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1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों में महिलाएं भी शामिल

Panchkula bureauPanchkula bureau Updated Thu, 14 Feb 2019 02:27 AM IST
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1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों में महिलाएं भी थीं शामिल
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आजादी की पहली क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों की उम्र का भी पता लगा, 19 से 52 वर्ष के थे सभी

- तीन मेथड से दांतों व हड्डियों की हुई जांच, मारे गए सैनिकों में 97 फीसदी पुरुष, तीन फीसदी थीं महिलाएं
- अमृतसर केअजनाला में मिले मानव कंकालों की जांच में बड़ी कामयाबी मिलने पर अमेरिका ने प्रो. जेएस सहरावत को बुलाया
- अमेरिकन एकेडमी ऑफ फोरेंसिक साइंसेज में 5000 वैज्ञानिकों को प्रो. सहरावत समझाएंगे रिसर्च की कामयाबी की कहानी


सुशील कुमार
चंडीगढ़। 1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों में महिलाएं भी शामिल थीं। हालांकि इनकी संख्या क्रांति के दौरान मारे गए सैनिकों की कुल संख्या की तीन फीसदी ही थी। इसका खुलासा पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के प्रोफेसर जेएस सहरावत की जांच में हुआ है। प्रो. सहरावत ने कहा कि उन्होंने तीन मेथड से अब तक अपनी जांच की है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि 1857 की क्रांति में शहीद होने वालों में महिलाएं भी शामिल थीं। हालांकि यह बात पुख्ता तौर पर अंतिम जांच में ही प्रमाणित होगी। ऐसे में इन तीन फीसदी नमूनों की एक जांच और होगी। यह जांच डीएनए के अलावा व्हूल जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए की जाएगी। इसके अलावा 97 फीसदी मारे गए सैनिक पुरुष पाए गए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मारे गए सैनिकों की आयु 19 से 52 साल के मध्य थी। फोरेंसिक तरीकों से हुई जांच के तहत प्रो. सहरावत को बड़ी कामयाबी हासिल हुई तो इसकी कहानी सुनने केलिए उन्हें अमेरिका से बुलावा आया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ फोरेंसिक साइंसेज की ओर से 18 से 23 फरवरी के बीच सम्मेलन कराया जा रहा है, जिसमें दुनिया के टॉप 5000 वैज्ञानिक भाग लेंगे। प्रो. सहरावत भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। उनकी यात्रा का सारा खर्च भारत सरकार वहन कर रही है।
बता दें कि वर्ष 2014 में अमृतसर के पास अजनाला के कुएं में मिले 282 सैनिकों के मानव कंकाल व नौ हजार दांतों की जांच प्रो. सहरावत ने तीन तरीकों से की। इसमें एक्स-रे रेडियोग्राफी व पल्प टू एरिया रेस्यू, एलिमेंट एनालिसिस और ऑडेंटोमेट्रिक्स तरीका अपनाया। इसी के जरिए सैनिकों की आयु व जेंडर का पता लगा। प्रो. सहरावत ने इन सैनिकों के नाम इंग्लैंड की सरकार से मांगे हैं ताकि उनके डीएनए की जांच कर यह कंकाल उनके परिजनों को सौंपे जा सकें। मालूम हो कि टेंथ ऑफ मई अनटिल फाल ऑफ डेथ पुस्तक के जरिए अमृतसर के अजनाला में कुएं की खोदाई हुई थी। उसी में यह कंकाल मिले हैं। ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर ने जो भी बात अपनी पुस्तक में लिखी वह सच साबित हुई। प्रो. सहरावत इसे पूरे मामले से जुड़े रिसर्च को दुनियाभर के वैज्ञानिकों के सामने मौखिक प्रस्तुति देकर बताएंगे।

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