फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   335 vulture will free in the sky at pinjor via satellite transmitter

पंचकूलाः पिंजौर से जल्द ही 8 गिद्ध खुले आसमान में भरेंगे उड़ान, एक खास डिवाइस करेगा सहयोग

Tue, 24 Sep 2019 03:18 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो संजय पारवाला, अमर उजाला, पंचकूला
संजय पारवाला, अमर उजाला, पंचकूला Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 24 Sep 2019 03:18 PM IST
विज्ञापन
335 vulture will free in the sky at pinjor via satellite transmitter
Vulture
गिद्ध प्रजनन केन्द्र पिंजौर में नवंबर के बाद और मार्च से पहले 8 गिद्धों को सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाने की मंजूरी मिल गई है और 4 ट्रांसमीटर आ भी गए है और बाकी के 4 का इंतजार है। इन गिद्धों की उड़ान के बाद 20 गिद्ध और छोड़े जाएंगे। वन विभाग और गिद्ध प्रजनन केन्द्र लंबे अर्से से सेटेलाइट ट्रांसमीटर की मंजूरी के लिए जुटा हुआ था।
विज्ञापन


गिद्ध प्रजनन केन्द्र में अब तक 335 गिद्ध हो चुके हैं और चूंकि 4 जून 2015 में जब दो गिद्ध छोड़े गए थे तब एक गिद्घ लापता हो गया था, इन गिद्घों की मॉनीटरिंग करने में बड़ी दिक्कत आई थी। यहां तक कि वाइल्ड लाइफ की टीम ने इन पर नजर रखने के लिए गांव-गांव तक छान मारे थे। साथ ही पंफलेट तक लोगों में बांटकर इन लापता गिद्धों के बारे में बताने को कहा था। उसके बाद सेटेलाइट ट्रांसमीटर की मांग उठी और तब से अब जाकर परमिशन मिली है।
विज्ञापन


प्रतिबंधित दवाओं से फेल हुई थी गिद्ध की किडनियां
पिंजौर गिद्ध प्रजनन केन्द्र में 2016-2017 में वन विभाग और गिद्ध प्रजनन केन्द्र की सांझा टीम ने पांच राज्यों, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, चंडीगढ़ में सर्वे किया था, जिसमें सामने आया कि इंटौक्सिक दवाओं का उपयोग हो रहा है। जिसके कारण गिद्ध की किडनियां खराब हुई थीं। चूंकि अक्सर पशु के दूध न देने की स्थिति में ऐसे इंजेक्शन पशु को लगाए जाते हैं और यदि पशु की मौत हो जाए तो गिद्ध उस पशु को खा लेता था और उसकी किडनियां खराब होनी शुरू हो गई। जिसके चलते गिद्ध लुप्त हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब ऐसी दवाओं की बिक्री पर विशेष नजर रखी जा रही है। गिद्घ मृत पशु का मांस अपने वजन से भी ज्यादा खा जाता है और डॉ. विभू के अनुसार एक गिद्ध आसमान में कई घंटे तक रेकी कर सकता है, जब सुरक्षित महसूस करता है, तभी मरे पशु को खाता है।
 

डीएनए टेस्ट के लिए गिद्ध प्रजनन केन्द्र में ही बनी लैब

गिद्ध के जन्म के बाद उसका डीएनए टेस्ट होता है। जो बेहद महत्वपूर्ण है। चूंकि ब्रीडिंग के वक्त इस बात का विशेष ख्याल रखा जाता है कि आपस में संबंध बनाने वाले गिद्ध कहीं भाई-बहन तो नहीं। जिसके चलते उनका लैब में ही डीएनए टेस्ट किया जाता है। जिसे गिद्ध प्रजनन केन्द्र के चीफ साइंटिस्ट बेहद महत्वपूर्ण मानते है। क्योंकि अक्सर केन्द्र में जोड़े बनाए जाते है और यह जोड़े भाई-बहन के बीच में न बने। इसके लिए डीएनए टेस्ट किया जाता है।

2015 में केंद्रीय मंत्री ने रिलीज किए थे दो गिद्ध
2004 में पिंजौर में वन विभाग की जमीन पर गिद्ध प्रजनन केन्द्र बना और 2006 में यहां गिद्धों की ब्रीडिंग होनी शुरू हो गई थी और जनवरी 2017 में यहां गिद्घों की संख्या 226 तक जा पहुंची और अब सितंबर 2019 तक गिद्धों की संख्या 335 तक पहुंच गई है। लेकिन गिद्धों की देखभाल की जिम्मेदारी सीनियर साइंटिस्ट डॉ. विभू प्रकाश के हाथों में है।

पिछले 15 सालों की बात करें तो 4 जून 2015 गिद्धों को तत्कालीन केन्द्रीय वन पर्यावरण और जलवायु मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और हरियाणा के वनमंत्री राव नरबीर सिंह ने 2 गिद्ध रिलीज किए थे। इस दौरान 1 गिद्ध तो कई दिन तक उड़ा ही नहीं और एक लापता हो गया था। उसके बाद सेटेलाइट ट्रांसमीटर की जरूरत समझी गई।

 

गिद्ध एक सामाजिक जीव है, जो अकेला नहीं रह सकता

गिद्ध प्रजनन केन्द्र में एक गिद्ध पर 80 हजार रुपये से ज्यादा का खर्च आ रहा है और गिद्धों को खुले आसमान में छोड़ने से पहले गिद्ध प्रजनन केन्द्र में 100 फुट लंबा-चौड़ा पिंजरा बनाया हुआ है। ताकि वहां गिद्ध बाहरी माहौल महसूस कर सकें। इस दौरान इनकी हर गतिविधि पर 10 से 12 लोगों की टीम नजर रखती है।

खासकर सीसीटीवी कैमरे से इन पर नजर रहती है। गिद्ध एक सामाजिक जीव है, जो अकेला नहीं रह सकता। गिद्ध प्रजनन केन्द्र पिंजरों के बाहर मांस इसलिए डाल रहा है। ताकि गिद्ध का बाहरी गिद्धों से तालमेल बढ़ सके और जब उसे पिंजरे से बाहर छोड़ा जाए तो उसे दिक्कत महसूस न हो पाए।

7 गिद्धों के पैरों में सेटेलाइट ट्रांसमीटर डिवाइस लगाने की परमिशन मिल गई है और 4 सेटेलाइट ट्रांसमीटर आ भी गए है और 4 का इंतजार है। हमें नवंबर से मार्च 2020 तक ये 8 गिद्ध छोड़ने है और उसके बाद खुले आसमान में 20 और गिद्धों को छोड़ा जाएगा। सेटेलाइट डिवाइस इन गिद्धों के पैरों में लगने के बाद इन पर नजर रखना बेहद आसान होगा।

इनकी हर एक्टिविटी पर हमारी नजर रहेगी। वन विभाग सराहनीय योगदान दे रहा है। इनके पिंजरों में इन्हेें बाहरी माहौल का एहसास कराया जा रहा है, ताकि उड़ने पर इन्हें दिक्कतें न आए और इन्हें बाहर खाने का इंतजाम भी करना है, इनकी ऐसी हर गतिविधि पर हमारी नजर रहेगी। हमारी टीम मिलकर कड़ी मेहनत कर रही है।
- डॉ. विभू प्रकाश, चीफ साइंटिस्ट, गिद्ध प्रजनन केन्द्र पिंजौर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed