपर्टी डीलरों और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अर्बन एरिया एक्ट-1975, पेरीफेरी नियंत्रित क्षेत्र- 1952 और नियंत्रित क्षेत्र 1963 के तहत विभाग सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज भी करवाई जाएगी। इसमें तीन साल कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि विभाग से सीएलयू की अनुमति लिए बिना किसी भी प्रकार के छोटे या बड़े निर्माण न करें, ताकि लोगों की कड़ी मेहनत का पैसा बर्बाद न हो और अनाधिकृत अवैध निर्माणों पर रोक लग सके।
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