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अनुबंध कमेटी ने कई अहम फैसले लिए

Wed, 29 Aug 2018 02:04 AM IST
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:04 AM IST
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अनुबंध कमेटी ने कई अहम फैसले लिए
अलग-अलग कचरा इकट्ठा करने वालों को मिलेगा एक-एक हजार रुपये का इनाम
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इनाम के लिए नगर निगम के पास करना होगा आवेदन, कहीं पर नहीं हो रहा कचरे का सेग्रिगेशन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अब सूखा और गीला कचरा इकट्ठा करने वाले 10 लोगों को हर माह एक-एक हजार रुपये इनाम बांटा जाएगा। यह फैसला मंगलवार को नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बैठक में लिया गया। लोगों को सूखा और गीला कचरा इकट्ठा कर कलेक्टर को देना होगा। इसके अलावा 10 उन कलेक्टरों को भी एक-एक हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा, जो कि सूखा और गीला कचरा खुद लोगों को जागरूक कर इकट्ठा करके सही तरीके से कलेक्शन केंद्रों में लेकर आएंगे। जो लोग अपने घरों में अलग-अलग कचरा इकट्ठा करेंगे, उन्हें इनाम लेने के लिए नगर निगम के पास आवेदन करना होगा। निगम की टीम औचक निरीक्षण भी करेगी।
इस समय शहर में सूखा और गीला कचरा कहीं पर भी इकट्ठा नहीं हो रहा है, जबकि स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में इस कैटेगरी में नगर निगम को 5 और 7 स्टार लेने हैं, इसलिए नगर निगम लोगों को लुभाने के लिए यह स्कीम लांच करने का निर्णय लिया है। नगर निगम सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने के लिए नीला और हरा डस्टबिन बांट चुकी है। ये डस्टबीन निशुल्क बांटे गए थे, लेकिन सूखा और गीले कचरे का सेग्रिगेशन शुरू नहीं हुआ।
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पार्कों में पेवर ब्लाक के फुटपाथ नहीं बनेंगे
अब वी-3 रोड के किनारों पर पेवर ब्लाक नहीं लगेंगे। नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बैठक में नई पेवर ब्लाक पालिसी को मंजूर कर दिया गया है। यह पालिसी अधिकारियों की कमेटी ने बनाई थी। इसके तहत अनुबंध कमेटी ने यह भी पास किया है कि अब पार्कों के अंदर फुटपाथ भी पेवर ब्लाक के नहीं बनेंगे। फुटपाथ कंकरीट और लाल मिट्टी के पत्थरों के बनाए जाएंगे। पेवर ब्लाक पार्कों के अंदर पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। पेवर ब्लाक लगने से बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है, जिस कारण शहर का ग्राउंड लेवल भी गिरता जा रहा है। यह भी फैसला लिया गया है कि वी-4, 5 और वी-6 रोड के किनारों पर जो पेवर ब्लाक लगेंगे भी वह छह फुट ज्यादा की चौड़ाई के नहीं लगाए जाएंगे। इसके अलावा जो छोटे पार्किंग स्थल है, जहां पर रोड को कारपेट करने वाली मशीनें नहीं जा सकतीं, वहां पर कंकरीट का ही काम किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि जो पेवर ब्लाक अब लगेंगे उन सभी पर आईएसआई मार्क होना चाहिए। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि अगर कोई पेवर ब्लाक को तोड़ता है तो जिस रेट पर पर पेवर ब्लाक लगाए गए हैं, उससे दोगुना रेट तोड़ने वाले डिफाल्टर से चार्ज किया जाए। मालूम हो कि कई बार केबल तार डालते हुए निजी एजेंसियों की ओर से पेवर ब्लाक तोड़ दिए जाते हैं।
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यह भी निर्णय लिया गया है कि जहां पर भारी वाहन चलते हैं, वहां पर 80 एमएम के पेवर ब्लाक लगाए जाएं, जबकि जहां पर छोटे वाहनों की गतिविधि है, वहां पर 60 एमएम के पेवर ब्लाक लगाए जाने चाहिए। मालूम को कई जगह पर सड़क किनारे पेवर ब्लाक पर लोग अपने वाहन भी पार्क करते हैं। अब यह पेवर ब्लाक की पालिसी चर्चा के लिए सदन की बैठक में आएगी।


पेड़ गोद लेने का प्रस्ताव स्थगित हुआ, पेड़ों का सर्वे करेगा फारेस्ट रिसर्च संस्थान
बागवानी विभाग की ओर से पेड़ को पब्लिक के गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन यह प्रस्ताव स्थगित कर दिया। इस प्रस्ताव के साथ प्रेम गर्ग का पत्र भी संलग्न था, जिसमें गर्ग ने सेक्टर-7-8 की विभाजक सड़क के पास लगे 70 नंबर पेड़ को गोद लेने का आवेदन किया था। इसके बदले गर्ग ने 50 हजार रुपये भी अदा करने की इच्छा जताई थी, जिसके बदले पेड़ पर अपना नाम भी लिखवाने की इच्छा जताई, लेकिन सदस्यों को यह बात पसंद नहीं आई, जिस कारण यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका।
इसके बाद निर्णय लिया गया है कि पंचकूला की तर्ज पर शहर के पेड़ों का देहरादून का फारेस्ट रिसर्च संस्थान सर्वे करेगा। शहर में दीमक लगे चुके और बीमार पेड़ों की जानकारी मिलने के साथ-साथ शहर की मिट्टी की भी जांच करवाई जाएगी। इसके अलावा प्रशासन को भी कहा जाएगा कि इस तरह का सर्वे सरकारी संस्थानों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य स्थलों में लगे पेड़ों के लिए भी करवाया जाए ताकि पेड़ों का ट्रीटमेंट एक साथ हो सके। बीमार और दीमक लगे पेड़ों के ट्रीटमेंट के लिए लोगों के सहयोग से पालिसी बनाई जाएगी। बैठक में तय हुआ कि पेड़ गोद देने के बाद किसी को भी उस पर नाम लिखने की मंजूरी नहीं दी जाएगी। बैठक में पूर्व मेयर राज बाला मलिक, गुरबख्श रावत, अनिल दूबे, फरमिला देवी और हीरा नेगी ने भी भाग लिया। इसके साथ ही कमेटी ने 21 हजार रुपये प्रति माह के भुगतान के साथ मरे हुए जानवरों के शवों को उठाने का ठेका अलाट करने का भी फैसला लिया।


सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर को भी मिले सरकारी वाहन
एसडीओ के लिए दो बोलेरो गाड़ियां खरीदने का प्रस्ताव आया तो सदस्यों ने मामला उठाया कि सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर को भी गाड़ियां मिलनी चाहिए। इस पर कमिश्नर ने भी अपनी सहमति दे दी। ऐसे में निर्णय लिया गया कि अगले माह होने वाली बैठक में पूरे नियम चेक करके सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए गाड़ियां खरीदने का प्रस्ताव पास होने केलिए लाया जाएगा। अनुबंध कमेटी की सदस्य गुरबख्श रावत का कहना है कि जब एसडीओ स्तर के अधिकारी को सरकारी गाड़ी मिल सकती है तो सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर को क्यों नहीं। इसके साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए 45 लाख रुपये का प्रस्ताव पास किया गया, जबकि पिछले सर्वेक्षण में 35 लाख रुपये का प्रस्ताव पास किया गया था।


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