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डीसी को फिर मिली पॉवर
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डीसी की पावर लौटी.. शराब माफिया पर कसेगा शिकंजा
सबहेड
नए एडवाइजर ने डीसी मंदीप बराड़ को सौंपी एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी
लिकर लॉबी पर एक्शन लेने की वजह से पूर्व डीसी अजीत बाला जोशी से छीना था एक्साइज डिपार्टमेंट
अनुभव अवस्थी
चंडीगढ़। नए एडवाजर मनोज परिदा ने कार्यभार संभालने के बाद एक बड़ा फैसला लिया है। शराब माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एडवाइजर ने एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट को एक बार फिर डीसी मनदीप बराड़ सौंप दिया है। इससे जहां लिकर लॉबी पर एक्शन लेने की पावर दोबारा डीसी के पास आ गई है। वहीं, एडवाइजर के इस फैसले से शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
नए साल से पूर्व एडवाइजर मनोज परिदा ने यह महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन के सबसे अहम विभाग एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट को यूटी प्रशासन के अब तक के सबसे ताकतवर आईएएस माने जाने वाले पर्यटन सचिव जितेंद्र यादव से लेकर वापस डीसी के हवाले कर दिया है। इसके लिए आनन-फानन में चंडीगढ़ प्रशासन के पर्सनल डिपार्टमेंट की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
इस वजह से डीसी को नहीं मिल पाया था चार्ज
गौरतलब है कि 26 जून को चंडीगढ़ के पूर्व डिप्टी कमिश्नर अजीत बालाजी जोशी से अचानक एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट वापस ले लिया गया था। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के आदेश पर यह डिपार्टमेंट यूटी कैडर के अब तक के सबसे पावरफुल आईएएस जितेंद्र यादव को दिया गया था। डीसी मनदीप बराड़ के आने के बाद से लगातार यह कवायद चल रही थी कि डीसी को एक बार फिर एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट का चार्ज मिल जाएगा लेकिन पूर्व एडवाइजर परिमल राय के रहते ऐसा नहीं हो सका।
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काफी पावरफुल है एक्साइज डिपार्टमेंट
चंडीगढ़ प्रशासन हर साल 1500 करोड़ रुपये टैक्स के तौर पर कलेक्ट करता है इसलिए यह विभाग प्रशासनिक स्तर पर सबसे पावरफुल है। चंडीगढ़ में लिकर की सेल-परचेज से लेकर बिजनेस पर पूरा कंट्रोल इसी डिपार्टमेंट के पास रहता है। प्रशासन हर साल एवरेज 1500 करोड़ रुपये टैक्स के तौर पर इकट्ठा करता है। इस साल ही करीब 1900 करोड़ रुपये इकट्ठे करने का टारगेट मिला है। इसमें अकेले एक्साइज डिपार्टमेंट से 600 करोड़ रुपये एकत्रित किए जाते हैं।
ताकतवर अफसरों का घटेगा कद, एस्टेट ऑफिस में बदलाव की आहट
यूटी प्रशासन में फेरबदल की आहट पहले ही अफसरों को लग गई थी। यही वजह रही कि एडवाइजर के आते ही पर्यटन सचिव जितेंद्र यादव अवकाश पर चले गए हैं। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन में नए साल में कई और चौंकाने वाले निर्णय लिए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। सूत्रों की मानें तो एस्टेट ऑफिस में तैनात अधिकारियों से डीसी संतुष्ट नही हैं। नए साल में एस्टेट ऑफिस में तैनात अधिकारियों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। वहीं यूटी प्रशासन में अब तक ताकतवर रहे अफसरों को जमीनी हकीकत दिखाने के लिए कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि कई अफसरों के पास महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट तो हैं, लेकिन वह केवल खानापूर्ति करने में जुटे रहते हैं। इनकी वजह से सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे हुई थी जोशी को कमजोर करने की साजिश
पहले जीएसटी एक्ट के तहत कमिश्नर अपील की जिम्मेदारी 4 जून को बीएल शर्मा को सौंप दी गई थी, जबकि इसी दिन एडिशनल कमिश्नर अपील की जिम्मेदारी एडीसी सचिन राणा को दी गई थी।
लिकर लॉबी के दबाव में लिया था निर्णय
सूत्रों की मानें तो लिकर लॉबी के दबाव में पूर्व में डीसी अजीत जोशी से एक्साइज डिपार्टमेंट छीना गया था। इसकी वजह पंजाब और हरियाणा की तरफ से अवैध शराब तस्करी को रोकने के लिए मेन एंट्री की तरफ ही यूटी चंडीगढ़ ने शराब के ठेके खोल दिए। इसका भी नुकसान दोनों राज्यों के साथ लगते एरिया में लिकर लॉबी को हो रहा था। इसके अलावा बॉटलिंग प्लांट से बाहर शराब तस्करी होने के कई मामले पिछले साल सामने आए। इसके अलावा बॉटलिंग प्लांट पर भी सख्ती कर दी गई और एक्साइज इंस्पेक्टरों की रेगुलर ड्यूटी प्लांट में लगा दी गई। इसके चलते लिकर लॉबी के दबाव में चार्ज को यूटी कैडर के अधिकारी को दे दिया गया था।
