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हेल् थ सेक्टर के लिए निराश करने वाला बजट
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मायूसी : हेल्थ सेक्टर के लिए निराश करने वाला बजट
बजट में आयुष्मान की तारीफ, लेकिन नहीं बढ़ा आयुष्मान का दायरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आम बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को उम्मीद थी कि कुछ न कुछ जरूर मिलेगा, लेकिन बजट सुनकर लोग निराश हुए। हालांकि, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट में आयुष्मान भारत योजना की तारीफ की। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार इसका दायरा बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें किसी भी ट्रांसप्लांट को शामिल नहीं किया गया है। कई लोग ऐसे हैं, जो लाभार्थी हैं और उनके इलाज में पांच लाख रुपये से भी कम खर्च आना है, लेकिन वे इस स्कीम का फायदा नहीं उठा सकते। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि इन खामियों को बजट में दूर किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त कई ऐसे लोग हैं, जो लाभार्थियों की सूची में ही नहीं है, जबकि वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। लोग चाहते हैं कि एक तो पांच लाख तक के सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान के दायरे में लाए जाएं और गरीब व मध्यवर्गीय लोगों को भी इस स्कीम के दायरे में लाया जाए। इस क्षेत्र में दूसरी बड़ी मांग स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम करने की है। आज स्वास्थ्य बीमा हर दूसरे व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। इस पर करीब 18 फीसदी जीएसटी की दर लग रही है। लोग चाहते हैं कि स्वास्थ्य बीमा को जीएसटी के 12 फीसदी वाले स्लैब में लाना चाहिए था। बजट में जनऔषधि केंद्र की भी बात हुई। अब भी इसमें दवाएं कम मिल रही हैं। दवाओं की संख्या बढ़ाने पर भी कोई विचार नहीं हुआ। ऐसे में हेल्थ सेक्टर केलिए बजट कुछ खास नहीं रहा।
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बजट में आयुष्मान की तारीफ, लेकिन नहीं बढ़ा आयुष्मान का दायरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आम बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को उम्मीद थी कि कुछ न कुछ जरूर मिलेगा, लेकिन बजट सुनकर लोग निराश हुए। हालांकि, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट में आयुष्मान भारत योजना की तारीफ की। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार इसका दायरा बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें किसी भी ट्रांसप्लांट को शामिल नहीं किया गया है। कई लोग ऐसे हैं, जो लाभार्थी हैं और उनके इलाज में पांच लाख रुपये से भी कम खर्च आना है, लेकिन वे इस स्कीम का फायदा नहीं उठा सकते। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि इन खामियों को बजट में दूर किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त कई ऐसे लोग हैं, जो लाभार्थियों की सूची में ही नहीं है, जबकि वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। लोग चाहते हैं कि एक तो पांच लाख तक के सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान के दायरे में लाए जाएं और गरीब व मध्यवर्गीय लोगों को भी इस स्कीम के दायरे में लाया जाए। इस क्षेत्र में दूसरी बड़ी मांग स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम करने की है। आज स्वास्थ्य बीमा हर दूसरे व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। इस पर करीब 18 फीसदी जीएसटी की दर लग रही है। लोग चाहते हैं कि स्वास्थ्य बीमा को जीएसटी के 12 फीसदी वाले स्लैब में लाना चाहिए था। बजट में जनऔषधि केंद्र की भी बात हुई। अब भी इसमें दवाएं कम मिल रही हैं। दवाओं की संख्या बढ़ाने पर भी कोई विचार नहीं हुआ। ऐसे में हेल्थ सेक्टर केलिए बजट कुछ खास नहीं रहा।
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