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परेशानियों को आध्यात्म से किस प्रकार जोड़ें इस पर हो चर्चा: आनंदमूर्ति गुरुमां

Fri, 16 Nov 2018 01:39 AM IST
Updated Fri, 16 Nov 2018 01:39 AM IST
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परेशानियों को आध्यात्म से किस प्रकार जोड़ें इस पर हो चर्चा: आनंदमूर्ति गुरुमां

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एग्रेशन और डिप्रेशन समाज में सबसे बड़ी समस्या
सेक्टर-40 के ग्राउंड में पत्रकार वार्ता के दौरान बोलीं आनंदमूर्ति गुरुमां
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एग्रेशन और डिप्रेशन एक बड़ी समस्या बन गई है। इगो का नंगा नाच हो रहा है। इसे कोई समझाने वाला नहीं है। परेशानियों को आध्यात्म से किस प्रकार से जोड़ा जाए, इस पर चर्चा करने की जरूरत है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई नहीं कराई जाती। आध्यात्मिकता के बारे में पढ़ाई जरूरी है। बार की भरमार हो गई है। चंडीगढ़ में भी बार खुले हैं। ये सब अक्ल को मारने का इंतजाम है। अक्ल सुधारने की जरूरत है। यह बात प्रवचन से पहले आनंदमूर्ति गुरुमां ने सेक्टर-40 के ग्राउंड में प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य पशु जैसा व्यवहार कर रहा है। पाश्विकता से इंसान कैसे बने इस पर हम अपने प्रवचनों के दौरान चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि लोग मनोबल से हीन हो रहे हैं। एमडी कर चुके डॉक्टर फांसी लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मबल और बुद्धिबल के बिना कैसे जीया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोग यह कहते हैं कि बाहर के देशों जैसे कनाडा, अमेरिका में लोग सुखी हैं। ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां (भारत) से बाहर गए लोग भी दुखी हैं। उस दुख को दूर कैसे करें उस पर चर्चा होगी।


भौतिकवाद की लालसा मनुष्य जीवन को समाप्त कर रही है
गुरुमां ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली और भागदौड़ व तनाव भरे जीवन की सबसे बड़ी समस्या एग्रेशन व डिप्रेशन है। भौतिकवाद की लालसा मनुष्य जीवन को समाप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि वह अपने प्रवचनों के माध्यम से कसी एक संप्रदाय को बढ़ावा देने की बजाय समाज में फैली बुराइयों और समस्याओं पर ही चर्चा करती हैं, ताकि लोग इसके प्रति जागरूक होकर शांत जीवन व्यतीत कर सकें। अपने प्रवचन के दौरान उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि आज के युग में नौजवान भारी भरकम डिग्रियां हासिल करने के बाद भी अनपढ़ों जैसा व्यवहार करते हैं। युवा अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। शिक्षण संस्थाओं में डिग्रियां तो मिल रही हैं, लेकिन बेहतर इंसानों का निर्माण नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों में बढ़ रही इगो व तनाव न केवल कई बीमारियों का घर है, बल्कि यह कई बड़ी घटनाओं का कारण भी बन रहा है। आनंदमूर्ति गुरुमां ने कहा कि जब तक व्यक्ति मनोबल व आत्मबल की पहचान नहीं करेगा, तब तक वह अपना व समाज का कल्याण नहीं कर सकता है। प्रवचनों की अमृतवर्षा 18 नवंबर तक चलेगी।
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