फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   पीयू में नौकरी पानी है तो पहले ही कर लें पीएचडी

पीयू में नौकरी पानी है तो पहले ही कर लें पीएचडी

Sat, 27 Apr 2019 01:19 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 27 Apr 2019 01:19 AM IST
विज्ञापन
पीयू में नौकरी पानी है तो पहले ही कर लें पीएचडी
पीएचडी किए अभ्यर्थी ही पीयू में शिक्षक बन सकेंगे
विज्ञापन

पंजाब विश्वविद्यालय प्रशासन अच्छी रैंकिंग के लिए शुरू कर रहा प्रयास
बिना पीएचडी के अध्यापन कर रहे शिक्षक भी आएंगे इसके दायरे में
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय ने अपनी रैंकिंग में सुधार करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। शुरुआत शिक्षण कार्य से की है। शिक्षण प्रभावी हो इसके लिए शिक्षकों का पीएचडी होना अनिवार्य होगा। नए शिक्षक जो भी पीयू में रखे जाएंगे उनकी शैक्षिक योग्यता में पीएचडी होना जरूरी होगा। इससे पूर्व जिन शिक्षकों ने पीएचडी नहीं की है उनको भी पीयू रिसर्च कराएगा। हालांकि 90 से अधिक शिक्षक पीएचडी कर रहे हैं।
पीयू में शिक्षकों की संख्या एक हजार से अधिक है। गैस फैकल्टी अलग हैं। पिछले पांच साल में पीयू की रैंकिंग में अधिक सुधार नहीं हो पाया है। भारत सरकार की ‘निरफ रैंकिंग’ समेत कई में पीयू पिछड़ा है। उसका एक प्रमुख कारण ये भी रहा कि इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि विभागों में कई शिक्षक पीएचडी नहीं किए हैं। हालांकि कुछ शिक्षकों ने इसके लिए अप्लाई कर दिया है। रैंकिंग आगे न गिरे इसके लिए शिक्षकों का पीएचडी होना अनिवार्य है। सूत्रों का कहना है कि इसी शैक्षिक सत्र से यह नियम लागू होने जा रहा है। नई तैनाती में इस आदेश का पालन होगा।
विज्ञापन


इनसेट
चलेंगे ट्रेनिंग प्रोग्राम
पीयू के शिक्षकों के अलावा कर्मचारियों के लिए भी समय-समय पर ट्रेनिंग प्रोग्राम पीयू प्रशासन कराने की योजना बना रहा है। ज्ञान में वृद्धि के लिए यह प्रोग्राम उपयोगी साबित होंगे। बताया जाता है कि यह प्रशिक्षण जुलाई से शुरू हो जाएंगे। पांच ग्रुप में यह प्रोग्राम होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनसेट
यहां सुधार की जरूरत
कूड़ा प्रबंधन पीयू प्रशासन पूरी तरह नहीं कर पा रहा है। यह भी पीयू की रैंकिंग में बट्टा लगा रहा है। जानकारों का कहना है कि गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग किया जाना है। उसके लिए अलग-अलग बॉक्स भी लगाए गए हैं लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। हैरत तो यह है कि केंद्र सरकार स्वच्छता अभियान चला रहा है लेकिन पीयू में इसका पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग भी कागजों में हो रही है। जानकारों का कहना है कि यदि इसमें सुधार नहीं हुआ तो पीयू की रैंकिंग को फिर बट्टा लगेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed