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तस्वीरों से बताया, आजादी में क्या थी हरियाणा की भूमिका
Panchkula
Updated Fri, 22 Mar 2013 05:32 AM IST
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पंचकूला। सेक्टर-5 स्थित सिंचाई भवन में लगी तीन दिवसीय प्रदर्शनी में वर्ष 1832 में हरियाणा के नक्शे से लेकर देश की आजादी में हरियाणा की भूमिका और शहीदों की कुर्बानी को कला के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। यहां देश के जांबाजों के हाथों से लिखे पत्र से लेकर उस समय के दस्तावेज भी डिस्पले किए गए थे, जब हरियाणा में भी आजादी की लड़ाई की आग सुलग रही थी। यह प्रदर्शनी 23 मार्च को होने वाले राजगुरु एवं सुखदेव के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आर्चीव्स विभाग हरियाणा की ओर से लगाई गई और विभाग के निदेशक विकास यादव ने इसका उद्घाटन किया। इस मौके पर विभाग की उप निदेशक डा. राजवंती मान भी मौजूद थीं।
इस प्रदर्शनी में देश के विकास में आजादी से पहले और बाद में हरियाणा की भूमिका को बयां किया गया। प्रदर्र्शनी में शहीदों की तस्वीरें और मुगलकाल में उर्र्दू में लिखे दस्तावेज भी सजाए गए थे। इसके अलावा बहादुरशाह जफर के शासनकाल और बहादुरगढ़ के राजा व झज्जर के नवाब का ब्रिटिश सरकार के साथ हुए जमीन करार के दस्तावेज को भी पेश किया गया था। वहीं, शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के खुद के लिखे पत्र, लाहौर में युवाओं को दिए गए महात्मा गांधी के संदेश, आजाद हिंद गर्वनमेंट सहित 1858 में हिसार के उस गांव की तस्वीर को दिखाया गया, जहां के पीपल के पेड़ पर बेगुनाह लोगों को फांसी दी गई थी। इसके अलावा 1927 में लाहौर जेल में भगत सिंह की तस्वीर को भी पेश किया गया।
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इस प्रदर्शनी में देश के विकास में आजादी से पहले और बाद में हरियाणा की भूमिका को बयां किया गया। प्रदर्र्शनी में शहीदों की तस्वीरें और मुगलकाल में उर्र्दू में लिखे दस्तावेज भी सजाए गए थे। इसके अलावा बहादुरशाह जफर के शासनकाल और बहादुरगढ़ के राजा व झज्जर के नवाब का ब्रिटिश सरकार के साथ हुए जमीन करार के दस्तावेज को भी पेश किया गया था। वहीं, शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के खुद के लिखे पत्र, लाहौर में युवाओं को दिए गए महात्मा गांधी के संदेश, आजाद हिंद गर्वनमेंट सहित 1858 में हिसार के उस गांव की तस्वीर को दिखाया गया, जहां के पीपल के पेड़ पर बेगुनाह लोगों को फांसी दी गई थी। इसके अलावा 1927 में लाहौर जेल में भगत सिंह की तस्वीर को भी पेश किया गया।
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