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नवाबों के समय के सिक्के की बेेगम भी है कायल

Mon, 31 Dec 2018 01:52 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Mon, 31 Dec 2018 01:52 AM IST
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नवाबों के समय के सिक्के की बेेगम भी है कायल
नोट- संबधित फोटो ट्रैक में सेव
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नवाबों के समय के सिक्कों को देख बेगम भी हुईं कायल

- मलेरकोटला के शेख इफ्तिखार हुसैन के पास हैं 2700 ईसा पूर्व के बाद अंग्रेजों और नवाबों के जमाने के बेशुमार सिक्के


संजीव पंगोत्रा
चंडीगढ़। नवाबों के समय के दुर्लभ सिक्के और भार तोलने वाले सेर को विरासत की तरह शेख इफ्तिखार हुसैन आज भी संभाल कर रखे हुए हैं। इनके पास 2700 ईसा पूर्व के बाद अंग्रेजों और नवाबों के जमाने के बेशुमार सिक्के हैं। वहीं वर्ष 1886 से लेकर 1900 तक के वजन तोलने वाले वट्टे जिन्हें ‘सेर ’ बोल जाता था, वह भी इफ्तिखार के संग्रहालय में शामिल हैं। पंजाब कला भवन सेक्टर- 16 में रविवार को मलेरकोटला उत्सव को मनाया गया। इसमें मलेरकोटला से खास तौर पर शेख इफ्तिखार हुसैन भी पहुंचे जिन्होंने नवाबों के समय की विरासत को अपने पास काफी मश्क्कत से संभाल कर रखा हुआ है। मलेरकोटला के आखिरी नवाब इफ्तिखार की तीसरी बेगम मुनवर भी इन सिक्कों को देखकर काफी खुश हुई।
बेगम मुनवर मलेरकोटला की बड़ी हवेली में रहती हैं। शेख इफ्तिखार हुसैन ने बेगम को जब नवाबों के समय के सिक्के और वजन दिखाए तो वह भी इस संग्रहालय को देखकर कायल हुए बिना नहीं रह पाई और उनकी खूब तारीफ की। इसके अलावा इन्हें देखकर पंजाब कला भवन में उपस्थित हर कोई हैरान था। लोगाें को अपने संग्रहालय को दिखाते हुए उनकी आंखाें में चमक साफ दिखाई दे रही थी।
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सब्जी की रेहड़ी से मिला पहला सिक्का
मूल रूप से मलेरकोटला के रहने वाले शेख इफ्तिखार हुसैन पेशे से इंटीरियर डेकोरेटर हैं। उन्हाेंने बताया कि 1974 में जब वह 7वीं कक्षा में पढ़ते थे तो उनकेपिता शेख मुख्तार की लाल बाजार में सब्जी की दुकान थी। वे स्कूल से आने के बाद दुकान चले जाते थे। इसी दौरान एक दिन वहां अंग्रेजों के जमाने के दो सिक्के ग्राहक की ओर मिल गए, जिन्हें उन्होंने काफी मश्क्कत करने के बाद पिता से पाया। इसके बाद उन पर सिक्के जोड़ने का जनून सवा हो गया और पुराने सिक्कों को इकट्ठा करते चले गए।
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तीन नवाबाें के काल के सिक्के
इफ्तिखार हुसैन ने पुराने सिक्को के लिए बर्जुगाें, अपने रिश्तेदाराें और सुनाराें से संपर्क किया। इनके संग्रहालय में मलेरकोटला के तीन नवाबों के काल के सिक्के मौजूद हैं। इनमें नवाब सिंकदर अली खान, इब्राहिम अली खान और नवाब अहमद अली खान के शासन काल के सिक्के शामिल हैं। इनमें 1759-1947 तक के सिक्के हैं।


वजन तोलने वाले वट्टे ‘सेर’
शेख इफ्तिखार हुसैन ने मुगल शासन काल से जुड़े वजन तोलने वाले वट्टे यानि सेर भी संभाल कर रखे हुए हैं। इनमें 1886 के 10 सेर, 1880 के 2 सेर, 1900 के 1 सेर और आधा सेर भी शामिल हैं।

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