फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   डा. अमित और उपेंद्र को सात-सात साल कैद

डा. अमित और उपेंद्र को सात-सात साल कैद

Sat, 23 Mar 2013 05:31 AM IST
Panchkula
Panchkula Updated Sat, 23 Mar 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन
पंचकूला। गुड़गांव के चर्चित किडनी कांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को दस में से पांच दोषियों को सजा सुनाई, जबकि पांच को बरी कर दिया। मुख्य आरोपी डा. अमित कुमार और डा. उपेंद्र को सात-सात साल की कैद और 60-60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दलाल की भूमिका निभाने वाले मोहम्मद शाहिद को साढ़े चार साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। गयासुद्दीन और मनोज के जेल में बिताए गए समय को ही सजा मानने का फैसला अदालत ने सुनाया। दोनों करीब पांच साल से अंबाला जेल में बंद हैं।
विज्ञापन

बरी होने वालों में डा. अमित का भाई जीवन, ड्राइवर जगदीश, डा. सरज, नर्स लिंडा और डा. केके अग्रवाल शामिल हैं। एक आरोपी यशपाल शर्मा की केस के ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में कुल 11 आरोपी बनाए थे। 120 लोगों को गवाह बनाया गया था। डा. सरज, जीवन, लिंडा और जगदीश जमानत पर चल रहे थे।
विज्ञापन

सजा सुनाने के दौरान सीबीआई के विशेष जज नाजर सिंह ने कहा कि दोषियों ने मेडिकल जैसे पवित्र पेशे को बदनाम किया है। भगवान के बाद लोग डाक्टरों पर ही विश्वास करते हैं, लेकिन दोषियों ने उस विश्वास को भी तोड़ दिया। एक्सपर्ट और जरूरी दवाओं के बिना ही मरीजों के साथ खिलवाड़ करते रहे। केस के ट्रायल के दौरान 12 लोगों ने विशेष अदालत में गवाही दी थी कि उनकी किडनी डा. अमित और उनके साथियों ने ही ट्रांसप्लांट की। इसमें इनकी गवाही काफी महत्वपूर्ण रही। डा. अमित और उसकी टीम गिरफ्तारी से पहले नौ साल तक इस धंधे को अंजाम देती रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

कैसे हुआ किडनी कांड का खुलासा
24 जनवरी, 2008 को एक व्यक्ति ने मुरादाबाद पुलिस को शिकायत दी थी कि फरीदाबाद के निजी अस्पताल में उसकी एक किडनी निकाल ली गई। इस सूचना पर यूपी पुलिस फरीदाबाद के सद्भावना हास्पिटल पहुंची। यह अस्पताल डा. उपेंद्र कुमार का था। डा. उपेंद्र कुमार से पूछताछ में पता चला कि स्टारमैक्स और लिबर्टी हास्पिटल में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का धंधा चल रहा है। डा. अमित जरूरतमंदों को रुपये का लालच देकर उनकी किडनी निकालकर अपने ग्राहकों को ट्रांसप्लांट करता था। तब यूपी पुलिस ने इसकी सूचना हरियाणा पुलिस को दी। दोनों राज्यों की पुलिस ने एक संयुक्त आपरेशन में गुड़गांव के सेक्टर 23 में छापा मारकर इस धंधे का खुलासा किया। छापे की सूचना मिलने पर डा. अमित फरार हो गया। मामले के मीडिया में उछलने के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। आठ फरवरी को सीबीआई ने इसमें एफआईआर दर्ज की। इसी दिन डा. अमित की लोकेशन नेपाल में पता चली। नेपाल सरकार भी डा. अमित के प्रत्यर्पण के लिए तैयार हो गई। नौ फरवरी 2008 को डा. अमित को सीबीआई ने हिरासत में ले लिया।

फरीदाबाद में सुनाई जा चुकी है दस साल की सजा
किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान फरीदाबाद के अस्पताल में साल 2003, 2004 व 2005 में तुर्की के तीन नागरिकों की मौत हो गई थी। इस ट्रांसप्लांट में डा. अमित, डा. उपेंद्र और जसवंत सिंह शामिल बताए गए थे। फरीदाबाद की अदालत ने 28 फरवरी, 2012 को तीनों आरोपियों को आपरेशन के दौरान बरती गई लापरवाही का दोषी माना। अदालत ने आरोपियों को दस-दस साल की सजा सुनाई। डा. अमित पर दस लाख रुपये व डा. उपेंद्र और जसवंत सिंह पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

किसको किस धारा के तहत मिली कितनी सजा और जुर्माना
दोषी किस आरोप के तहत सजा
1. डा. अमित और डा. उपेंद्र 120 बी (साजिश रचना), 465 (धोखाधड़ी) सात साल सजा एवं 55 लाख जुर्माना
471 और 473 (फर्जी दस्तावेज) 506 (धमकी देना)
2. डा. अमित 506 (जान से मारने की धमकी) दो साल सजा एवं दो लाख जुर्माना
3. डा.उपेंद्र 465 (धोखाधड़ी) दो साल सजा एवं एक लाख जुर्माना
471 (फर्जी दस्तावेज बनाना) दो साल सजा एवं एक लाख जुर्माना
473 (फर्जी दस्तावेज पेश करना ) पांच साल सजा एवं दो लाख जुर्माना
4. डा.अमित, डा. उपेंद्र, अंगों की तस्करी में साढ़े चार साल सजा एवं 20 हजार जुर्माना
ग्यासुद्दीन (लैब टेक्नीशियन),
मनोज और शाहिद (दलाल)
5. डा.अमित (20) टोहो एक्ट दो साल सजा और पांच हजार जुर्माना

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed