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बढ़ रही बेरोजगारी, नौकरी वाले को ही रिटायरमेंट के बाद दी जा रही नौकरी

Wed, 20 Feb 2019 01:55 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Wed, 20 Feb 2019 01:55 AM IST
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बढ़ रही बेरोजगारी, नौकरी वाले को ही रिटायरमेंट के बाद दी जा रही नौकरी
प्रिंसिपल के री-अप्वाइंटमेंट फैसले से सिंडिकेट कठघरे में, सीनेट बैठक में घमासान के आसार
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- सीनेट सदस्यों का मत, री-अप्वाइंटमेंट से शिक्षकों का मारा जा रहा हक
- सिंडिकेट के इस निर्णय के खिलाफ विशेष सत्र बुलाने की तैयारी

सुशील कुमार
चंडीगढ़। पीयू सिंडिकेट ने सोमवार को एक और कॉलेज के प्रिंसिपल का री-अप्वाइंटमेंट कर दिया। हैरत की बात है कि पीयू के संविधान व यूजीसी के आदेश में साफ लिखा है कि प्राचार्य का री-अप्वाइंटमेंट उसी पद पर सेवानिवृत्ति के बाद नहीं होगा। बावजूद इसके री-अप्वाइंटमेंट कर दी गई। इस फैसले के खिलाफ सीनेट के सदस्य मुखर हो रहे हैं। हर शिक्षक की मंशा होती है कि वह अपनी सेवा में कॉलेज प्रिंसिपल बने, लेकिन उस पद पर सेवानिवृत प्रिंसिपल की दोबारा तैनाती कर दी जाए तो ऐसे में उनका हक मारा जा रहा है। ऐसे फैसलों के खिलाफ सीनेट सदस्यों में आक्रोश है। वह विशेष सत्र बुलाकर इस पर बहस चाहते हैं। उनका कहना है कि पीयू का संविधान व यूजीसी के आदेश बड़े हैं या फिर सिंडिकेट के निर्णय।
जानकारों की मानें तो वर्ष 2008 में री-अप्वाइंटमेंट की नींव रखी गई। तत्कालीन वीसी प्रो. आरसी सोबती ने प्रिंसिपल की सेवानिवृत्ति के बाद री-अप्वाइंटमेंट उम्र तीन साल बढ़ा दी। वर्ष 2012 में तत्कालीन वीसी प्रो. एके ग्रोवर ने भी सबसे पहला आदेश री-अप्वाइंटमेंट को लेकर ही किया था। उन्होंने तीन साल के कार्यकाल को बढ़ाकर पांच कर दिया। उस दौरान कुछ विरोध हुआ, लेकिन बाद में शांत हो गया। तब से लेकर यह परंपरा चली आ रही है। पंजाब सरकार ने भी सेवानिवृत की आयु 60 साल रखी है। जानकारों का कहना है कि नियम बनें हैं लेकिन पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण वर्ष 2008 से लेकर अब तक प्रिंसिपल बनने के लिए लाइन में लगे दर्जनों शिक्षकों के ख्वाब टूट गए। उनका हक मारा गया। आदेश ये भी है कि री-अप्वाइंटमेंट उसी प्रिंसिपल का होगा जो कोर्ट तक न पहुंचे लेकिन यहां इसका भी पालन नहीं हुआ। री अप्वायमेंट किए गए प्रिंसिपल ने न केवल कोर्ट से स्टे लिया बल्कि सिंडिकेट ने उन्हें री अप्वायमेंट का लेटर भी थमाया। री-अप्वाइंटमेंट के बाद सभी की सेवाएं वहीं होती हैं।
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इनसेट---
एक प्रिंसीपल की सेलरी में रखे जा सकते हैं तीन शिक्षक
जानकारों का कहना है कि डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल या कोई प्रोफेसर जब रिटायर होते हैं तो तब तक उनकी सेलरी दो से 2.50 लाख रुपये तक पहुंच चुकी होती है। सेवानिवृत्ति के बाद यदि उनका री-अप्वाइंटमेंट होता है तो उन्हें पेंशन को छोड़कर बाकी वेतन वही प्रोफेसर या प्रिंसिपल वाला मिलता है। बताया जाता है कि सेवानिवृत्त के बाद इनकी पेंशन ही एक लाख होती है। ऐसे में कुल वेतन में से यह रकम निकाल दी जाती है। बाकी पूरा वेतन संबंधित कॉलेज के खाते से उन्हें मिलता है। यानी पूरी की पूरी सेवाएं स्थाई प्रिंसिपल की तरह मिलती हैं। इस वेतन में तीन शिक्षकों की भर्ती आसानी से हो सकती है। हैरत तो ये है कि कुछ प्रिंसिपल पीएचडी धारक भी नहीं हैं, लेकिन वह री-अप्वाइंटमेंट का लाभ ले गए।
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इनसेट---
फोटो :::
अब वीसी पर टिकीं निगाहें
अब कई सीनेट सदस्यों व हजारों शिक्षकों की निगाहें वीसी प्रो. राजकुमार पर टिकी हैं। उनके निर्णय पूर्व वीसी की तरह होते हैं या फिर कुछ अलग। यदि वह सुबूत व विश्वास में लेकर इस निर्णय को पलट पाते हैं तो यह भी पीयू के इतिहास में एक अलग उपलब्धि होगी। मालूम हो कि दो दर्जन से अधिक कॉलेजों में री-अप्वाइंटमेंट वाले प्रिंसिपल काम कर रहे हैं।

क्या कहते हैं सीनेट व सिंडिकेट सदस्य
नोट ::: सभी के फोटो---

शिक्षकों का मारा जा रहा हक
पीयू संविधान व यूजीसी के नियमों को ताक में रखकर री-अप्वाइंटमेंट किया जा रहा है, जो कि गलत है। एक पक्ष लोकतांत्रिक तानाशाही कर रहा है। शिक्षकों का हक मारा जा रहा है। इसके खिलाफ सीनेट में आवाज उठाएंगे।
-डॉ. जगदीश मेहता, सीनेट सदस्य

पीयू के संविधान की पालना हो
प्रशासनिक पद पररी-अप्वाइंटमेंट करना गलत है। यदि किसी को सेवा में रखना है तो उसे गैस फैकल्टी के रूप में रख सकते हैं। पीयू का संविधान सर्वोपरि होना चाहिए। नियमों का पालन होना चाहिए।
- प्रो. चमन लाल, सीनेट सदस्य
दूसरों शिक्षकों को मिले मौका
सैद्घांतिक तौर पर मैं री-अप्वाइंटमेंट के खिलाफ हूं। दूसरे शिक्षकों को भी प्रिंसिपल बनने का मौका मिलना चाहिए। बैक डोर से इंट्री ठीक नहीं है। इसमें सुधार होना चाहिए। मैं पहले भी सीनेट में इस मामले को उठा चुका हूं।
- प्रो. गुरमीत सिंह, सीनेट सदस्य
शिक्षकों का हक मारा जा रहा
प्राचार्यों के पद पर री-अप्वाइंटमेंट किसी हाल में नहीं होना चाहिए। शिक्षकों का अधिकार मारा जा रहा है। अगर किसी प्रिंसिपल की बड़ी उपलब्धियां रही हैं तो उन्हें दूसरी जगह एडजेस्ट करें न कि प्रिंसिपल बनाएं।
- डॉ. अजय रंगा, सीनेट सदस्य

गलत के खिलाफ आवाज उठाऊंगा
पीयू के संविधान, यूजीसी के नियमों व पंजाब सरकार के आदेशों के नियमों की अनदेखी करके री-अप्वाइंटमेंट किए जा रहे हैं जो गलत हैं। मैंने इसका विरोध किया है। आगे भी मैं शिक्षकों के हक में खड़ा रहूंगा।
- डॉ. केके शर्मा, सिंडिकेट सदस्य

निर्णय के खिलाफ आवाज उठाएंगे
वर्षों से प्राचार्य के पदों पर री-अप्वाइंटमेंट किया जा रहा है। पीयू के संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सीनेट का सत्र बुलाकर जल्द ही इस निर्णय के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। शिक्षकों का अधिकार नहीं मरने देंगे।

-डॉ. सुभाष शर्मा, सीनेट सदस्य

टीचरों का हक मारना गलत
देश का भविष्य टीचर तैयार करते हैं। ऐसे में यदि उनका हक मारा जाता है तो वह गलत है। पीयू के संविधान व यूजीसी के नियमों के खिलाफ कोई कार्य नहीं होना चाहिए। शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखना होगा।
-प्रो. डीपीएस रंधावा, सीनेट सदस्य
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