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Panchkula News: दर्द से तड़पती महिला को इमरजेंसी से लौटाया, नहीं मिला इलाज
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गंभीर हालत में अल्ट्रासाउंड के लिए फरवरी की तारीख
कहा- इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया जाता है
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पेट की गंभीर समस्या और असहनीय दर्द से जूझ रही बलटाना निवासी बबला को सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी से राहत मिलने के बजाय परेशान होकर लौटना पड़ा। महिला का आरोप है कि उन्हें कई बार इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। हर बार इंजेक्शन लगाने के बाद स्टाफ उन्हें घर जाने के लिए कह देता है। गंभीर स्थिति के बावजूद न तो उन्हें भर्ती किया गया और न ही समुचित इलाज दिया जा रहा है।
महिला ने बताया कि रात के समय जब दर्द असहनीय हो गया तो वह इमरजेंसी में पहुंचीं। यहां इंजेक्शन तो लगाया गया लेकिन रात करीब एक बजे स्टाफ ने यह कहकर अस्पताल से घर भेज दिया और कहा कि जब तक ग्लूकाेज चढ़ रहा है तब तक ही बेड मिल सकता है। महिला का आरोप है कि इस दौरान स्टाफ का व्यवहार भी ठीक नहीं था। अल्ट्रासाउंड के लिए भी उन्हें फरवरी महीने तक की तारीख दी गई है जबकि उनकी समस्या लगातार बनी हुई है।
सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में कई मरीजों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां न तो मरीजों की गंभीरता को प्राथमिकता दी जाती है और न ही पर्याप्त सहयोग मिलता है। कई बार मरीजों को स्ट्रेचर से ले जाने के लिए स्टाफ का सहयोग नहीं मिलता।
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कहा- इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया जाता है
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पेट की गंभीर समस्या और असहनीय दर्द से जूझ रही बलटाना निवासी बबला को सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी से राहत मिलने के बजाय परेशान होकर लौटना पड़ा। महिला का आरोप है कि उन्हें कई बार इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। हर बार इंजेक्शन लगाने के बाद स्टाफ उन्हें घर जाने के लिए कह देता है। गंभीर स्थिति के बावजूद न तो उन्हें भर्ती किया गया और न ही समुचित इलाज दिया जा रहा है।
महिला ने बताया कि रात के समय जब दर्द असहनीय हो गया तो वह इमरजेंसी में पहुंचीं। यहां इंजेक्शन तो लगाया गया लेकिन रात करीब एक बजे स्टाफ ने यह कहकर अस्पताल से घर भेज दिया और कहा कि जब तक ग्लूकाेज चढ़ रहा है तब तक ही बेड मिल सकता है। महिला का आरोप है कि इस दौरान स्टाफ का व्यवहार भी ठीक नहीं था। अल्ट्रासाउंड के लिए भी उन्हें फरवरी महीने तक की तारीख दी गई है जबकि उनकी समस्या लगातार बनी हुई है।
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सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में कई मरीजों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां न तो मरीजों की गंभीरता को प्राथमिकता दी जाती है और न ही पर्याप्त सहयोग मिलता है। कई बार मरीजों को स्ट्रेचर से ले जाने के लिए स्टाफ का सहयोग नहीं मिलता।
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