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यह चीफ जस्टिस की कोर्ट हे, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होती

Tue, 05 Feb 2019 02:02 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Tue, 05 Feb 2019 02:02 AM IST
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यह चीफ जस्टिस की कोर्ट हे, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होती
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ध्वनि प्रदूषण केस में नहीं पहुंचे यूटी व केंद्र के वकील, नाराज चीफ जस्टिस बोले
यह मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट है, यहां लापरवाही बर्दाश्त नहीं होती

यूटी व केंद्र के वकीलों के पैनल को भंग करने के आदेश, माफी मांगने पर आदेश लिए वापस

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र और चंडीगढ़ के वकीलों की गैर मौजूदगी पर चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा कि यह चीफ जस्टिस की अदालत है, यहां लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाती। एक बार तो चीफ जस्टिस ने केंद्रीय मंत्रालय और चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार को केंद्र और चंडीगढ़ के वकीलों के पूरे पैनल को ही भंग करने के आदेश दे दिए। फिर केंद्र और प्रशासन की ओर से वकील पेश हुए और इसके लिए माफी मांगी। चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसल पंकज जैन के माफी मांगने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश वापस लेते हुए कहा कि जब ध्वनि प्रदूषण, अश्लील गानों, शादी और समारोहों में फायरिंग के मामलों पर सुनवाई हो रही हो तो आपकी मौजूदगी अनिवार्य है। चीफ जस्टिस ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से यही देख रहे हैं कि केंद्र और चंडीगढ़ प्रशासन के पैनल के वकील उनकी अदालत में पेश होने में लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे में इस तरह के आदेश जारी करने की नौबत आई। चंडीगढ़ की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसल पंकज जैन के काफी आग्रह किए जाने पर हाईकोर्ट ने प्रशासन और केंद्र सरकार को इस मामले में जवाब दायर करने का एक अंतिम अवसर देते हुए कहा कि भविष्य में वह इस तरह का व्यव्हार बर्दाश्त नहीं करेंगे।

क्या हर काम के लिए हाईकोर्ट के आदेशों का ही करते रहोगे इंतजार
ध्वनि प्रदूषण को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि वह देख रहे हैं कि हर छोटी-बड़ी बात को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिकायें दायर की जा रही हैं। इस मामले को लेकर याचिका दायर करने वाले पहले यह बताएं कि उन्होंने इस विषय को लेकर क्या किया। बस सभी की कोशिश है कि हर बात के लिए हाईकोर्ट से आदेश ले लिए जाएं। जनहित याचिकाएं दायर कर हाईकोर्ट के आदेशों का इंतजार करने की बजाय खुद भी लोगों को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
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टू-व्हीलर्स और फोर व्हीलर्स चलाने वाले सभी पढ़े-लिखे, क्या वह नहीं जानते क्या है कानून
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को कहा गया कि ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण करने वाले सभी पढ़े-लिखे लोग हैं और टू-व्हीलर्स और फोर व्हीलर्स चलाने वालों को अनपढ़ नहीं कह सकते। अब ऐसे लोगों को क्या जागरूक किया जाए। लोग अगर अपनी जिम्मेदारी समझें तो आधे मामले ऐसे ही ख़त्म हो जाएंगे।
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