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एक आईएएस मां और एक आईएएस की मां

Panchkula Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। भगवान से बढ़कर कोई इस दुनिया में है तो वह मां है। मां की ममता और आंचल ही बच्चे को दुनिया से सामना करने की शक्ति देती है। चोट बच्चे को लगती तो दर्द मां को होता है। बच्चे की हर एक परीक्षा मां के लिए भी इम्तिहान होता है। कुछ ऐसी कहानी है मां की। 13 मई यानी आज मदर्स-डे है। आज हम दो ऐसी महिलाओं को करीब से जानने की कोशिश करेंगे, जो समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनमें एक आईएएस मां है तो दूसरी आईएएस की मां, लेकिन दोनों को एक मां की भूमिका के तौर पर देखेंगे। यह भी जानेंगे कि उन्हें मां से कैसी परवरिश मिली और अब वे अपने बच्चों को कैसी शिक्षा दे रही हैं।
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बेटी और जिले दोनों को संभाल लेती हूं : आशिमा
आशिमा बराड़ पंचकूला की डीसी हैं तो उनके पति मनदीप बराड़ कुरुक्षेत्र के डीसी। दोनों के पास समय की बहुत कमी है, लेकिन फिर भी जो वक्त उन्हें मिलता, वे अपनी तीन वर्षीय बेटी शिरीन के साथ बिताते हैं। उनसे जब पूछा गया कि बेटी को संभालना मुश्किल है कि जिले को तो वे कहती हैं कि दोनों को अच्छी तरह से संभाल लेती हूं, क्योंकि मां ने ऐसे संस्कार दिए हैं। जब जिले का कामकाज देखना होता है तो वे हर इंसान को इंसान की नजर से देखती हैं और जब बेटी के पास पहुंचती तो एक मां बनकर देखभाल करती हैं। वे बताती हैं कि घर पर उनकी सास का बहुत सपोर्ट मिलता है। उनकी गैर मौजूदगी पर उनकी सास ही मासूम शिरीन की देखभाल करती हैं और कभी भी बेटी को मां की कमी महसूस नहीं होने देती। वे कहती हैं कि बच्चे जिद्दी नहीं होते, जिद्दी हम लोग होते हैं। मां जैसे बच्चे को संस्कार देगी, बच्चे वैसे ही समाज का निर्माण करेंगे। उनका कहना है कि उनकी बेटी और उनके बीच एक बेहतरीन रिश्ता बन चुका है। जब भी वे बोरियत महसूस करती हैं तो वे अपनी बेटी से बात करती हैं और एक अच्छा अनुभव प्राप्त होता है।
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बच्चों को प्यार से पालिए फिर देखिए कमाल : उर्मिल सिहाग
उर्मिल सिहाग आईएएस सिद्धार्थ सिहाग की मां है। सिद्धार्थ ने हाल ही में आईएएस की परीक्षा में 42वीं रैंक हासिल की है। हाउस वाइफ उर्मिल सिहाग का अनुभव कहता है कि बच्चे तो सभी के प्यारे होते हैं। कभी प्यार कभी फटकार वाला एटीट्यूड नहीं होना चाहिए। बच्चों को प्यार से पालिए। जब वे बड़े होंगे तो इसका असर भी दिखेगा। समाज में उन्हें घुलने-मिलने दें, ताकि उसकी सोच सीमित न रहे। उन्होंने बताया कि बेटे की देखभाल के लिए अपनी किटी पार्टी में थोड़ी कटौती भी की। उन्होंने बताया कि जो उनकी मां ने संस्कार दिए थे, वही संस्कार उन्होंने अपने बेटे को दिए। परवरिश का ही नतीजा है कि सिद्धार्थ अब देश और समाज के सेवा में अपने को समर्पित करने वाले हैं।

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