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Panchkula News: लोक निर्माण विभाग का कारनामा ! खाई की बजाय पहाड़ की तरफ लगा दी रेलिंग, कम होने के बजाय बढ़ेंगे हादसे

Thu, 06 Feb 2025 01:24 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2025 01:24 AM IST
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Achievement of Public Works Department! Railings installed on the mountain side instead of ditch, accidents will increase instead of decreasing
कमाल की इंजीनियरिंग: सड़क के किनारे की जगह पहाड़ की तरफ लगाई रेलिंग। संवाद 
मोरनी। मोरनी से समलोठा मार्ग तक बन रही सड़क पर लोक निर्माण विभाग की भारी लापरवाही देखने को मिली। वाहनों की सुरक्षा के लिए लगाई जा रही रेलिंग गलत साइड में लगा दी गई, जिससे सरकारी पैसे की बर्बादी के साथ-साथ लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई है।
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दरअसल वाहनों की सुरक्षा के लिए लगाई जाने वाली रेलिंग खाई की ओर लगाई जाती है ताकि दुर्घटना की स्थिति में वाहन को नीचे खाई में गिरने से बचाया जा सके। लेकिन लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने मोरनी से समलोठा मार्ग पर इसे इसे उल्टा पहाड़ की ओर लगा दिया है। अब यह सड़क के उस पार से किसी की सुरक्षा कैसे करेगी? यह सोच का विषय है।
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गौरतलब है कि जिस मोड़ पर रेलिंग को इस रेलिंग को लगाया जा रहा है वह एक खतरनाक मोड़ है। पहाड की तरफ रेलिंग लगाने से सड़क और संकरी हो गई है। ऐसे में सड़क के दूसरी तरफ हादसे होने की आशंका और बढ़ गई है।
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लाखों का बजट, लेकिन मकसद फेल!

वार्ड पांच से जिला परिषद सदस्य रोमा देवी, मोरनी युवा संगठन के प्रधान मोहित परमार, सदस्य अमित शर्मा ने आरोप लगाया कि रेलिंग लगाने का मकसद जहां वाहनों को खाई में गिरने से बचाना होना चाहिए था, वहीं जन प्रतिनिधियों के लिए अब यह सिर्फ सरकारी बजट खर्च करने का जरिया बनकर रह गया है। सड़क निर्माण में लगे कर्मचारियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रेलिंग लगाने का यह काम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हो रहा है। यानी सरकारी खजाने से लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

जनता की सुरक्षा या ठेकेदारों की जेबें भरने का खेल
यह पहली बार नहीं है जब लोक निर्माण विभाग की लापरवाही सामने आई हो। पहले भी सड़कों के घटिया निर्माण, भ्रष्टाचार और ठेकेदारों से मिलीभगत के मामले सामने आते रहे हैं। लेकिन इस बार सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के साथ घोर लापरवाही बरतने का भी है। सवाल यह भी है कि जो लाखों रुपए इस गलत काम में बहा दिए गए, क्या उसकी जिम्मेदारी कोई लेगा? या फिर यह भी एक और ‘फाइल’ बनकर सरकारी दफ्तरों की धूल खाएगी।


सवाल उठते ही अधिकारी गायब!

जब यह मामला चर्चा में आया और मीडिया ने अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो सबके फोन उठाने अचानक बंद हो गए। एसडीओ अनिल कंबोज ने खुद को एक महीने की छुट्टी पर बताया, जबकि एक्सईएन और जेई नरेश कुमार ने फोन नहीं उठाया। यह स्थिति इस बात का साफ सबूत है कि अधिकारी सवालों से बचने के लिए भाग रहे हैं।
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