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महिलाओ करी जिम्मेदारी
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विशेषज्ञ बोले, ऐसे कैसे बचेगी खेती
पंजाब कला भवन में फार्मर इज ए रेसलर आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पिछले तीस से चालीस साल में पहले पचास फीसदी से ज्यादा राजनीतिक लोग थे, वह कृषि से आते थे। पहले मध्यवर्ग के लोग तेरह फीसदी थी। ऐसे में देश की कमान ही जब कारपोरेट हाथों में चली गई तो खेती की ओर कौन देखेगा। यह कहना है कृषि एक्सपर्ट प्रोफेसर सुच्चा सिंह गिल का। वह पंजाब कला भवन में आयोजित फार्मर इज ए रेसलर के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में हजारों किसानों ने आत्महत्याएं की हैं। वास्तव में खेती की स्थिति इस वजह से खराब हो चुकी है क्योंकि प्रोड्यूस की कीमत इतनी ज्यादा हो चुकी है कि किसान उस स्तर तक ही नहीं पहुंच पाता है।
पंजाब ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नेताओं के पहले खेत हुआ करते थे और अब बेशक पंजाब के कुछ नेता खेती का बैकग्राउंड दिखाते हैं पर उसमें से ज्यादातर के बिजनेस एकदम अलग हैं। सुच्चा सिंह गिल ने बताया कि पहले कितने किसान होते थे और अब किसानों के लेवल में कितना बदलाव आ चुका है। उन्होंने कहा कि खेती के लिए जमीन कम है और खेती के लिए प्रोड्यूस की कीमत ज्यादा। ऐसी स्थिति में किसान के लिए मुश्किलें पैदा हो चुकी हैं।
इस मौके पर लेखक बलदेव सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाबी लेखन खेती का सपोर्ट कर रही है। इस मौके पर ठुकराल एंड टागरा ने कहा कि वास्तव में किसान एक रेसलर की तरह ही होता है। इस मौके पर दीवान माना ने कहा कि पंजाब अब दिखावे की ओर चल पड़ा है जिसकी वजह से समस्याएं पैदा हो गई हैं।
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पंजाब कला भवन में फार्मर इज ए रेसलर आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पिछले तीस से चालीस साल में पहले पचास फीसदी से ज्यादा राजनीतिक लोग थे, वह कृषि से आते थे। पहले मध्यवर्ग के लोग तेरह फीसदी थी। ऐसे में देश की कमान ही जब कारपोरेट हाथों में चली गई तो खेती की ओर कौन देखेगा। यह कहना है कृषि एक्सपर्ट प्रोफेसर सुच्चा सिंह गिल का। वह पंजाब कला भवन में आयोजित फार्मर इज ए रेसलर के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में हजारों किसानों ने आत्महत्याएं की हैं। वास्तव में खेती की स्थिति इस वजह से खराब हो चुकी है क्योंकि प्रोड्यूस की कीमत इतनी ज्यादा हो चुकी है कि किसान उस स्तर तक ही नहीं पहुंच पाता है।
पंजाब ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नेताओं के पहले खेत हुआ करते थे और अब बेशक पंजाब के कुछ नेता खेती का बैकग्राउंड दिखाते हैं पर उसमें से ज्यादातर के बिजनेस एकदम अलग हैं। सुच्चा सिंह गिल ने बताया कि पहले कितने किसान होते थे और अब किसानों के लेवल में कितना बदलाव आ चुका है। उन्होंने कहा कि खेती के लिए जमीन कम है और खेती के लिए प्रोड्यूस की कीमत ज्यादा। ऐसी स्थिति में किसान के लिए मुश्किलें पैदा हो चुकी हैं।
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इस मौके पर लेखक बलदेव सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाबी लेखन खेती का सपोर्ट कर रही है। इस मौके पर ठुकराल एंड टागरा ने कहा कि वास्तव में किसान एक रेसलर की तरह ही होता है। इस मौके पर दीवान माना ने कहा कि पंजाब अब दिखावे की ओर चल पड़ा है जिसकी वजह से समस्याएं पैदा हो गई हैं।
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