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लैपटॉप से स्किन कैंसर का खतरा

Mon, 16 Sep 2013 05:38 AM IST
Panchkula
Panchkula Updated Mon, 16 Sep 2013 05:38 AM IST
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पंचकूला। टेक्नोलॉजी फ्रेंडली होना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ-साथ सावधानी भी जरूरी है। जरा सी लापरवाही आपको स्किन कैंसर का शिकार बना सकता है। आजकल थाई (जंघा) पर लैपटॉप रखकर यूज करने का प्रचलन बढ़ गया है। इसमें सबसे आगे यंगस्टर्स हैं। खासकर युवतियों में यह आदत आम हो चुकी है।
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थाई पर लैपटॉप रखकर काम करने से लैपटॉप की गर्मी स्किन तक पहुंचती है और इससे इरीदमा ऐब इग्ने जैसी बीमारी होने लगी है। लैपटॉप यूजर्स में होने वाली इस बीमारी को ‘लैपटॉप हाई सिंड्रोम’ भी कहते हैं। इस तरह की बीमारी से पीड़ित मरीजों में आईटी सेक्टर, स्कूल-कालेज गोइंग स्टूडेंट की संख्या ज्यादा है। स्किन स्पेशलिस्ट के अनुसार, यदि समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो प्री स्किन कैंसर जैसे लक्षण दिखने लगते हैं और 10 फीसदी मरीजों में स्किन कैंसर का भी खतरा रहता है।
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लैपटॉप यूजर्स ऐसे आते हैं चपेट में
ज्यादातर लैपटॉप यूजर्स थाई पर लैपटॉप रखकर काम करते हैं। यदि एक सप्ताह तक ऐसे ही 20 से 50 मिनट तक लगातार यूज किया जाता है तो स्किन का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे स्किन के निचले लेयर तक प्रभाव पड़ने लगता है और बाद में स्किन के सेल्स धीरे-धीरे टूटने के अलावा ब्लड भी जमने लगता है।
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लक्षण
- शुरुआती दौर में थाई की स्किन का कलर लाल होने लगता है, फिर वह जाले का आकार बना लेता है।
- कुछ समय बाद वह भूरे रंग का हो जाता है और धीरे-धीरे जाले का आकार काला होने लगता है।
- यदि इस स्थिति में भी इलाज नहीं किया गया तो प्री स्किन कैंसर डिजॉर्डर होने के चांसेज बढ़ जाते हैं।

स्किन से डायरेक्ट टच, ज्यादा खतरनाक
मिनी स्कर्ट पहनकर थाई पर लैपटाप रखकर यूज करना ज्यादा खतरनाक है। ऐसे में थाई पर लैपटाप रखने से लैपटॉप की गर्मी स्किन तक जल्दी पहुंचती है और तापमान 50 डिग्री तक पहुंचते ही यह खतरनाक साबित होने लगता है।


इन्हें ज्यादा प्राब्लम
- मेल (पुरुष) यूजर्स यदि जांघ पर लैपटॉप रखकर लगातार चार घंटे यूज करते हैं और यही सिलसिला एक साल तक चलता है तो स्पर्म काउंट भी कम होने लगता है।
- जिन महिलाओं का स्किन कलर ज्यादा फेयर है, उनमें स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। एक सर्वे के आधार पर यह खुलासा हुआ है।
- जिन लोगों को अस्थमा या किडनी प्राब्लम है या फिर कोई व्यक्ति कैंसर से बचाव की दवा ले रहा है तो उसके लिए भी यह बीमारी ज्यादा खतरनाक है।

पहले बुजुर्गों को होती थी यह बीमारी
पैरों की ज्यादा शिकाई करने की वजह पहले बुजुर्गों में यह बीमारी होती थी, लेकिन अब नई टेक्नोलॉजी के उपयोग में लापरवाही बरतने के कारण युवाओं में यह बीमारी ज्यादा होने लगी है।

कोट
एक महीने में इस तरह के करीब 15 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मरीज या तो आईटी सेक्टर से जुड़े हैं या फिर स्कूल-कालेज गोइंग स्टूडेंट हैं।
- डा. विकास शर्मा, नेशनल स्किन हास्पिटल, एमडीसी सेक्टर-5 पंचकूला
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