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नए एडवाइजर ने डीसी मंदीप बराड़ को सौंपी एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी
लिकर लॉबी पर एक्शन लेने की वजह से पूर्व डीसी अजीत बाला जोशी से छीना था एक्साइज डिपार्टमेंट
अनुभव अवस्थी
चंडीगढ़। नए एडवाजर मनोज परिदा ने कार्यभार संभालने के बाद एक बड़ा फैसला लिया है। शराब माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एडवाइजर ने एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट को एक बार फिर डीसी मनदीप बराड़ सौंप दिया है। इससे जहां लिकर लॉबी पर एक्शन लेने की पावर दोबारा डीसी के पास आ गई है। वहीं, एडवाइजर के इस फैसले से शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
नए साल से पूर्व एडवाइजर मनोज परिदा ने यह महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन के सबसे अहम विभाग एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट को यूटी प्रशासन के अब तक के सबसे ताकतवर आईएएस माने जाने वाले पर्यटन सचिव जितेंद्र यादव से लेकर वापस डीसी के हवाले कर दिया है। इसके लिए आनन-फानन में चंडीगढ़ प्रशासन के पर्सनल डिपार्टमेंट की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
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इस वजह से डीसी को नहीं मिल पाया था चार्ज
गौरतलब है कि 26 जून को चंडीगढ़ के पूर्व डिप्टी कमिश्नर अजीत बालाजी जोशी से अचानक एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट वापस ले लिया गया था। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के आदेश पर यह डिपार्टमेंट यूटी कैडर के अब तक के सबसे पावरफुल आईएएस जितेंद्र यादव को दिया गया था। डीसी मनदीप बराड़ के आने के बाद से लगातार यह कवायद चल रही थी कि डीसी को एक बार फिर एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट का चार्ज मिल जाएगा लेकिन पूर्व एडवाइजर परिमल राय के रहते ऐसा नहीं हो सका।
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काफी पावरफुल है एक्साइज डिपार्टमेंट
चंडीगढ़ प्रशासन हर साल 1500 करोड़ रुपये टैक्स के तौर पर कलेक्ट करता है इसलिए यह विभाग प्रशासनिक स्तर पर सबसे पावरफुल है। चंडीगढ़ में लिकर की सेल-परचेज से लेकर बिजनेस पर पूरा कंट्रोल इसी डिपार्टमेंट के पास रहता है। प्रशासन हर साल एवरेज 1500 करोड़ रुपये टैक्स के तौर पर इकट्ठा करता है। इस साल ही करीब 1900 करोड़ रुपये इकट्ठे करने का टारगेट मिला है। इसमें अकेले एक्साइज डिपार्टमेंट से 600 करोड़ रुपये एकत्रित किए जाते हैं।
ताकतवर अफसरों का घटेगा कद, एस्टेट ऑफिस में बदलाव की आहट
यूटी प्रशासन में फेरबदल की आहट पहले ही अफसरों को लग गई थी। यही वजह रही कि एडवाइजर के आते ही पर्यटन सचिव जितेंद्र यादव अवकाश पर चले गए हैं। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन में नए साल में कई और चौंकाने वाले निर्णय लिए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। सूत्रों की मानें तो एस्टेट ऑफिस में तैनात अधिकारियों से डीसी संतुष्ट नही हैं। नए साल में एस्टेट ऑफिस में तैनात अधिकारियों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। वहीं यूटी प्रशासन में अब तक ताकतवर रहे अफसरों को जमीनी हकीकत दिखाने के लिए कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि कई अफसरों के पास महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट तो हैं, लेकिन वह केवल खानापूर्ति करने में जुटे रहते हैं। इनकी वजह से सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे हुई थी जोशी को कमजोर करने की साजिश
पहले जीएसटी एक्ट के तहत कमिश्नर अपील की जिम्मेदारी 4 जून को बीएल शर्मा को सौंप दी गई थी, जबकि इसी दिन एडिशनल कमिश्नर अपील की जिम्मेदारी एडीसी सचिन राणा को दी गई थी।
लिकर लॉबी के दबाव में लिया था निर्णय
सूत्रों की मानें तो लिकर लॉबी के दबाव में पूर्व में डीसी अजीत जोशी से एक्साइज डिपार्टमेंट छीना गया था। इसकी वजह पंजाब और हरियाणा की तरफ से अवैध शराब तस्करी को रोकने के लिए मेन एंट्री की तरफ ही यूटी चंडीगढ़ ने शराब के ठेके खोल दिए। इसका भी नुकसान दोनों राज्यों के साथ लगते एरिया में लिकर लॉबी को हो रहा था। इसके अलावा बॉटलिंग प्लांट से बाहर शराब तस्करी होने के कई मामले पिछले साल सामने आए। इसके अलावा बॉटलिंग प्लांट पर भी सख्ती कर दी गई और एक्साइज इंस्पेक्टरों की रेगुलर ड्यूटी प्लांट में लगा दी गई। इसके चलते लिकर लॉबी के दबाव में चार्ज को यूटी कैडर के अधिकारी को दे दिया गया था।